घाटी में धमकी के बाद कश्मीरी पंडितों में डर का माहौल, बढ़ाई गई कड़ी सुरक्षा, कुछ कर्मचारियों को WFH की अनुमति

Kashmiri Pandit Threat: यह कदम उस दावे के सामने आने के बाद उठाया गया है, जिसमें लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ‘यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल’ की ओर से कथित तौर पर धमकी भरा पत्र जारी किए जाने की बात कही गई है।

Update:2026-08-12 10:30 IST

Kashmiri Pandit Threat

Kashmiri Pandit Threat: जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में कश्मीरी पंडित समुदाय (Kashmiri Pandit Community) से जुड़ी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उन इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है, जहां कश्मीरी पंडित रहते हैं। इसके साथ ही कुछ कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को कुछ समय के लिए वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) करने की अनुमति भी दी गई है।

यह कदम उस दावे के सामने आने के बाद उठाया गया है, जिसमें लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) से जुड़े ‘यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल’ (United Liberation Council) की ओर से कथित तौर पर धमकी भरा पत्र जारी किए जाने की बात कही गई है।

बताया जा रहा है कि कथित पत्र में कश्मीरी पंडित समुदाय के कई लोगों के नाम और उनके फोन नंबर साझा किए गए हैं। यह पत्र सोशल मीडिया (Social Media) पर सामने आने के बाद समुदाय के लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि यह पत्र वास्तव में किसने जारी किया और इसमें लोगों से जुड़ी जानकारी का स्रोत क्या है।

सुरक्षा एजेंसियां कर रही हैं गहन जांच

कथित धमकी भरे पत्र को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है। एजेंसियां पत्र की प्रामाणिकता (Authenticity), उसके स्रोत और इसके पीछे मौजूद लोगों की पहचान का पता लगाने में जुटी हैं। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि पत्र में जिन लोगों के नाम और फोन नंबर साझा किए गए हैं, उनके बारे में इतनी जानकारी कथित तौर पर धमकी देने वालों तक कैसे पहुंची।

‘पनुन कश्मीर’ के कन्वीनर अग्निशेखर (अग्निशेखर) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गहन जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अधिकारियों को यह पता लगाना चाहिए कि इस जानकारी का स्रोत क्या है और इसके पीछे कोई डिजिटल ट्रेल (Digital Trail) मौजूद है या नहीं।

क्या लोगों की निगरानी या रेकी हुई थी

अग्निशेखर ने कहा कि जांच एजेंसियों को यह भी पता लगाना चाहिए कि पत्र में जिन लोगों के नाम शामिल हैं, क्या उनकी निगरानी, प्रोफाइलिंग (Profiling) या रेकी (Recce) की गई थी। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यह स्पष्ट करना जरूरी है कि धमकी देने वालों के पास वास्तव में लोगों और उनके परिवारों से जुड़ी इतनी जानकारी थी या फिर इस जानकारी का इस्तेमाल मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) के हिस्से के रूप में किया जा रहा था।

उनके मुताबिक, यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कथित पत्र में समुदाय के लोगों की पहचान सार्वजनिक किए जाने का दावा किया गया है। ऐसे में इसकी गंभीरता को केवल एक सामान्य धमकी मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सामान्य धमकी मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता

अग्निशेखर ने कहा कि कथित पत्र में समुदाय के लोगों के साथ उनके परिवारों, ठिकानों और कार्यस्थलों से जुड़ी जानकारी होने का दावा किया गया है। उनका कहना है कि इस तरह की धमकी का मकसद लोगों में भय पैदा करना और पूरे कश्मीरी पंडित समुदाय के बीच दहशत का माहौल बनाना हो सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीरी पंडित समुदाय का इतिहास पहले भी लक्षित हिंसा (Targeted Violence), धमकियों और जबरन विस्थापन (Forced Displacement) से जुड़ा रहा है। ऐसे में समुदाय के लोगों की निजी जानकारी सार्वजनिक होने और उन्हें संभावित निशाना बनाए जाने की धमकी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

कश्मीर के IGP ने क्या कहा

कश्मीर के आईजीपी वीके बिरदी (वीके बिरदी) ने बताया कि पुलिस कथित धमकी भरे पत्र की जांच कर रही है। पुलिस के मुताबिक, यह पत्र 7 अगस्त को सोशल मीडिया पर सामने आया था। एजेंसियां इसकी प्रामाणिकता, स्रोत और इसके पीछे मौजूद लोगों की पहचान की जांच में जुटी हैं।

वहीं, डिविजनल कमिश्नर अंशुल गर्ग (अंशुल गर्ग) ने बताया कि कुछ कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी गई है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस संबंध में कोई सामान्य आदेश जारी नहीं किया गया है।

Work From Home को लेकर क्या है स्थिति

वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) की अनुमति सभी कर्मचारियों के लिए सामान्य तौर पर लागू नहीं की गई है। डिविजनल कमिश्नर के अनुसार, कुछ कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी गई है। दूसरी ओर, शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी स्पष्ट किया है कि विभाग की ओर से वर्क फ्रॉम होम को लेकर ऐसा कोई सामान्य आदेश जारी नहीं किया गया है।

फिलहाल पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां कथित धमकी भरे पत्र की जांच कर रही हैं। सुरक्षा बढ़ाए जाने और कुछ कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दिए जाने के बीच समुदाय के लोगों की सुरक्षा और पत्र की वास्तविकता जांच एजेंसियों के लिए अहम मुद्दा बनी हुई है।

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