अमरावती अस्पताल के NICU में भीषण आग, 3 नवजात जिंदा जले; CM ने दिए हाई लेवल जांच के आदेश
Amravati Hospital Fire: अमरावती के जिला महिला अस्पताल के NICU में भीषण आग से 3 नवजातों की मौत हो गई। CM देवेंद्र फडणवीस ने हाई लेवल जांच के आदेश दिए हैं।
Amravati Hospital Fire: महाराष्ट्र के अमरावती स्थित जिला महिला अस्पताल के NICU में सोमवार तड़के करीब 3:15 बजे भीषण आग लगने से तीन नवजात शिशुओं की मौत हो गई। हादसा उस वार्ड में हुआ, जहां समय से पहले जन्मे, कम वजन और गंभीर हालत वाले बच्चों का इलाज चल रहा था। घटना के बाद अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई और परिजनों में आक्रोश फैल गया।
आग की सूचना मिलते ही अस्पताल के कर्मचारियों, सुरक्षाकर्मियों और दमकलकर्मियों ने राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। अधिकारियों के मुताबिक NICU में भर्ती अन्य नवजातों को सुरक्षित बाहर निकालकर दूसरे अस्पतालों में भेजा गया।
पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों के शुरुआती बयान के मुताबिक NICU में एक वेंटिलेटर में विस्फोट के बाद आग भड़की। घटना के समय NICU में कुल 39 बच्चे भर्ती थे। आग प्रभावित हिस्से से कई बच्चों को बाहर निकाला गया।
अमरावती के पुलिस आयुक्त राकेश ओला के अनुसार, बचाए गए छह नवजातों को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल ले जाया गया, जबकि चार अन्य बच्चों को संभागीय रेफरल सेवा अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें एक बच्चे की हालत गंभीर बताई गई। तीनों मृत नवजातों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए हैं।
हादसे के बाद अस्पताल की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों का दावा है कि आग लगने के बाद वार्ड में फायर अलार्म नहीं बजा। यह भी आरोप लगाया गया कि धुआं भरने के बावजूद ऑटोमेटिक स्प्रिंकलर सिस्टम सक्रिय नहीं हुआ।
ड्यूटी पर मौजूद नर्सों ने घने धुएं और तेज गर्मी के बीच बच्चों को बाहर निकालने की कोशिश की। अस्पताल कर्मियों के मुताबिक कई बच्चों को इन्क्यूबेटर समेत सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।
हादसे ने कई परिवारों की खुशियों को मातम में बदल दिया। पुलगांव निवासी स्वप्निल बरगे ने बताया कि उनके बेटे का जन्म रविवार को हुआ था और उन्होंने कुछ घंटे पहले ही परिवार को इसकी खुशखबरी दी थी। लेकिन सोमवार सुबह उन्हें अपने नवजात बेटे की मौत की खबर मिली।
एक अन्य परिजन प्रफुल्ल चोपड़े ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आग लगने के बाद अलार्म क्यों नहीं बजा और आपातकालीन अग्निशमन व्यवस्था तत्काल क्यों सक्रिय नहीं हुई।
CM देवेंद्र फडणवीस ने दिए हाई लेवल जांच के आदेश
घटना के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दुख जताते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने स्वास्थ्य प्रशासन को आग लगने के कारणों और संभावित लापरवाही की जांच करने का निर्देश दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच में जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री प्रकाशराव अबितकर और स्वास्थ्य सचिव को अमरावती पहुंचकर स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए।
सरकार ने मृत नवजातों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की है। घायल और प्रभावित बच्चों के इलाज का खर्च सरकार की ओर से उठाने की बात कही गई है।
महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाशराव अबितकर ने घटना की जांच के लिए सात सदस्यीय समिति गठित करने की घोषणा की है। समिति आग लगने के कारण, अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था, मेडिकल उपकरणों की स्थिति और संभावित प्रशासनिक लापरवाही की जांच करेगी।
राजस्व मंत्री एवं अमरावती के प्रभारी मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने भी कहा कि दमकल विभाग और लोक निर्माण विभाग के विद्युत विभाग की मदद से व्यापक जांच कराई जाएगी।
हादसे के बाद महाराष्ट्र में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता और पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भंडारा अस्पताल अग्निकांड के बाद सुरक्षा को लेकर की गई सिफारिशों को गंभीरता से लागू नहीं किया गया।
गौरतलब है कि 2021 में भंडारा के एक अस्पताल में आग लगने से 10 नवजात शिशुओं की मौत हुई थी।
कांग्रेस नेता यशोमती ठाकुर ने भी अस्पताल का दौरा किया और वेंटिलेटर में विस्फोट को आग का कारण बताए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने अस्पताल की बिजली व्यवस्था और मेडिकल उपकरणों की सुरक्षा की जांच की मांग की।
अमरावती NICU अग्निकांड ने सरकारी अस्पतालों में नवजातों की सुरक्षा और फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल सात सदस्यीय समिति की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आग वास्तव में किस वजह से लगी और क्या अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था में कोई गंभीर चूक हुई थी।