TMC के बागी खेमे को बड़ा झटका! ममता के खिलाफ बगावत से पीछे हटे ये मुस्लिम विधायक, बोले- ‘दीदी ही सब कुछ...’

TMC Kasem Siddiqui Rejoin Mamta: पश्चिम बंगाल में TMC के बागी खेमे को बड़ा झटका लगा है। आमडांगा विधायक कासेम सिद्दीकी ने ममता बनर्जी के खेमे में वापसी का ऐलान करते हुए कहा कि ‘दीदी ही सब कुछ हैं’ और वह हमेशा उनके साथ रहेंगे।

Update:2026-08-25 08:11 IST

TMC Kasem Siddiqui Rejoin Mamta: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची अंदरूनी कलह और गुटबाजी के बीच एक बेहद नाटकीय मोड़ देखने को मिला है। ममता बनर्जी के खिलाफ झंडा बुलंद करने वाले बागी टीएमसी विधायकों के खेमे में बड़ी सेंध लग गई है। उत्तर 24 परगना जिले की हाईप्रोफाइल आमडांगा विधानसभा सीट से टीएमसी विधायक कासेम सिद्दीकी ने बागी गुट का दामन छोड़कर वापस ममता बनर्जी के आधिकारिक खेमे में लौटने का ऐलान कर दिया है। अपनी 'घर वापसी' के साथ ही उन्होंने पार्टी की सर्वोच्च नेता के प्रति अपना अटूट विश्वास जताया और भावुक अंदाज में स्वीकार किया कि उनके लिए 'दीदी (ममता बनर्जी) ही सब कुछ हैं।' उनके इस कदम से बागी गुट को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है।

50 से अधिक विधायकों ने खोला था मोर्चा

गौरतलब है कि इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के 50 से अधिक विधायकों ने अपनी ही सरकार और शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ बागी रुख अपना लिया था। ये सभी असंतुष्ट विधायक विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले बागी गुट में शामिल हो गए थे और उन्होंने ममता बनर्जी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मोर्चा खोल दिया था। हालांकि, हुगली जिले के ऐतिहासिक फुरफुरा शरीफ दरगाह से संबंध रखने वाले प्रभावशाली नेता 'पीरजादा' कासेम सिद्दीकी की वापसी ने बागी खेमे की नींव हिला दी है। सिद्दीकी की इस घर वापसी के बाद ममता बनर्जी के प्रति वफादारी जताने वाले मुस्लिम विधायकों का मनोबल काफी बढ़ा है।

सिद्दीकी ने बयां की बागी गुट की अंदरूनी साजिश

ममता बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए विधायक कासेम सिद्दीकी ने बागी गुट से अलग होने की मुख्य वजह सार्वजनिक की। उन्होंने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें और उनके जैसे कई विधायकों को गुमराह किया गया था। सिद्दीकी के अनुसार, "हमें झांसा देकर यह बताया गया था कि जिस दस्तावेज पर हमसे हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं, वह सीधे दीदी के पास ही जाएगा। हमें बार-बार यही समझाया गया कि यह पूरा बागी गुट भी अंततः ममता बनर्जी के दिशा-निर्देशों पर ही काम कर रहा है।" उन्होंने आगे खुलासा किया कि जब वे वहां पहुंचे, तो उन्हें अहसास हुआ कि उस गुट के कामकाज में टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी का नाम तक शामिल नहीं था।

'दीदी का चेहरा दिखाकर जीता चुनाव'

इंडिया टुडे की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कासेम सिद्दीकी ने भावुक लहजे में कहा कि ममता बनर्जी ने ही उन्हें जनता की सेवा के लिए पार्टी का चुनाव चिह्न और टिकट दिया था। उन्होंने स्पष्ट कहा, "हम सभी ने चुनाव प्रचार के दौरान केवल दीदी की तस्वीर दिखाकर जनता से वोट मांगे थे और आमडांगा के मतदाताओं ने भी ममता दीदी के चेहरे पर भरोसा करके हमें चुनकर विधानसभा भेजा। ऐसे में उनके साथ गद्दारी का सवाल ही नहीं उठता। मैं जब तक सक्रिय राजनीति में रहूंगा, पूरी निष्ठा के साथ दीदी के साथ ही खड़ा रहूंगा।"

मुस्लिम मतदाताओं में मजबूत पकड़ रखते हैं पीरजादा कासेम सिद्दीकी

फुरफुरा शरीफ के प्रतिष्ठित पीरजादा परिवार से आने वाले कासेम सिद्दीकी की बंगाल के मुस्लिम समुदाय के बीच काफी गहरी और मजबूत सामाजिक-धार्मिक पकड़ मानी जाती है। पिछले वर्ष ही वे औपचारिक रूप से तृणमूल कांग्रेस का दामन थामकर सक्रिय राजनीति में आए थे। पार्टी नेतृत्व ने भी उनके प्रभाव को देखते हुए उन्हें राज्य संगठन में सीधे प्रदेश महासचिव का अहम पद सौंपा था और आमडांगा सीट से मैदान में उतारा था, जहां से उन्होंने भारी मतों से जीत हासिल की थी। उनके वापस ममता खेमे में लौटने से संगठन को जमीनी स्तर पर बड़ी मजबूती मिली है।

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