इस बार बेहद खास होगा 15 अगस्त! लाल किले से रचा जाएगा नया इतिहास, जानिए क्या होगा स्पेशल

80th Independence Day 2026: 15 अगस्त 2026 का स्वतंत्रता दिवस इस बार बेहद खास होने जा रहा है। लाल किले से पहली बार ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर बड़ा ऐलान किया गया है।

Update:2026-08-10 18:26 IST

80th Independence Day 2026: भारत की आजादी के 80वें स्वतंत्रता दिवस का उत्सव इस बार बेहद अनोखा और यादगार होने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस साल 15 अगस्त को लाल किले की ऐतिहासिक प्राचीर से पहली बार राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया जाएगा। अब तक के स्वतंत्रता दिवस आयोजनों में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की धुन और गायन ही मुख्य केंद्र हुआ करता था। हालांकि, इस बार 'वंदे मातरम्' के इस नए आयोजन को मुख्य समारोह की सबसे बड़ी विशेषता माना जा रहा है, जो देश के राष्ट्रीय पर्व में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रहा है।

आजादी के उलगुलान से जुड़ा राष्ट्रगीत का इतिहास

'वंदे मातरम्' केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की सबसे बुलंद आवाज रहा है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की कलम से निकले इस कालजयी गीत ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ छिड़ी जंग में करोड़ों देशवासियों के भीतर देशभक्ति और स्वाभिमान का ज्वार पैदा कर दिया था। इसके इसी अतुलनीय योगदान और जन-जन से जुड़े गहरे आध्यात्मिक व राष्ट्रीय जुड़ाव को देखते हुए इसे राष्ट्रीय गीत का आधिकारिक दर्जा प्रदान किया गया था। लाल किले के मंच से इसका सस्वर गायन उस महान इतिहास और अनगिनत क्रांतिकारियों के त्याग को नमन करने का एक अनूठा माध्यम बनेगा।

'युवा शक्ति' का सम्मान और लाल किले से गूंज

प्रत्येक वर्ष स्वतंत्रता दिवस के भव्य अवसर पर देश के प्रधानमंत्री लाल किले से राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं और देशवासियों के नाम अपना संबोधन देते हैं। ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान और रक्षा बलों के बैंड की धुन के साथ कई भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जाते हैं। इस बार समारोह में देश की ऊर्जावान 'युवा शक्ति' के योगदान को विशेष रूप से सम्मानित करने की योजना बनाई गई है। 'वंदे मातरम्' के गायन को कार्यक्रम की सूची में शामिल करने से इस राष्ट्रीय पर्व की गरिमा और भव्यता में एक अलग ही देशभक्ति का रंग घुल जाएगा।

'वंदे मातरम्' बिल संसद से मंजूर, अपमान पर सख्त सजा

हाल के दिनों में देश की संसद के दोनों सदनों द्वारा 'वंदे मातरम्' बिल को सर्वसम्मति से पारित किया गया है। इस नए कानून के कड़े प्रावधानों के अनुसार, अब राष्ट्रगीत के गायन के दौरान जानबूझकर किसी भी तरह की रुकावट पैदा करना, अवहेलना करना या इसका सार्वजनिक रूप से अपमान करना एक गंभीर आपराधिक कृत्य माना जाएगा। ऐसा करने वाले आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसके तहत 3 वर्ष तक की कठोर कारावास की सजा का स्पष्ट प्रावधान किया गया है।

संविधान सभा के वादे को मिला वास्तविक रूप

संसद में पारित हुए इस नए विधेयक में 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के दौरान देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा दिए गए ऐतिहासिक वक्तव्य का विशेष उल्लेख किया गया है। डॉ. प्रसाद ने स्पष्ट कहा था कि 'वंदे मातरम्' को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान ही पूरा सम्मान और बराबर का दर्जा दिया जाना चाहिए। चूंकि अब तक इसके अपमान को रोकने के लिए कोई पृथक कानूनी ढांचा मौजूद नहीं था, इसलिए इस कानून और लाल किले से इसकी गूंज के जरिए इसे वास्तविक धरातल पर वही सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया जा रहा है।

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