‘कब तक बुड्ढे लोग ...’, अन्ना हजारे पर अभिजीत दीपके की टिप्पणी से बवाल! अमित मालवीय ने घेरा
Anna Hazare Controversy: अन्ना हजारे को लेकर अभिजीत दीपके के ‘बुड्ढे लोग’ वाले बयान पर विवाद बढ़ गया है। अमित मालवीय ने दीपके को फटकार लगाते हुए कहा कि राजनीतिक असहमति के बावजूद शालीनता और मर्यादा जरूरी है।
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Anna Hazare Controversy: सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे (Anna Hazare) को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अभिजीत दीपके (Abhijit Deepke) के एक बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है।
दीपके ने अन्ना हजारे जैसे बुजुर्ग लोगों को रिटायर होकर आश्रम में बैठने की नसीहत दी और कहा कि आखिर कब तक बुजुर्ग लोग फैसले लेते रहेंगे।
उनके इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय (Amit Malviya) भड़क गए और उन्होंने दीपके को जमकर लताड़ लगाई।
दीपके ने क्या कहा था?
दरअसल, सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके से मीडिया ने अन्ना हजारे से जुड़े सवाल पर प्रतिक्रिया मांगी थी।
इस दौरान दीपके ने कहा कि उन्हें लगता है कि अब युवाओं को चीजें अपने हाथ में लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जो लोग 60 से 70 साल के हो गए हैं, उन्हें राजनीति (Politics) हो या एक्टिविजम (Activism), रिटायर हो जाना चाहिए।
दीपके ने कहा कि ऐसे लोगों को रिटायर होकर आश्रम में बैठ जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह उनके और छात्रों के भविष्य (Students Future) का सवाल है और युवाओं को खुद तय करना चाहिए कि उन्हें क्या करना है।
इसी दौरान उन्होंने बुजुर्गों के लिए ‘बुड्ढे’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए सवाल किया कि आखिर कब तक ऐसे लोग, जिनका सबकुछ हो चुका है, फैसले लेते रहेंगे।
दीपके के इस बयान के सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया। खास तौर पर अन्ना हजारे जैसे वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता के लिए इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर सवाल उठने लगे।
अमित मालवीय ने लगाई लताड़
दीपके के बयान पर बीजेपी नेता और पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दीपके के वीडियो को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए उनके बयान को बदतमीजी और संस्कारों की कमी बताया।
अमित मालवीय ने कहा कि यह सिर्फ बदतमीजी नहीं है, बल्कि संस्कारों के पूर्ण अभाव को भी दिखाता है। उन्होंने कहा कि अन्ना हजारे जैसे बुजुर्गों से प्रेरणा लेने की जरूरत नहीं होने जैसी भाषा का इस्तेमाल करना बेहद आपत्तिजनक है।
मालवीय ने आगे कहा कि जो व्यक्ति अपने से कहीं ज्यादा उम्र के लोगों के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करता है, उसे पहले यह सोचना चाहिए कि उसके अपने पिता की उम्र क्या है। उन्होंने सवाल किया कि क्या वह अपने पिता के लिए भी ऐसी ही शब्दावली को स्वीकार करेगा।
‘राजनीतिक असहमति अपनी जगह’
अमित मालवीय ने कहा कि राजनीतिक असहमति (Political Disagreement) अपनी जगह है, लेकिन बातचीत में शालीनता और मर्यादा (Decorum) का भी कोई अर्थ होता है।
उन्होंने कहा कि जब भाषा का स्तर गिर जाता है, तो तर्क भी उसके साथ कमजोर पड़ जाते हैं। मालवीय की इस प्रतिक्रिया के बाद अन्ना हजारे को लेकर अभिजीत दीपके के बयान पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
एक तरफ दीपके युवाओं को राजनीति और सामाजिक आंदोलनों में आगे आने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके बयान में इस्तेमाल किए गए शब्दों को लेकर बीजेपी ने निशाना साधा है।
अन्ना हजारे ने दीपके के आंदोलन का किया था समर्थन
इस पूरे विवाद की एक अहम कड़ी यह भी है कि अभिजीत दीपके के नेतृत्व में एक महीने से ज्यादा समय तक चले आंदोलन को अन्ना हजारे का समर्थन मिला था।
अन्ना हजारे ने पिछले महीने छात्रों के समर्थन में महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में दो घंटे का मौन आंदोलन (Silent Protest) किया था।
हजारे ने अहिल्यानगर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास विरोध प्रदर्शन किया था। उन्होंने छात्रों के आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा था।
पुलिस कार्रवाई और हिंसा की खबरों पर जताई थी चिंता
अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में कहा था कि आंदोलन के दौरान हिंसा और पुलिस कार्रवाई की खबरें बेहद पीड़ादायक हैं।
उन्होंने कहा था कि प्रदर्शनकारियों के असंतोष को सिर्फ कानून-व्यवस्था की समस्या (Law and Order Issue) के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
हजारे ने अपने पत्र में कहा था कि प्रदर्शनकारियों की नाराजगी को समाज की पीड़ा और उसकी अपेक्षाओं के तौर पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले को उसी नजरिए से देखने की अपील की थी।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की थी
अन्ना हजारे ने अपने पत्र में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) के इस्तीफे की मांग को लेकर भी अपनी बात रखी थी।
उन्होंने कहा था कि अगर धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा देने को कहा जाता है तो इससे सरकार नहीं गिरेगी, बल्कि सरकार की कार्यप्रणाली ज्यादा जवाबदेह और प्रभावी बनेगी।
हजारे के मुताबिक प्रदर्शनकारियों की मांगों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए था।
बाद में भारी दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों की अन्य मांगों को भी सरकार ने मान लिया था।
मांगें माने जाने के बाद खत्म हुआ था आंदोलन
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रदर्शनकारियों की अन्य मांगों को सरकार की ओर से माने जाने के बाद जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन खत्म हो गया था। इसी आंदोलन के समर्थन में अन्ना हजारे ने भी छात्रों के पक्ष में आवाज उठाई थी।
यानी जिस आंदोलन को लेकर अन्ना हजारे ने छात्रों के समर्थन में मौन प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सरकार से प्रदर्शनकारियों की पीड़ा समझने की अपील की थी, उसी आंदोलन के नेता अभिजीत दीपके ने अब अन्ना हजारे की उम्र को लेकर टिप्पणी कर विवाद खड़ा कर दिया है। इस बयान पर अमित मालवीय की तीखी प्रतिक्रिया के बाद मामला और चर्चा में आ गया है।