Assembly Elections के बाद बदलने लगे INDIA Bloc के समीकरण, ममता फिर करीब आईं, ये पार्टी पूरी तरह अलग
INDIA Bloc Equations: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद इंडिया ब्लॉक के भीतर नए राजनीतिक समीकरण तेजी से बनते दिखाई दे रहे हैं। चुनावों के बाद अब यह साफ नजर आने लगा है कि विपक्षी गठबंधन के भीतर कई दलों का रुख बदल रहा है।
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INDIA Bloc Equations: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद इंडिया ब्लॉक के भीतर नए राजनीतिक समीकरण तेजी से बनते दिखाई दे रहे हैं। चुनावों के बाद अब यह साफ नजर आने लगा है कि विपक्षी गठबंधन के भीतर कई दलों का रुख बदल रहा है। तृणमूल कांग्रेस, जो कुछ समय से इंडिया ब्लॉक से लगभग दूरी बनाकर चल रही थी, अब फिर से करीब आती दिखाई दे रही है। वहीं आम आदमी पार्टी ने अब खुद को पूरी तरह अलग करने का संकेत दे दिया है।
ममता बनर्जी ने फिर दिखाई दिलचस्पी
पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक बार फिर इंडिया ब्लॉक की अहमियत समझ आने लगी है। कोलकाता में ममता बनर्जी ने कहा कि वह चाहती हैं कि जून के पहले हफ्ते में इंडिया ब्लॉक की बैठक बुलाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इस बैठक में समान विचारधारा वाले सभी राजनीतिक दलों को शामिल किया जाए।
गौरतलब हो कि, इंडिया ब्लॉक की पिछली बैठक महिला आरक्षण के मुद्दे पर हुई थी और उसमें तृणमूल कांग्रेस भी शामिल हुई थी। अब अगली बैठक बुलाने की पहल खुद ममता बनर्जी की ओर से किए जाने को विपक्षी राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
राहुल गांधी के रुख में भी आया बदलाव
वहीं चुनाव नतीजों के बाद राहुल गांधी के रवैये में भी बदलाव देखने को मिला है। पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ममता बनर्जी पर लगातार हमलावर थे, लेकिन चुनाव हारने के बाद कांग्रेस नेता ममता के समर्थन में खुलकर सामने आए।
वहीं राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि भाजपा ने चुनाव आयोग के साथ मिलकर तृणमूल कांग्रेस की 100 सीटें चुरा लीं। उन्होंने कांग्रेस नेताओं को भी नसीहत दी कि ममता बनर्जी की हार पर खुश होने का समय नहीं है। राहुल गांधी का कहना है कि अभी राजनीति करने के बजाय विपक्ष को एकजुट रहने की जरूरत है।
ममता बनर्जी ने भी सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अखिलेश यादव का फोन कर समर्थन देने के लिए आभार जताया। अखिलेश यादव तो ममता के समर्थन में कोलकाता तक पहुंचे थे। इस दौरान उनका एक नारा भी काफी चर्चा में रहा कि बात सीट की नहीं, बात जीत की है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच यह नारा चुनावी गठबंधन की अहम कड़ी माना जा रहा है।
ममता का संदेश, लड़ाई लंबी चलेगी
ममता बनर्जी ने साफ कहा है कि वह लड़ने के लिए तैयार हैं और अंत तक हार नहीं मानेंगी। बदलते राजनीतिक माहौल में यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि इंडिया ब्लॉक लंबी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। हालांकि सबसे बड़ा सवाल अब भी यही बना हुआ है कि आखिर इस गठबंधन में कौन कौन दल मजबूती से बना हुआ है।
तमिलनाडु में डीएमके और कांग्रेस के रिश्तों में तनाव
तमिलनाडु में चुनाव नतीजों के बाद डीएमके और कांग्रेस के बीच तनाव खुलकर सामने आ गया है। कांग्रेस पहले डीएमके गठबंधन का हिस्सा थी, लेकिन चुनाव नतीजों के बाद उसने टीवीके सरकार का समर्थन कर दिया। इसके बाद डीएमके नेतृत्व कांग्रेस से बेहद नाराज बताया जा रहा है।
डीएमके की एक बैठक में कांग्रेस को जोंक और पीठ में छुरा घोंपने वाला तक कहा गया। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने डीएमके कार्यकर्ताओं की मेहनत पर राजनीति की और बाद में गठबंधन छोड़ दिया।
उदयनिधि स्टालिन ने लगाया विश्वासघात का आरोप
पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने टीवीके का साथ देकर डीएमके के साथ विश्वासघात किया है। उदयनिधि ने कहा कि डीएमके कार्यकर्ताओं की मेहनत के कारण ही कांग्रेस को पांच विधायक मिले थे और लोगों ने कांग्रेस को वोट इसलिए दिया क्योंकि वे एमके स्टालिन को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे।
उन्होंने कहा कि कुछ पदों के लिए कांग्रेस बिना बताए गठबंधन छोड़कर चली गई और ऐसे लोगों पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए। उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु की जनता कांग्रेस को इसका जवाब देगी।
क्या एनडीए के करीब जा रही है डीएमके?
राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि डीएमके इंडिया ब्लॉक छोड़कर एनडीए के करीब जा सकती है। हालांकि यह राह आसान नहीं मानी जा रही है।
चुनावों के दौरान महिला आरक्षण संशोधन बिल और परिसीमन बिल का डीएमके ने संसद में जोरदार विरोध किया था। डीएमके ने इन मुद्दों को चुनाव प्रचार का बड़ा हिस्सा बनाया था। ऐसे में अगर डीएमके भाजपा के करीब जाती है तो उसे कई मुद्दों पर अपना रुख बदलना पड़ सकता है।
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भाजपा यह संभावनाएं तलाश रही है कि क्या डीएमके को संसद में राष्ट्रीय मुद्दों पर साथ खड़ा होने के लिए तैयार किया जा सकता है। डीएमके के संसद में कांग्रेस से अलग बैठने के फैसले को भी इसी दिशा में देखा जा रहा है। इसके लिए डीएमके की ओर से लोकसभा स्पीकर को पत्र भी लिखा गया है।
आम आदमी पार्टी ने बनाई दूरी
आम आदमी पार्टी अब लगभग पूरी तरह इंडिया ब्लॉक से अलग होती दिखाई दे रही है। पार्टी नेता संजय सिंह ने कहा कि इंडिया ब्लॉक 2024 लोकसभा चुनाव के लिए बना था। उसके बाद आम आदमी पार्टी ने हरियाणा और दिल्ली विधानसभा चुनाव अकेले लड़ा था। माना जा रहा है कि अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी ने यह रणनीति अपनाई है।
कांग्रेस को दिख रहा सबसे ज्यादा फायदा
बदले राजनीतिक माहौल में कांग्रेस खुद को सबसे फायदे की स्थिति में मान रही है। ममता बनर्जी की हार के बाद विपक्षी खेमे में राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवाल लगभग खत्म हो गए हैं।
राहुल गांधी अब खुलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को चुनौती दे रहे हैं। कांग्रेस की अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ की एक बैठक में राहुल गांधी ने दावा किया कि आने वाले आर्थिक संकट के कारण सरकार दबाव में आ जाएगी और प्रधानमंत्री मोदी ज्यादा समय तक कुर्सी पर नहीं रह पाएंगे।
विपक्ष की नई रणनीति पर काम शुरू
रिपोर्ट के मुताबिक विपक्ष अब अगले ढाई साल तक आंदोलन मोड में रहने की तैयारी कर रहा है। इंडिया ब्लॉक के बैनर तले देशव्यापी यात्रा निकालने की योजना पर भी काम चल रहा है। यह यात्रा राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा जैसी अकेले कांग्रेस की नहीं होगी, बल्कि इसमें गठबंधन के दूसरे दलों के नेता भी शामिल हो सकते हैं।
बताया जा रहा है कि विपक्ष अब केवल भाजपा विरोध की राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि खुद को जनता के सामने एक मजबूत विकल्प के तौर पर पेश करने की रणनीति बना रहा है।
जनता से जुड़े मुद्दों पर रहेगा फोकस
विपक्ष की प्रस्तावित रणनीति में ऐसे मुद्दों को केंद्र में रखा जाएगा, जो सीधे जनता से जुड़े हों। माना जा रहा है कि वोट चोरी और एसआईआर विरोध जैसे मुद्दों का असर उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, इसलिए अब नई रणनीति बनाई जा रही है। इसके साथ ही यह भी माना जा रहा है कि विपक्ष जातीय जनगणना के नतीजों के आधार पर अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी कर सकता है।