TMC Frontal Organizations Dissolved: बंगाल में ममता ने चला 'ब्रह्मास्त्र'! एक झटके में पूरी पार्टी को किया भंग, बागियों का नेटवर्क ध्वस्त

TMC Frontal Organizations Dissolved: पश्चिम बंगाल चुनाव में हार और पार्टी के भीतर 50 से अधिक विधायकों की बगावत के दावों के बीच ममता बनर्जी ने अब तक का सबसे सख्त कदम उठाया है। टीएमसी सुप्रीमो ने कोर कमेटी, स्टेट कमेटी समेत सभी 16 फ्रंटल संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। जानिए क्या है ममता का नया पुनर्गठन प्लान।

Update:2026-06-03 14:28 IST

TMC Frontal Organizations Dissolved: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार और सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर मचे घमासान को शांत करने के लिए पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने अब तक का सबसे बड़ा और सख्त कदम उठाया है। टीएमसी के भीतर बढ़ती बगावत और टूट की खबरों के बीच ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में पार्टी की सभी मुख्य कमेटियों और उससे जुड़े सभी अनुषांगिक (फ्रंटल) संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। पार्टी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर इस बड़े फैसले की जानकारी देते हुए साफ कहा गया है कि अब पूरी पार्टी का नए सिरे से पुनर्गठन किया जाएगा। चुनावों में मिली हार के बाद ममता बनर्जी की सियासत के लिए इसे अस्तित्व बचाने की लड़ाई के तौर पर देखा जा रहा है।

बगावत के बाद उठाना पड़ा यह सख्त कदम

दरअसल, विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही टीएमसी के भीतर असंतोष की चिंगारी सुलग रही थी, जो अब एक बड़ी बगावत का रूप ले चुकी है। पार्टी से निकाले गए बागी विधायकों द्वारा 50 से अधिक विधायकों के समर्थन का दावा करने के बाद शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह दबाव में था। सबसे बड़ी चिंता की बात यह थी कि पार्टी के कई अनुषांगिक संगठन आलाकमान यानी ममता बनर्जी के फैसलों को दरकिनार कर बागी गुट की हां में हां मिला रहे थे। पार्टी के भीतर बढ़ते इसी अंतर्विरोध और अनुशासनहीनता को जड़ से खत्म करने के लिए ममता बनर्जी ने अचानक यह सर्जिकल स्ट्राइक की है, ताकि बागियों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।

TMC के 16 फ्रंटल संगठनों पर गिरी गाज

टीएमसी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, पार्टी के पास कुल 16 अनुषांगिक या फ्रंटल संगठन हैं। ये संगठन समाज के अलग-अलग वर्गों जैसे कि युवाओं, महिलाओं, छात्रों, मजदूरों और किसानों को पार्टी से जोड़ने और उन्हें संगठित करने का काम करते हैं। इन संगठनों के पास जमीनी स्तर पर बड़ी ताकत होती है। लेकिन चुनाव में हार के बाद इन संगठनों में भी गुटबाजी हावी हो गई थी। ममता बनर्जी ने एक झटके में इन सभी 16 संगठनों को पूरी तरह खत्म कर दिया है, ताकि बगावत की गुंजाइश को पूरी तरह समाप्त किया जा सके और नए तथा वफादार चेहरों को जिम्मेदारी दी जा सके।


सभी मुख्य और स्थानीय कमेटियों का हुआ विलय

इस फैसले की मार केवल फ्रंटल संगठनों पर ही नहीं, बल्कि टीएमसी की मुख्य सांगठनिक संरचना पर भी पड़ी है। इसके तहत पार्टी की सबसे शक्तिशाली मुख्य कार्यकारी कमेटी, कोर कमेटी, स्टेट (राज्य) कमेटी के साथ-साथ सभी जिलों, ब्लॉकों की स्थानीय कमेटियों और यहां तक कि अनुशासन समिति को भी भंग करके आपस में मिला दिया गया है। टीएमसी ने अपने बयान में कहा है कि पार्टी अब हर स्तर पर आत्म-निरीक्षण और कार्य-समीक्षा की एक बड़ी प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। इस जांच प्रक्रिया के पूरे होने के बाद ही मुख्य संगठन और अन्य सभी विंग की नई संरचना का ऐलान किया जाएगा, ताकि भविष्य की चुनौतियों का डटकर सामना किया जा सके।

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