BJP ने बदला प्रोटोकॉल! नितिन नबीन के कुर्सी बदलते ही बदले नियम, नाम नहीं ’माननीय अध्यक्ष’ बुलाएं
BJP Protocol Guidelines: भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के मनोनयन के बाद पार्टी ने संगठनात्मक मर्यादा को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
Nitin Nabin
BJP Protocol Guidelines: भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में हाल ही में हुए अहम बदलावों के बाद पार्टी नेतृत्व की ओर से अनुशासन, मर्यादा और नई कार्यशैली को लेकर स्पष्ट संदेश दिया गया है। राष्ट्रीय स्तर से लेकर प्रदेश इकाइयों तक यह संकेत दिया जा रहा है कि संगठन में व्यक्ति नहीं, बल्कि पद और व्यवस्था सर्वोपरि हैं। इसी क्रम में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के पद को लेकर जहां सख्त प्रोटोकॉल लागू किया गया है, वहीं उत्तर प्रदेश में नए प्रदेश अध्यक्ष ने कार्यभार संभालते ही गुटबाजी और बागी तेवरों पर कड़ा रुख अपनाया है।
भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के मनोनयन के बाद पार्टी ने संगठनात्मक मर्यादा को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नितिन नबीन उम्र और राजनीतिक अनुभव के लिहाज से कई वरिष्ठ नेताओं से छोटे हैं, जिसके चलते आंतरिक बैठकों और अनौपचारिक चर्चाओं में कुछ नेता उन्हें नाम लेकर संबोधित कर रहे थे। इसे गंभीरता से लेते हुए पार्टी नेतृत्व ने सभी नेताओं और पदाधिकारियों को हिदायत दी है कि बातचीत के दौरान पद की गरिमा और संगठनात्मक प्रोटोकॉल का पूरा पालन किया जाए।
निर्देशों में कहा गया है कि पुराने निजी संबंध चाहे जैसे भी रहे हों, लेकिन सार्वजनिक या संगठनात्मक चर्चा में संबोधन पूरी तरह सम्मानजनक और पद के अनुरूप होना चाहिए।यह सख्ती इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि नितिन नबीन के जल्द ही पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। हालांकि, इन सबके बीच नितिन नबीन की सादगी और सहजता भी पार्टी में चर्चा का विषय बनी हुई है। वे अब भी अपने वरिष्ठ नेताओं से उसी सम्मान और विनम्रता के साथ मिलते-जुलते हैं, जैसा पहले करते थे।
पद संभालते ही पंकज चौधरी ने भी दिखाए तेवर
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश में नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पदभार संभालते ही अनुशासनहीनता के खिलाफ सख्त तेवर दिखाए हैं। हाल ही में एक विशेष जाति से जुड़े विधायकों की अलग बैठक और खेमेबाजी की चर्चाओं को लेकर उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह की गतिविधियां पार्टी के संविधान, सिद्धांतों और सामूहिक नेतृत्व की भावना के विरुद्ध हैं।
उन्होंने संकेत दिया कि संगठन के भीतर गुटबाजी को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। राजनीतिक गलियारों में इस सख्ती को लेकर अलग-अलग आकलन लगाए जा रहे हैं। कुछ इसे आगामी ‘मिशन-2027’ के मद्देनजर नेताओं की सक्रियता और टिकट की होड़ से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे नए प्रदेश अध्यक्ष की नेतृत्व क्षमता और अनुशासन कायम करने की पहली बड़ी परीक्षा मान रहे हैं।