TMC Revolt: '19 नहीं अब 22 सांसद...', TMC की बागी सांसद काकोल घोष का दावा, कल स्पीकर से करेंगी अलग गुट की मांग
TMC Revolt: टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि उनके नेतृत्व वाले बागी खेमे में अब 22 सांसद शामिल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह गुट लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर खुद को एक अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता देने की मांग करेगा।
TMC Revolt: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर एक बड़े सियासी तूफान की आहट सुनाई दे रही है. विधानसभा चुनाव के बाद से ही पार्टी के अंदर चल रही तनातनी अब खुलकर सामने आ गई है. हालात इतने गंभीर हैं कि टीएमसी के 20 से अधिक सांसद पार्टी से नाता तोड़कर एक अलग गुट बनाने की पूरी तैयारी कर चुके हैं. इतना ही नहीं, यह बागी धड़ा केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को अपना समर्थन देने की बात भी कह रहा है.
स्पीकर से मान्यता मांगने की तैयारी
ममता बनर्जी की पार्टी में हो रही इस बड़ी बगावत का नेतृत्व सांसद काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं. उन्होंने दावा किया है कि अब उनके साथ कुल 22 सांसद आ चुके हैं. पहले यह संख्या 20 बताई जा रही थी, लेकिन हाल ही में दो और सांसदों ने इस गुट से हाथ मिला लिया है. हालांकि, काकोली ने इन दो नए नामों का खुलासा करने से इनकार कर दिया और कहा कि जब ये लोग औपचारिक रूप से गुट में शामिल होंगे, तभी इनके नाम सार्वजनिक किए जाएंगे. अपने इस नए पार्लियामेंट्री ब्लॉक को संसदीय मान्यता दिलाने के लिए यह सभी बागी सांसद सोमवार को दिल्ली जा रहे हैं, जहां वे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात करेंगे. कोलकाता एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए काकोली घोष ने खुद इस रणनीति की पुष्टि की है.
19 सांसदों के हस्ताक्षर वाली चिट्ठी आई सामने
इस बगावत को तब और हवा मिली जब शुक्रवार को एक ऐसा दस्तावेज सामने आया जिस पर टीएमसी के 19 सांसदों के हस्ताक्षर मौजूद थे. इन हस्ताक्षर करने वालों में काकोली घोष दस्तीदार के अलावा सताब्दी रॉय, बापी हल्दर, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, असित माल, अरूप चक्रवर्ती, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी (देव), जून मालिया, पार्थ भौमिक, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग और माला रॉय जैसे बड़े नाम शामिल बताए जा रहे हैं. इसके साथ ही रचना बनर्जी और सायनी घोष के दस्तखत भी अलग से देखे गए हैं. इन सभी ने स्पीकर को चिट्ठी लिखकर मांग की है कि उन्हें काकोली घोष की अगुवाई में एक अलग गुट माना जाए. हालांकि, अभी तक इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है कि यह चिट्ठी स्पीकर के दफ्तर तक पहुंची है या नहीं, और इन हस्ताक्षरों की असलियत क्या है.
एनडीए को समर्थन और दिल्ली में अहम बैठक
यह पूरा घटनाक्रम सिर्फ एक पार्टी से अलग होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर विरोधी खेमे को मजबूत करने का संकेत है. बागी गुट ने साफ कर दिया है कि वे केंद्र की एनडीए सरकार के साथ खड़े होंगे. इस पूरी राजनीतिक बिसात को बिछाने के लिए बागी सांसदों की एक अहम बैठक पहले कोलकाता में होनी तय हुई थी, लेकिन अब इसे दिल्ली शिफ्ट कर दिया गया है. चर्चा थी कि मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी भी इस बैठक का हिस्सा बनेंगे, लेकिन किसी सरकारी काम में व्यस्त होने के चलते उनका शामिल होना मुश्किल लग रहा है.
दिग्गज नेता जो इस बगावत से दूर हैं
जहां एक तरफ आधी पार्टी टूटने की कगार पर खड़ी है, वहीं टीएमसी के कई बड़े चेहरे इस पूरी बगावत से खुद को दूर रखे हुए हैं. सामने आए हस्ताक्षर वाले कागज में अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी, सौगत रॉय, महुआ मोइत्रा, कीर्ति आजाद, शत्रुघ्न सिन्हा, प्रतिमा मंडल और सज्दा अहमद जैसे कद्दावर नेताओं के नाम गायब थे. इसी बीच एक और दिलचस्प राजनीतिक हलचल तब देखने को मिली जब टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने शनिवार को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की. इस मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में इन अटकलों को तेज कर दिया है कि क्या सुदीप भी भविष्य में इस बागी गुट का हिस्सा बन सकते हैं. फिलहाल इस बारे में कोई पक्की जानकारी नहीं है, लेकिन कुल मिलाकर ममता बनर्जी की पार्टी एक बड़े और ऐतिहासिक विभाजन के मुहाने पर खड़ी नजर आ रही है.