'PM गद्दारों के साथ...' बागी सांसदों संग प्रधानमंत्री की बैठक पर भड़के उद्धव, पूछे 5 तीखे सवाल!
Uddhav Thackeray Slams PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एकनाथ शिंदे गुट के बागी सांसदों से मुलाकात पर उद्धव ठाकरे ने तीखा हमला बोला है। उद्धव ने पीएम मोदी से कई सवाल पूछते हुए आरोप लगाया कि बागी नेताओं को दिया गया संदेश कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
Uddhav Thackeray Slams PM Modi: महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। शिवसेना (UBT) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कई सवाल खड़े किए हैं। ठाकरे की यह प्रतिक्रिया तब आई जब पीएम मोदी ने एकनाथ शिंदे नीत गुट के बागी सांसदों से नई दिल्ली में मुलाकात की। मुंबई में मीडिया से बातचीत करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस मुलाकात को लेकर केंद्र सरकार और बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश में जब लोकतंत्र की बात होती है, तब इस तरह की मुलाकातों से जनता के बीच गलत संदेश जाता है।
ठाकरे का तंज
पत्रकारों को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि देश का युवा आज सड़कों पर आंदोलन कर रहा है और जंतर-मंतर पर 'जनरेशन जेड' के छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के पास इन युवाओं की समस्याएं सुनने का समय नहीं है। लेकिन पार्टी के साथ धोखा करने वाले नेताओं के साथ पीएम के पास चाय पीने का पूरा समय है। ठाकरे ने आरोप लगाया कि जो लोग अपनी मूल पार्टी से अलग हुए हैं, उन्हें शीर्ष नेतृत्व विशेष तवज्जो दे रहा है। उन्होंने कहा कि देश चलाने के लिए सही लोगों से संवाद होना जरूरी है।
आखिर किसको दिया गया यह बड़ा संदेश?
उद्धव ठाकरे ने पीएम मोदी और बागी सांसदों के बीच हुई बातचीत पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का बागी नेताओं से यह कहना कि 'डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूं', कई गंभीर शंकाएं पैदा करता है। ठाकरे ने सवाल पूछा कि आखिर यह दिलासा किसके लिए है? क्या यह संदेश गृह मंत्री अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस के लिए है या फिर उन नेताओं के लिए जो भविष्य में बगावत करने की सोच रहे हैं? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब सब कुछ सही हुआ है, तो फिर बागी नेताओं को डर किस बात का सता रहा है?
क्या SC और न्यायपालिका पर दबाव बनाने की हो रही कोशिश?
अपने बयान में उद्धव ठाकरे ने इस बात पर चिंता जताई कि शिवसेना के विभाजन का मामला पिछले 4 सालों से सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। अब जब कोर्ट में इस केस की अंतिम सुनवाई चल रही है, ऐसे वक्त में प्रधानमंत्री का यह कदम न्यायपालिका पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाने जैसा लगता है। ठाकरे ने अंदेशा जताया कि शायद यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि केंद्र की पूरी ताकत इन बागी नेताओं के पीछे खड़ी है। हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्हें देश के संविधान, कानून और मुख्य न्यायाधीश की निष्पक्षता पर पूरा भरोसा है।
2022 से चल रही है कानूनी लड़ाई
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में शिवसेना में हुई टूट के बाद से पार्टी के नाम और उसके चुनाव निशान 'धनुष-बाण' को लेकर कानूनी जंग जारी है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर लगातार सुनवाई कर रहा है। ऐसे मोड़ पर पीएम मोदी की शिंदे गुट के सांसदों से हुई इस बैठक ने महाराष्ट्र के सियासी माहौल में नया उबाल ला दिया है। उद्धव गुट का मानना है कि सुनवाई के समय ऐसी गतिविधियां निष्पक्ष प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में देश की सर्वोच्च अदालत इस पूरे मामले पर क्या फैसला सुनाती है।