‘नफरत सिर्फ मुसलमानों से है...’, Asaduddin Owaisi ने की ‘दोहरे’ मापदंड’ की आलोचना, बोलेः सड़क पर नमाज पढ़ना गलत तो फिर...

Asaduddin Owaisi on Roadside Namaz: असदुद्दीन ओवैसी ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज और धार्मिक गतिविधियों को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।

Update:2026-05-30 11:09 IST

Asaduddin Owaisi on Roadside Namaz

Asaduddin Owaisi on Roadside Namaz: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज और धार्मिक गतिविधियों को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि सड़कों पर नमाज पढ़ने को गलत माना जाता है, तो संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत सभी धर्मों की सार्वजनिक धार्मिक गतिविधियों पर समान नियम लागू होने चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार सभी नागरिकों को समान रूप से प्राप्त है और किसी एक समुदाय को अलग मानकों पर नहीं परखा जाना चाहिए।

संविधान के अनुच्छेद 25 का किया उल्लेख 

ओवैसी ने अपने संबोधन में संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने, उसका प्रचार करने और धार्मिक गतिविधियों को संचालित करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि सड़क पर नमाज को लेकर आपत्ति जताई जाती है, तो अन्य धर्मों के त्योहारों, जुलूसों और सार्वजनिक आयोजनों को भी उसी दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक मामलों में दोहरे मानदंड अपनाए जा रहे हैं। ओवैसी ने कहा कि कई अवसरों पर दूसरे समुदायों के धार्मिक आयोजन, जुलूस और यात्राएं सार्वजनिक सड़कों पर होती हैं, लेकिन उन पर वैसी आपत्तियां नहीं उठाई जातीं जैसी नमाज को लेकर सामने आती हैं। उनके अनुसार, समानता और निष्पक्षता के सिद्धांत के तहत सभी धार्मिक गतिविधियों के लिए एक जैसे नियम होने चाहिए।

सभी के लिए समान लागू होने चाहिए कानून

ओवैसी ने यह भी कहा कि यदि कुछ धार्मिक अवसरों पर मांस की दुकानों को बंद करने की मांग की जाती है, तो उसी तर्क के आधार पर रमजान के दौरान शराब की दुकानों को भी बंद रखने पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून और प्रशासनिक निर्णय किसी एक समुदाय को लक्ष्य बनाकर नहीं होने चाहिए, बल्कि सभी के लिए समान रूप से लागू होने चाहिए। अपने भाषण में उन्होंने अजान और नमाज को लेकर उठने वाली आपत्तियों पर भी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था कि जब मुसलमानों के प्रमुख त्योहार नजदीक आते हैं, तब इन मुद्दों को अधिक प्रमुखता से उठाया जाता है। उन्होंने सवाल किया कि धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का सम्मान सभी समुदायों के लिए समान रूप से क्यों नहीं किया जाता।

इस बीच, सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर हाल ही में विभिन्न राज्यों में चर्चा तेज हुई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल में कहा था कि नमाज नियंत्रित और व्यवस्थित तरीके से पढ़ी जानी चाहिए, ताकि आम लोगों को असुविधा न हो। उन्होंने यह भी कहा था कि प्रशासन पहले संवाद और समझाइश के माध्यम से नियमों का पालन सुनिश्चित करेगा। ओवैसी ने पश्चिम बंगाल में ईद की नमाज के आयोजन को लेकर लिए गए प्रशासनिक निर्णयों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों को लेकर सभी समुदायों के लिए समान दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने दोहराया कि सड़क पर नमाज केवल विशेष अवसरों जैसे शुक्रवार या ईद के दिन ही बड़े पैमाने पर होती है, जबकि भारत में लगभग सभी धर्मों के सार्वजनिक उत्सव और जुलूस भी सड़कों पर आयोजित किए जाते हैं।

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