MBBS छात्रों को NMC की बड़ी राहत, चार बार फेल होने पर भी मिलेगा पांचवीं बार परीक्षा पास करने का मौका
New Delhi: NMC ने 2019-20 और उसके बाद MBBS में प्रवेश लेने वाले पात्र छात्रों को प्रथम प्रोफेशनल परीक्षा पास करने के लिए पांचवां मौका देने का निर्णय लिया।
फोटो-सोशल मीडिया
New Delhi: एमबीबीएस की प्रथम प्रोफेशनल परीक्षा निर्धारित चार प्रयासों में भी उत्तीर्ण नहीं कर पाने वाले मेडिकल छात्रों के लिए राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने बड़ी राहत का रास्ता खोला है। आयोग ने शैक्षणिक सत्र 2019-20 और उसके बाद एमबीबीएस में प्रवेश लेने वाले पात्र विद्यार्थियों को प्रथम प्रोफेशनल परीक्षा पास करने के लिए एक अतिरिक्त अवसर देने का निर्णय किया है। इसे मर्सी अटेम्प्ट यानी विशेष अतिरिक्त परीक्षा अवसर कहा गया है। अब ऐसे विद्यार्थी, जो सामान्य नियमों के अंतर्गत मिलने वाले चार प्रयासों में परीक्षा पास नहीं कर सके थे, निर्धारित शर्तें पूरी करने पर पांचवीं बार परीक्षा दे सकेंगे। आयोग ने यह निर्णय कोरोना महामारी के दौरान मेडिकल शिक्षा में आई बाधाओं, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और अन्य असाधारण परिस्थितियों का हवाला देते हुए लिया है। हालांकि यह राहत सभी मेडिकल छात्रों के लिए स्थायी रूप से पांच प्रयासों की नई व्यवस्था नहीं है। इसे लंबित मामलों के समाधान के लिए एक बार दी गई विशेष छूट के रूप में लागू किया गया है। 
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के अंडर ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड (यूजीएमईबी) ने इस संबंध में 15 अक्टूबर 2026 को सार्वजनिक सूचना जारी की थी। आयोग की 23 सितंबर को हुई 18वीं बैठक में इस प्रस्ताव पर विचार किया गया था। विद्यार्थियों, विश्वविद्यालयों और अन्य संबंधित पक्षों की ओर से लगातार मांग की जा रही थी कि विशेष परिस्थितियों के कारण प्रथम प्रोफेशनल परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाने वाले छात्रों को एक और अवसर दिया जाए। आयोग ने इन मांगों और पहले दी जा चुकी विशेष राहतों की समीक्षा के बाद नई व्यवस्था को मंजूरी दी। 
चार प्रयास समाप्त होने के बाद भी मेडिकल शिक्षा जारी रखने का अवसर
एमबीबीएस की प्रथम प्रोफेशनल परीक्षा मेडिकल शिक्षा का महत्वपूर्ण प्रारंभिक चरण है। इसमें विद्यार्थी शरीर रचना विज्ञान, शरीर क्रिया विज्ञान और जैव रसायन जैसे बुनियादी विषयों का अध्ययन करते हैं। इन विषयों की समझ आगे की चिकित्सा शिक्षा और रोगों के अध्ययन के लिए आवश्यक मानी जाती है।
एनएमसी की निर्धारित व्यवस्था के अनुसार प्रथम प्रोफेशनल परीक्षा पास करने के लिए अधिकतम चार प्रयास उपलब्ध थे। इस सीमा में परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाने वाले छात्रों के सामने मेडिकल शिक्षा जारी रखने की गंभीर समस्या पैदा हो सकती थी। कई विद्यार्थियों और उनके परिवारों ने मेडिकल कॉलेज की पढ़ाई पर काफी समय तथा धन खर्च किया होता है। ऐसे में प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाने के कारण पढ़ाई समाप्त होने की स्थिति उनके लिए बड़ी कठिनाई बन जाती है।
नई व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को एक आखिरी अवसर उपलब्ध कराना है जिनके मामले लंबित हैं और जो आयोग द्वारा निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं। पांचवें प्रयास में भी छात्र को नियमित परीक्षा के शैक्षणिक मानकों के अनुसार उत्तीर्ण होना होगा। आयोग ने परीक्षा के उत्तीर्णांक या पाठ्यक्रम की आवश्यकताओं में किसी सामान्य छूट की घोषणा नहीं की है।
चार साल की अवधि निकल गई, तब भी मिल सकती है राहत
एनएमसी के आदेश की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि कुछ ऐसे विद्यार्थी भी पांचवें अवसर के पात्र होंगे जिन्होंने प्रथम प्रोफेशनल एमबीबीएस परीक्षा पूरी करने के लिए निर्धारित चार वर्ष की अवधि पार कर ली है।
लेकिन इसके लिए संबंधित छात्र का मेडिकल कॉलेज अथवा विश्वविद्यालय में प्रवेश अभी भी वैध होना चाहिए। यदि विश्वविद्यालय या मेडिकल कॉलेज ने छात्र का प्रवेश विधिवत निरस्त कर दिया है, तो केवल इस नए आदेश के आधार पर उसे परीक्षा में बैठने का अधिकार नहीं मिल जाएगा।
