बिहार कैबिनेट में ‘बड़ा बदलाव’ जल्द! इन नेताओं की लगेगी लाॅटरी, BJP-JDU की फाइनल लिस्ट तैयार

Bihar Cabinet Expansion: सम्राट चौधरी के नेतृत्व में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सत्ता के गलियारों में 6 मई की तारीख खास मानी जा रही है, जब नए मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है।

Update:2026-04-30 13:51 IST

Samrat Chaudhary

Bihar Cabinet Expansion: बिहार की राजनीति में इन दिनों सत्ता पक्ष की पकड़ काफी मजबूत नजर आ रही है, जबकि विपक्ष कमजोर होता दिख रहा है। इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सत्ता के गलियारों में 6 मई की तारीख खास मानी जा रही है, जब नए मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड के बीच सीटों को लेकर 50-50 फार्मूले पर सहमति बन गई है। वहीं सहयोगी दलों को सीमित हिस्सेदारी यानी करीब 4 सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस विस्तार में बड़े बदलाव की उम्मीद कम है और ज्यादातर पुराने चेहरों को ही बरकरार रखा जा सकता है।

BJP के भीतर संतुलन की कोशिश

बीजेपी के अंदरूनी हालात की बात करें तो पार्टी के भीतर पुराने और नए नेताओं के बीच तालमेल बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में पार्टी रणनीतिकार संतुलन की नीति पर काम कर रहे हैं। इसमें जातीय समीकरण, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और युवा व महिला नेताओं को शामिल करने जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, संभावित मंत्रिमंडल में कई मौजूदा मंत्रियों को दोबारा मौका मिल सकता है। इनमें मंगल पांडेय, विजय सिन्हा, रामकृपाल यादव, जीवेश मिश्रा, श्रेयसी सिंह, लखेंद्र पासवान, रमा निषाद और प्रमोद कुमार चंद्रवंशी जैसे नाम प्रमुख हैं। इसके अलावा कुछ नए चेहरों को भी शामिल करने की तैयारी है, जिससे पार्टी के भीतर नई ऊर्जा लाई जा सके।

नए चेहरों को भी मिल सकता है मौका

बीजेपी में कुछ बदलावों की भी चर्चा है। उदाहरण के तौर पर नितिन नवीन की जगह संजय मयूख का नाम सामने आ रहा है। प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी की जगह डॉ. राजेंद्र गुप्ता को मौका मिलने की अटकलें हैं। इसके अलावा आनंद मिश्रा, मिथिलेश तिवारी, इंजीनियर शैलेन्द्र, रजनीश कुमार, संगीता कुमारी और रत्नेश कुशवाहा जैसे युवा नेताओं को भी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना है। यह संकेत देता है कि पार्टी अनुभव और युवाओं के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना चाहती है।

जेडीयू में स्थिरता का माहौल

वहीं जनता दल यूनाइटेड के भीतर फिलहाल ज्यादा हलचल नहीं दिख रही है। पार्टी में यह माना जा रहा है कि हाल ही में बने मंत्रिमंडल का मूल्यांकन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला है, इसलिए बड़े बदलाव की संभावना कम है। जेडीयू के कोटे से जिन नेताओं के नाम चर्चा में हैं, उनमें बिजेंद्र यादव और विजय चौधरी पहले ही उपमुख्यमंत्री बनाए जा चुके हैं। इसके अलावा श्रवण कुमार, लेसी सिंह, अशोक चौधरी, जमा खान, शीला मंडल, सुनील कुमार, मदन सहनी, रत्नेश सदा, भगवान सिंह कुशवाहा और जयंत राज जैसे नेता संभावित सूची में शामिल बताए जा रहे हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि इस बार मंत्रिमंडल विस्तार में बड़े फेरबदल की बजाय स्थिरता पर जोर रहेगा। इससे यह संदेश देने की कोशिश होगी कि सरकार अपने मौजूदा कामकाज से संतुष्ट है और निरंतरता बनाए रखना चाहती है। हालांकि, विपक्ष की कमजोरी के बीच सत्ता पक्ष पर ज्यादा दबाव नहीं है, जिसके चलते प्रयोग करने की संभावना भी कम हो गई है। यही वजह है कि “यथास्थिति” की नीति इस बार के विस्तार में साफ तौर पर नजर आ सकती है। 

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