जयपुर में जर्जर इमारत ढही, मलबे में कई लोग फंसे: रेस्क्यू अभियान में 2 की मौत, 7 घायल

भाष चौक, जयपुर में एक जर्जर इमारत का हिस्सा ढह गया, जिससे कई लोग मलबे में फंस गए। सिविल डिफेंस और SDRF की टीमों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया। इस इमारत में 19 लोग रह रहे थे, जिनमें से 7 लोग घायल हो गए और 2 की मौत हो गई।

Update:2025-09-06 09:00 IST

Jaipur building collapse:  सुभाष चौक इलाके में एक जर्जर इमारत का एक हिस्सा ढह गया, जिससे मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका थी। घटना की सूचना रात करीब 2 बजे पुलिस को मिली, जिसके बाद सिविल डिफेंस और SDRF ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया। ADCP दुर्ग सिंह राजपुरोहित ने बताया कि इस मकान में करीब 19 लोग रह रहे थे, जिनमें से 7 लोग घायल हुए और 2 की मौत हो गई। रेस्क्यू अभियान अब पूरा हो चुका है और सभी आवश्यक राहत कार्य किए जा चुके हैं। शहर में लगातार हो रही बारिश के कारण रात के समय ये इमारत गिर गई, जिससे दो परिवारों के लोग मलबे में दब गए। नमिता ने बताया कि हादसा रात लगभग 1:00 से 1:30 बजे के बीच हुआ। हादसे में जिनकी मौत हुई, वे प्रभात थे, जो उनके ताऊजी के बेटे थे। उन्होंने कहा कि इमारत बहुत ही जर्जर हो चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कभी इसकी मरम्मत करने की मांग नहीं की थी।

संकरी गलियों में रेस्क्यू ऑपरेशन में आई मुश्किलें

मौके पर पहुंचे एडिशनल डीसीपी दुर्ग सिंह राजपुरोहित ने बताया कि कंट्रोल रूम से रात करीब 1:30 बजे सूचना मिली थी कि एक मकान गिर गया है और कुछ लोग मलबे में फंसे हुए हैं। सूचना मिलते ही एसीपी माणक चौक और अन्य पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच लोगों को मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया।

उन्होंने बताया कि वॉल सिटी इलाके की गलियां काफी संकीर्ण हैं, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में परेशानी आई। हालांकि, मंदिर के रास्ते से लोगों को बाहर निकाला गया। इसके अलावा, जब जयपुर में तीज यात्रा आयोजित की जा रही थी, उस वक्त पुलिस और प्रशासन ने जर्जर इमारतों के बारे में जिला प्रशासन और नगर निगम को चेतावनी दी थी। साथ ही, स्थानीय पुलिस से जर्जर इमारतों की रिपोर्ट भी ली जाएगी।

मौके पर पहुंचे स्थानीय विधायक अमीन कागजी ने बताया कि इस इमारत में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगह पार्षद कार्यालय में शिफ्ट कर दिया गया है। स्थानीय लोग भी देर रात से प्रशासन की मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगभग ढाई महीने पहले उन्होंने निगम कमिश्नर को जयपुर की जर्जर इमारतों के बार-बार हादसों की जानकारी दी थी और इन पर कार्रवाई करने के लिए लिखा था। इसके बाद निगम अधिकारियों को बुलाकर इन इमारतों की पहचान भी कराई गई थी।

आपको बता दें कि हाल ही में हेरिटेज नगर निगम क्षेत्र में कुल 126 जर्जर इमारतों की पहचान की गई थी। इनमें सबसे ज्यादा 65 इमारतें किशनपोल जोन में थीं। तीन इमारतों पर तो कार्रवाई भी हुई, लेकिन बाकी जगहों पर केवल नोटिस भेजकर काम खत्म कर दिया गया। जिस इमारत में बीती रात हादसा हुआ, उसे भी किशनपोल जोन के उपायुक्त की तरफ से दो बार नोटिस दिया गया था। लेकिन अब सवाल ये है कि जब इन इमारतों को जर्जर बता दिया जाता है और नोटिस भी भेजा जाता है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?

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