CJP के सौरभ दास, रांका और शिंदे प्रिवेंटिव गिरफ़्तारी में, आज होगी पेशी, तिहाड़ भेजे जाने की आशंका

जंतर-मंतर मामले में CJP के सौरभ दास, अशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे पुलिस की हिरासत में हैं। आज पेशी होनी है। CJP ने वकीलों से नहीं मिलने देने का आरोप लगाया।

Update:2026-10-14 07:37 IST

नई दिल्ली: दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कोशिश के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरभ दास, अशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को पुलिस ने प्रिवेंटिव गिरफ़्तारी में रखा है। दिल्ली पुलिस ने उन पर जंतर-मंतर में कथित तौर पर अनधिकृत प्रवेश करने समेत अन्य आरोपों के तहत कार्रवाई की है। CJP की नेता रत्ना सिंह के मुताबिक, तीनों को बुधवार सुबह अदालत या संबंधित कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाना है।

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, CJP का आरोप है कि हिरासत में लिए गए नेताओं को करीब 24 घंटे तक वकीलों से मिलने नहीं दिया गया। पार्टी ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकने की कोशिश बताया है।

जंतर-मंतर में प्रवेश की कोशिश पर कार्रवाई

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, CJP नेताओं को उस समय हिरासत में लिया गया, जब वे जंतर-मंतर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब अधिकारियों ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन के निर्धारित स्थल की सूची से हटाने की जानकारी सामने आई थी।

CJP की रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि सौरभ दास, अशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में रखा गया है। उन्होंने दावा किया कि मामले में कथित अनधिकृत प्रवेश, बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन और सरकारी अधिकारी के काम में बाधा डालने जैसे आरोप शामिल हैं।

रत्ना सिंह ने पहले तीनों को सुबह अदालत में पेश किए जाने की बात कही। बाद के अपडेट में उन्होंने बताया कि नेताओं को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में संबंधित कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने की संभावना है। उन्होंने न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजे जाने की आशंका भी जताई।

वकीलों से मिलने नहीं देने का आरोप

CJP ने दिल्ली पुलिस पर हिरासत में लिए गए नेताओं को कानूनी सहायता से वंचित रखने का आरोप लगाया है। रत्ना सिंह के अनुसार, पार्टी के कार्यकर्ताओं और वकीलों ने हिरासत में लिए गए नेताओं से मिलने की कोशिश की, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं दी गई।

सिंह ने आरोप लगाया कि शुरुआत में नेताओं को हिरासत में लिए जाने के आधारों की जानकारी भी नहीं दी गई। उन्होंने दावा किया कि पुलिस अधिकारी बार-बार ऊपर से मिले निर्देशों के तहत कार्रवाई करने की बात कह रहे थे।

रत्ना सिंह ने सवाल उठाया कि आखिर वे कौन से निर्देश हैं, जिनके आधार पर पुलिस कानून से ऊपर जाकर कार्रवाई कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को हिरासत में लेना और निर्धारित प्रदर्शन स्थलों को सूची से हटाना नागरिकों के विरोध के अधिकार पर सवाल खड़े करता है।

CJP ने पुलिस कार्रवाई को बताया गलत

CJP नेता ने आरोप लगाया कि राजधानी में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने हिरासत को गैरकानूनी बताते हुए दावा किया कि नेताओं पर लगाए गए आरोपों के समर्थन में जरूरी आधार मौजूद नहीं हैं।

सिंह ने कहा कि ऐसी कार्रवाई का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को डराना और उन्हें विरोध करने से रोकना है। 

Gyanesh Kumar के खिलाफ जारी है विरोध

CJP की यह कार्रवाई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच हुई है। पार्टी और विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं।

CJP चुनाव आयोग के कामकाज और SIR प्रक्रिया के विरोध में प्रदर्शन कर रही है। जंतर-मंतर में प्रवेश की कोशिश के बाद हुई हिरासत ने प्रदर्शन स्थल, पुलिस कार्रवाई और हिरासत में कानूनी सहायता उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है।

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