CJP में बड़ी बगावत! अपनों ने ही खोला अभिजीत दीपके के खिलाफ मोर्चा, घर के बाहर कार्यकर्ताओं का भयंकर हंगामा
CJP Workers Protest Against Abhijeet Dipke: जंतर-मंतर आंदोलन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) में बड़ा विवाद सामने आया है। अभिजीत दीपके के खिलाफ उनके ही पुराने कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है और नेतृत्व प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
CJP Workers Protest Against Abhijeet Dipke: राजधानी के जंतर-मंतर पर 1 महीने से अधिक समय तक चले सफल आंदोलन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के भीतर आपसी कलह उभरकर सामने आ गई है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके के खिलाफ उनके अपने ही सहयोगियों और पुराने कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है। हाल ही में महाराष्ट्र में स्थित दीपके के आवास पर 2 दिनों तक संगठन की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में कई बड़े संगठनात्मक फैसले लिए गए, जिसके तहत अभिजीत दीपके को सीजेपी का राष्ट्रीय संयोजक घोषित किया गया और अन्य खास पदों पर नियुक्तियां की गईं। हालांकि, बैठक के दौरान घर के बाहर भारी विरोध देखने को मिला।
युवाओं का दीपके के घर के बाहर हंगामा
जिस वक्त मकान के अंदर नेतृत्व और रणनीति तय की जा रही थी, ठीक उसी समय बाहर दर्जनों युवा नारेबाजी कर रहे थे। प्रदर्शन कर रहे युवाओं का कहना था कि वे जंतर-मंतर आंदोलन में शुरू से शामिल रहे हैं, लेकिन इस महत्वपूर्ण बैठक में जमीनी स्तर पर पसीना बहाने वाले वॉलेंटियर्स को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। युवाओं ने आरोप लगाया कि संगठन में तानाशाही रवैया अपनाया जा रहा है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने चेतावनी देते हुए साफ शब्दों में कहा कि देश के युवाओं को अब कोई दूसरा केजरीवाल नहीं चाहिए, जो आंदोलन की बदौलत अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक जमीन तैयार करे।
गुजरात से आए दो कार्यकर्ताओं का गंभीर आरोप
विरोध जताने वालों में गुजरात के अहमदाबाद शहर से पहुंचे 2 प्रमुख कार्यकर्ता मनीष और राहुल पांड्या शामिल थे। दोनों ने बताया कि उन्होंने दिल्ली प्रदर्शन में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन बैठक में उन्हें आमंत्रित तक नहीं किया गया। मनीष ने बताया कि जब आंदोलन की शुरुआत हुई थी, तब इसका कोई एक प्रमुख चेहरा नहीं था और सभी ने मिलकर काम किया था। जब उन्होंने दीपके और उनकी टीम से मिलने की कोशिश की, तो किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। मनीष के मुताबिक, केवल रिश्तेदारों और करीबियों को बैठाकर पूरे देश के आंदोलन की दिशा तय की जा रही है, जो पूरी तरह गलत है। विरोध में मनीष अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया और सभी साथियों को अवसर देने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने मांग रखी है कि सीजेपी को पूरी तरह से लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर संचालित किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि जिन युवाओं ने पुलिस की लाठियां खाईं और दिन-रात सड़क पर बिताए, उन्हें भी फैसले लेने की प्रक्रिया में अपनी बात रखने का हक मिलना चाहिए। अगर शुरुआती साथियों को ही किनारे कर दिया जाएगा, तो आंदोलन का मूल उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा। युवाओं का कहना है कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या परिवार की नहीं, बल्कि देश के लाखों बेरोजगार और परेशान छात्रों की है।
अब 'क्या बोलती पब्लिक' मुहिम की तैयारी
गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके के नेतृत्व में चले इस छात्र आंदोलन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी अनशन पर बैठे थे। इस जबरदस्त जनदबाव के कारण सरकार को झुकना पड़ा था और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद त्यागना पड़ा था। अब बैठक खत्म होने के बाद छत्रपति संभाजीनगर में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए दीपके ने बताया कि संगठन अगले महीने से 'क्या बोलती पब्लिक' नामक देशव्यापी जनसंपर्क अभियान शुरू करेगा। उनका कहना है कि सीजेपी एक प्रेशर ग्रुप की तरह काम करती रहेगी और शिक्षा तथा बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर देश की मुख्यधारा की राजनीति को बदलने का प्रयास करेगी।