इस प्रावधान से उन विद्यार्थियों को विशेष राहत मिल सकती है जो लंबे समय से परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाए थे, लेकिन उनकी प्रवेश स्थिति अभी वैध बनी हुई है। 
उदाहरण के लिए यदि किसी छात्र ने वर्ष 2020 में एमबीबीएस में दाखिला लिया था और चारों निर्धारित अवसरों में प्रथम प्रोफेशनल परीक्षा पास नहीं की, लेकिन उसका प्रवेश रद्द नहीं हुआ है, तो वह नई छूट के अंतर्गत पांचवें प्रयास का पात्र हो सकता है। इसके विपरीत केवल वर्ष 2020 में प्रवेश लेने का तथ्य पर्याप्त नहीं होगा। अन्य सभी शर्तें भी पूरी करनी होंगी।
जिन्हें पहले ही पांचवां मौका मिल चुका, उन्हें छठी बार अनुमति नहीं
एनएमसी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि मर्सी अटेम्प्ट के नाम पर छात्रों को बार-बार अतिरिक्त अवसर नहीं दिए जाएंगे।
जिन विद्यार्थियों को आयोग के पहले के किसी निर्णय, विश्वविद्यालय की व्यवस्था अथवा न्यायालय के निर्देश के आधार पर पहले ही एक अतिरिक्त अवसर मिल चुका है और वे कुल पांच प्रयास कर चुके हैं, उन्हें वर्तमान निर्णय से छठा अवसर नहीं मिलेगा।
इसका उद्देश्य सभी पात्र विद्यार्थियों को अधिकतम पांच प्रयासों की समान सीमा के भीतर रखना है। पहले ही अतिरिक्त प्रयास प्राप्त कर चुके छात्रों को फिर एक और अवसर देना आयोग की घोषित नीति का हिस्सा नहीं है।
यह प्रावधान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले वर्षों में प्रथम प्रोफेशनल परीक्षा से संबंधित मामलों को लेकर विभिन्न स्तरों पर छात्रों ने राहत मांगी थी। कुछ छात्रों को विशेष परिस्थितियों में पहले ही पांचवीं बार परीक्षा देने की अनुमति दी गई थी। अब आयोग ने स्पष्ट किया है कि ऐसी राहत का दोबारा लाभ नहीं लिया जा सकता। 
कोरोना महामारी के कारण पहले भी दो बैचों को मिली थी विशेष छूट
कोरोना महामारी के दौरान मेडिकल शिक्षा का नियमित संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ था। देशभर के मेडिकल कॉलेजों में कक्षाओं, व्यावहारिक प्रशिक्षण और परीक्षाओं का कार्यक्रम बाधित हुआ। कुछ अवधियों में ऑनलाइन पढ़ाई का सहारा लेना पड़ा, जबकि प्रयोगशाला आधारित शिक्षा और प्रत्यक्ष प्रशिक्षण के सामने अतिरिक्त कठिनाइयां थीं।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए एनएमसी ने वर्ष 2023 में शैक्षणिक सत्र 2019-20 में प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए विशेष अतिरिक्त प्रयास की अनुमति दी थी। इसके बाद 11 दिसंबर 2023 को सत्र 2020-21 के विद्यार्थियों को भी इसी प्रकार एक अतिरिक्त अवसर दिया गया।
आयोग ने उस समय भी स्पष्ट किया था कि यह कोरोना महामारी से जुड़ी असाधारण परिस्थितियों के कारण दी गई एक बार की राहत है और इसे भविष्य के लिए सामान्य नियम नहीं माना जाना चाहिए। 
अब नए आदेश में 2019-20 और उसके बाद के प्रवेश सत्रों के पात्र विद्यार्थियों को शामिल करके लंबित मामलों के निस्तारण का अधिक व्यापक आधार तैयार किया गया है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं कि हर बाद के बैच के हर छात्र को स्वतः पांच प्रयास मिल जाएंगे।
एमबीबीएस की दस वर्ष की अधिकतम अवधि में कोई बदलाव नहीं
एनएमसी ने अतिरिक्त परीक्षा अवसर देने के साथ एक अन्य महत्वपूर्ण सीमा भी बरकरार रखी है। एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करने की अधिकतम अवधि प्रवेश की तारीख से दस वर्ष ही रहेगी।
अर्थात किसी विद्यार्थी को प्रथम प्रोफेशनल परीक्षा के लिए पांचवां अवसर मिल जाने का अर्थ यह नहीं है कि उसकी पूरी मेडिकल शिक्षा समाप्त करने की निर्धारित अवधि भी बढ़ गई है। उसे शेष पाठ्यक्रम और अन्य आवश्यकताओं को लागू दस वर्ष की सीमा के भीतर पूरा करना होगा।
यह शर्त इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रथम प्रोफेशनल परीक्षा पास करने के बाद भी एमबीबीएस में आगे कई शैक्षणिक चरण और परीक्षाएं पूरी करनी होती हैं। आयोग ने इनकी गुणवत्ता तथा निर्धारित पाठ्यक्रम अवधि में कोई सामान्य छूट नहीं दी है। 
उत्तर प्रदेश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में भी मिलेगी राहत
