छात्रों पर जुल्म के बाद अब मजदूरों पर निशाना...अभिजीत दीपके ने किया आर-पार का ऐलान, सरकार को दी खुली चेतावनी

CJP on Noida Labourers Arrested: नोएडा में मजदूरों पर हुई कार्रवाई और छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को लेकर CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक से पहले उन्होंने दमनकारी कार्रवाई रोकने और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने की मांग की।

Update:2026-08-24 17:03 IST

CJP on Noida Labourers Arrested: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की होने वाली राष्ट्रीय कार्यसमिति की अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील बैठक से ठीक पहले राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। CJP के संस्थापक और प्रमुख संयोजक अभिजीत दीपके ने नोएडा में अपने जायज अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे निजी कंपनियों के कामगारों पर हुई बर्बर पुलिसिया कार्रवाई का सख्त हवाला देते हुए सरकार के खिलाफ चौतरफा हमला बोल दिया है। दीपके ने दोटूक शब्दों में साफ कहा कि अपने न्यायसंगत अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले आम नागरिकों के खिलाफ दमनकारी कानूनों का खुलेआम दुरुपयोग तुरंत बंद किया जाना चाहिए।

अभिजीत दीपके ने सत्ता के रवैये पर अत्यंत आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जो क्रूरता और अन्याय नोएडा के बेबस श्रमिकों के साथ किया गया, ठीक वही हथकंडे अब देश के नौजवानों और छात्रों के खिलाफ आजमाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में स्पष्ट कर दिया कि अगर सरकार का यह दमनकारी रुख इसी तरह लगातार जारी रहा, तो देश की जनता और युवा इसे अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।

नोएडा में मजदूरों संग दरिंदगी

सोमवार को नोएडा में प्रदर्शनकारी श्रमिकों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई से जुड़ी एक व्यापक मीडिया रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए अभिजीत दीपके ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि अपने हक के लिए संघर्षरत लोगों को दबाने के लिए सरकारी तंत्र का गलत इस्तेमाल तुरंत रुकना चाहिए। उन्होंने एक प्रमुख समाचार पत्र की उस रिपोर्ट को रीपोस्ट किया, जिसमें उजागर किया गया था कि इस साल अप्रैल में करीब हफ्ते भर चले विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लगभग 200 प्राइवेट कंपनियों के मजदूरों को हिरासत में लिया था।

हैरान करने वाली बात यह रही कि अदालत से जमानत मिलने और पुलिस की पूछताछ पूरी होने से पहले इन बेकसूर कामगारों को औसतन 53 लंबे दिनों तक सलाखों के पीछे रहने को मजबूर किया गया। यह पूरी कार्रवाई सिस्टम की संवेदनहीनता को बयां करती है।

कहां गायब हो गया कथित 'पाकिस्तान कनेक्शन'?

प्रसिद्ध अखबार 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक बेहद चौंकाने वाली जांच रिपोर्ट को रीपोस्ट करते हुए CJP प्रमुख ने तीखा सवाल उठाया- "आखिर उस ढिंढोरा पीटे गए पाकिस्तान कनेक्शन का क्या हुआ?" इस खोजी जांच में यह साफ पाया गया कि उग्र प्रदर्शन के बाद भले ही उत्तर प्रदेश सरकार ने मजदूरों के वेतन और मजदूरी में बढ़ोतरी कर दी थी, लेकिन इसके बावजूद निर्दोष मजदूर महीनों तक जेल में ही सड़ाए जाते रहे।

बाद में न्यायपालिका ने उनमें से ज्यादातर श्रमिकों को जमानत पर रिहा करते हुए पुलिस तंत्र की कड़ी खिंचाई की। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी की कि पुलिस ऐसे संगीन दावों के समर्थन में कोई भी ठोस सबूत पेश करने में पूरी तरह नाकाम रही और उसने केवल प्रदर्शन स्थल पर मौजूदगी को ही अपराध मानकर बेदर्दी से कार्रवाई की। हालांकि, इसके बावजूद हिरासत में लिए गए 2 लाचार मजदूरों पर कड़ा 'नेशनल सिक्योरिटी एक्ट' (NSA) थप दिया गया, ताकि उन्हें लंबे समय तक बिना ट्रायल जेल में रखा जा सके।

राष्ट्रीय कार्यसमिति में आर-पार की रणनीति

अभिजीत दीपके ने अपने बयान में सख्त लहजे में लिखा कि सरकार को अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क पर उतरे नागरिकों के खिलाफ प्रशासनिक और कानूनी शक्तियों का बेजा इस्तेमाल फौरन बंद करना होगा। उन्होंने कहा कि नोएडा के मेहनतकश मजदूरों के साथ जो घटिया बर्ताव किया गया, ठीक वही साजिश अब देश के भावी कर्णधारों और छात्रों के साथ दोहराने की योजना है, जिसे अब आगे बिल्कुल सहन नहीं किया जाएगा।

गौरतलब है कि CJP सोमवार को अपनी राष्ट्रीय कार्यसमिति की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करने जा रही है। इस आपातकालीन बैठक में बीते 25 जुलाई को देशव्यापी आंदोलन वापस लेने के बाद केंद्र सरकार द्वारा किए गए तमाम वादों की जमीनी प्रगति की गहन समीक्षा की जाएगी। संगठन का स्पष्ट आरोप है कि सरकार ने आंदोलन समाप्त कराने के लिए जो औपचारिक लिखित आश्वासन दिए थे, उन्हें पूरा करने की दिशा में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है।

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की हीलाहवाली

दूसरी तरफ, देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने 18 अगस्त को देशभर में छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज की गई तमाम एफआईआर (FIR) की एक संयुक्त और एकीकृत सूची प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। CJP ने जानकारी दी कि शीर्ष अदालत ने केंद्र से तीन बार यह विस्तृत सूची मांगी ताकि वह मुकदमों को पूरी तरह रद्द करने के उद्देश्य से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेषाधिकार शक्तियों का इस्तेमाल करने पर विचार कर सके। हालांकि, न्यायपालिका द्वारा बार-बार दिशा-निर्देश दिए जाने के बावजूद, केंद्र सरकार ने यह सूची अदालत को सौंपने में लगातार आनाकानी की है।

अदालत की सुनवाई समाप्त होने के तुरंत बाद, CJP के राष्ट्रीय सह-संयोजक सौरव दास और कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने बेहद गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ हुई उच्चस्तरीय बातचीत और लिखित वादों पर भरोसा करके CJP ने अपना ऐतिहासिक आंदोलन स्थगित किया था, लेकिन अब ऐसा प्रतीत हो रहा है कि केंद्र सरकार देश की युवा पीढ़ी को धोखा देने और छलने की राह पर चल पड़ी है, जिसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

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