TMC rebel MPs Merger: बंगाल की राजनीति में भूचाल... बागी TMC सांसद क्षेत्रीय पार्टी NCPI में होंगे शामिल
Bengal Politics: तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों ने दावा किया है कि पार्टी के 20 सांसद अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल होने जा रहे हैं और भविष्य में एनडीए को समर्थन देंगे। काकोली घोष दस्तीदार और सुदीप बंद्योपाध्याय ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात के बाद यह दावा किया। वहीं, अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर को पत्र भेजकर किसी भी अलग गुट को मान्यता न देने की मांग की है।
TMC rebel MPs NCPI merger: रविवार का दिन राजधानी दिल्ली में भारी सियासी उठापटक वाला रहा। पश्चिम बंगाल में पिछले पंद्रह सालों से सत्ता पर काबिज रही ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में एक बहुत बड़ी बगावत देखने को मिली है। दरअसल, बंगाल विधानसभा चुनावों में मिली करारी शिकस्त के बाद पार्टी के भीतर सुलग रही असंतोष की आग अब पूरी तरह से भड़क चुकी है। पार्टी के कामकाज के तरीकों और फैसलों से लंबे समय से नाराज चल रहे टीएमसी के करीब बीस दिग्गज सांसदों ने खुलेआम बागी तेवर अपना लिए हैं और अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
बीजेपी नेता के घर बैठक और स्पीकर से मुलाकात
इस पूरी राजनीतिक बगावत की अहम पटकथा रविवार को दिल्ली में लिखी गई। शुरुआत में टीएमसी सांसद सायानी घोष सीधे केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर पहुंचीं। कुछ ही देर में सुदीप बंद्योपाध्याय, काकोली घोष दस्तिदार, शताब्दी रॉय, माला रॉय, प्रसून बनर्जी और अरूप चक्रवर्ती जैसे कई बड़े नेताओं का वहां पहुंचना शुरू हो गया। इन चर्चित चेहरों के अलावा जगदीश बसुनिया, पार्थ भौमिक, जून मालिया, मिताली बाग और बापी हलधर भी इस गुट का हिस्सा बने।
टीएमसी और बीजेपी आमतौर पर एक-दूसरे की धुर विरोधी मानी जाती हैं, ऐसे में इन सांसदों का बीजेपी मंत्री के घर जाकर करीब दो घंटे तक रुकना अपने आप में एक बहुत बड़ा राजनीतिक संदेश है। भूपेंद्र यादव के घर मंथन करने के बाद यह पूरा बागी गुट सीधे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के पास पहुंचा और सदन में अपने लिए अलग बैठने की व्यवस्था करने की औपचारिक मांग रख दी।
नई पार्टी में विलय और एनडीए को समर्थन
बागी गुट की तरफ से काकोली घोष दस्तिदार ने एक बेहद अहम दावा करते हुए कहा कि उनके साथ बीस सांसद मौजूद हैं। यह आंकड़ा टीएमसी की कुल संसदीय ताकत के दो-तिहाई हिस्से से भी कहीं ज्यादा है, जिससे उन पर दल-बदल कानून का खतरा कम हो जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि उनका यह विद्रोही धड़ा अब 'नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया' नाम के एक मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय दल में अपना विलय कर रहा है। इन बागी नेताओं ने खुले तौर पर यह ऐलान कर दिया है कि वे अब आगे प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ मिलकर काम करेंगे और अपना पूर्ण समर्थन देंगे।
असली टीएमसी की जंग अब अदालत के दरवाजे पर
इस नाटकीय घटनाक्रम के बीच वरिष्ठ बागी नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने साफ कर दिया है कि उन्होंने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी में अपना विलय पूरा कर लिया है। साथ ही उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि 'असली टीएमसी' पर किसका हक है, इसका अंतिम फैसला अब अदालत ही करेगी।
दूसरी ओर, अपनी टूटती पार्टी को बचाने की आखिरी कोशिश के तहत टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने तुरंत मोर्चा संभाला। उन्होंने लोकसभा स्पीकर को एक पत्र सौंपकर कड़े शब्दों में यह मांग की है कि इस बागी समूह को सदन की तरफ से कोई भी आधिकारिक मान्यता न दी जाए। कुल मिलाकर, बंगाल से शुरू हुई यह अंदरूनी कलह अब दिल्ली के गलियारों में ममता बनर्जी के लिए एक बहुत बड़ा राजनीतिक संकट बन चुकी है।