एनएमसी का यह निर्णय पूरे देश के उन मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों पर लागू होगा जो आयोग की संबंधित व्यवस्था के अंतर्गत आते हैं। इसलिए उत्तर प्रदेश के सरकारी तथा निजी मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत पात्र विद्यार्थी भी इसका लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों के अनुसार विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के विद्यार्थियों और विश्वविद्यालयों की ओर से भी अतिरिक्त अवसर की मांग सामने आई थी।
हालांकि उत्तर प्रदेश में इस निर्णय से लाभान्वित होने वाले विद्यार्थियों की अंतिम संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। कुछ स्थानीय रिपोर्टों में सैकड़ों छात्रों को लाभ मिलने की संभावना जताई गई है, लेकिन आयोग अथवा प्रदेश सरकार की ओर से पात्र विद्यार्थियों की प्रमाणित राज्यवार सूची सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए इस फैसले से हजारों छात्रों को निश्चित रूप से लाभ मिल जाएगा, ऐसा दावा फिलहाल पुष्ट नहीं है।
इस आदेश के अनुपालन के लिए विश्वविद्यालयों और मेडिकल कॉलेजों को संबंधित विद्यार्थियों के पुराने परीक्षा परिणाम, कुल प्रयासों की संख्या और प्रवेश की वैधता की जांच करनी होगी। उसके बाद पात्र छात्रों को परीक्षा में शामिल कराने की व्यवस्था निर्धारित की जा सकेगी।
अतिरिक्त अवसर के साथ चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता का प्रश्न भी महत्वपूर्ण
मेडिकल छात्रों को विशेष परिस्थितियों में राहत देना एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक निर्णय है, लेकिन इसके साथ चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना भी आवश्यक है। चिकित्सा पेशा सीधे मरीजों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा होता है। इसलिए किसी विद्यार्थी को अतिरिक्त परीक्षा अवसर देना और उसके लिए शैक्षणिक दक्षता के मानक कम कर देना दो अलग बातें हैं।
एनएमसी ने वर्तमान निर्णय में केवल पात्र विद्यार्थियों को एक अतिरिक्त प्रयास देने की अनुमति दी है। छात्रों को संबंधित विषयों में निर्धारित योग्यता सिद्ध करनी होगी। इससे उन विद्यार्थियों के लिए रास्ता खुल सकता है जिनकी पढ़ाई असाधारण परिस्थितियों के कारण प्रभावित हुई थी, जबकि परीक्षा का शैक्षणिक स्तर यथावत रहेगा।
चिकित्सा शिक्षा से जुड़े संस्थानों के लिए भी यह आवश्यक होगा कि वे ऐसे छात्रों की शैक्षणिक कमियों की पहचान करके उपयुक्त मार्गदर्शन और पुनर्प्रशिक्षण की व्यवस्था करें। केवल पांचवीं बार परीक्षा देने की अनुमति मिलना पर्याप्त नहीं होगा, यदि विद्यार्थी को कठिन विषयों की तैयारी के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध न हो।
अब छात्रों को विश्वविद्यालय की परीक्षा अधिसूचना का इंतजार
एनएमसी के निर्णय के बाद संबंधित मेडिकल विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को पात्र छात्रों के लिए परीक्षा संबंधी व्यवस्था स्पष्ट करनी होगी। इसमें आवेदन की प्रक्रिया, परीक्षा शुल्क, परीक्षा की तारीख और आवश्यक दस्तावेजों का विवरण शामिल होगा।
छात्रों के लिए सबसे पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उन्होंने पहले कितने प्रयास किए हैं और क्या उन्हें किसी पुराने विशेष आदेश के आधार पर अतिरिक्त मौका मिल चुका है। इसके बाद संबंधित कॉलेज या विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग से अपनी पात्रता की पुष्टि करनी चाहिए।
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग की 15 अक्टूबर की अधिसूचना से इतना स्पष्ट है कि निर्धारित चार प्रयास समाप्त कर चुके पात्र विद्यार्थियों के लिए अब पांचवां अवसर उपलब्ध कराया गया है। लेकिन जिनका प्रवेश रद्द हो चुका है अथवा जो पहले ही पांच प्रयास कर चुके हैं, उन्हें इस निर्णय से नई राहत नहीं मिलेगी।
इस तरह आयोग ने कोरोना काल और अन्य असाधारण परिस्थितियों में प्रभावित विद्यार्थियों को अपनी मेडिकल शिक्षा जारी रखने की एक और संभावना उपलब्ध कराई है। साथ ही अधिकतम पांच प्रयास और दस वर्ष में एमबीबीएस पूरा करने की शर्तें बरकरार रखकर इसे सीमित और विशेष राहत के रूप में लागू किया है।