रात 12 बजे स्ट्रॉन्ग रूम में क्या कर रही थीं दीदी? शुभेंदु ने शेयर किया CCTV स्क्रीनशॉट, बंगाल में बड़े सियासी भूचाल की आहट
Suvendu Adhikari share strong room CCTV footage: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में मतगणना से पहले बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ममता बनर्जी के आधी रात स्ट्रॉन्ग रूम पहुंचने और शुभेंदु अधिकारी द्वारा CCTV स्क्रीनशॉट शेयर करने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। TMC और BJP आमने-सामने हैं।
Suvendu Adhikari share strong room CCTV footage: पश्चिम बंगाल की राजनीति में 4 मई के नतीजों से पहले एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने राज्य की सियासी सरगर्मी को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। गुरुवार की रात जब कोलकाता मूसलाधार बारिश की चपेट में था, तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अचानक भवानीपुर के 'स्ट्रॉन्ग रूम' पहुंच गईं। रात के अंधेरे और भारी बारिश के बीच मुख्यमंत्री का करीब चार घंटे तक स्ट्रॉन्ग रूम के अंदर रुकना अब एक बड़े विवाद का कारण बन गया है। इस घटना ने चुनाव आयोग की सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक दलों के बीच बढ़ते अविश्वास की खाई को और गहरा कर दिया है।
शुभेंदु अधिकारी का बड़ा वार: CCTV फुटेज ने मचाई सनसनी
इस पूरे मामले में उस वक्त धमाका हुआ जब बीजेपी नेता और भवानीपुर से ममता के प्रतिद्वंद्वी शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक सीसीटीवी स्क्रीनशॉट पोस्ट कर दिया। इस तस्वीर में ममता बनर्जी स्ट्रॉन्ग रूम के अंदर अपने चुनाव एजेंट के साथ बैठी दिखाई दे रही हैं। शुभेंदु ने तीखा सवाल पूछते हुए लिखा कि आखिर मुख्यमंत्री रात 8 बजे से 12 बजे तक स्ट्रॉन्ग रूम के भीतर क्या कर रही थीं? उन्होंने दावा किया कि दीदी पर नजर रखने के लिए उनके एजेंट और वकील सूर्यनील दास भी वहां मुस्तैद थे ताकि किसी भी तरह की 'बेईमानी' न हो सके। शुभेंदु का यह सीधा हमला संकेत दे रहा है कि नतीजों से पहले बंगाल में शह और मात का खेल चरम पर है।
ममता बनर्जी का पलटवार: "वोटों की सुरक्षा के लिए पहुंची थी"
रात करीब 12.07 बजे सखावत मेमोरियल स्कूल से बाहर निकलते ही ममता बनर्जी ने कड़े तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि उन्हें धांधली और गड़बड़ी की शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद वे वहां पहुंचीं। ममता ने आरोप लगाया कि शुरू में केंद्रीय बलों ने उन्हें अंदर जाने से रोका, जबकि एक उम्मीदवार के तौर पर उन्हें वहां जाने का कानूनी अधिकार है। मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि यदि मतगणना प्रक्रिया या ईवीएम के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ हुई तो इसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने पारदर्शिता की मांग करते हुए मीडिया के लिए अलग से सीसीटीवी कैमरा लगाने का सुझाव भी दिया।
फिरहाद हाकिम को भी नहीं मिली एंट्री: बाहर से ही लौटे मेयर
इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के दौरान कोलकाता के मेयर फिरहाद हाकिम भी सखावत मेमोरियल स्कूल पहुंचे, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी। फिरहाद ने बताया कि मुख्यमंत्री अंदर थीं और एक उम्मीदवार के तौर पर अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर रही थीं, लेकिन उन्हें (फिरहाद को) अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली। उन्होंने मीडिया से कहा कि वे यह पुष्टि नहीं कर सकते कि अंदर वास्तव में क्या बातचीत या प्रक्रिया चल रही थी। यह स्थिति दिखाती है कि स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर सुरक्षा के घेरे इतने कड़े थे कि सत्ता पक्ष के बड़े नेताओं को भी नियमों के तहत बाहर ही रुकना पड़ा।
हर तरफ 'ईवीएम' का खौफ: धरने पर बैठे टीएमसी के दिग्गज
कोलकाता के एक हिस्से में जहां ममता बनर्जी खुद मोर्चा संभाले हुए थीं, वहीं उत्तरी कोलकाता में कुणाल घोष और शशि पांजा जैसे बड़े नेता 'खुदीराम अनुशीलन केंद्र' के बाहर धरने पर बैठ गए। इन नेताओं का सीधा आरोप था कि स्ट्रॉन्ग रूम के अंदर रखी मशीनों के साथ बीजेपी और प्रशासन मिलकर छेड़छाड़ कर रहे हैं। टीएमसी के इन आरोपों ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे 4 मई की सुबह तक पल-पल की निगरानी करेंगे ताकि जनता का जनादेश सुरक्षित रहे।
4 मई से पहले 'खेला' या 'डर'?
बंगाल में मचे इस कोहराम ने एक बात साफ कर दी है कि इस बार चुनाव नतीजे केवल हार-जीत का फैसला नहीं करेंगे, बल्कि यह लोकतंत्र की साख की भी लड़ाई बन गई है। एक तरफ बीजेपी इसे ममता बनर्जी की 'हार का डर' बता रही है, तो दूसरी तरफ टीएमसी इसे 'लोकतंत्र को बचाने की जंग' करार दे रही है। आधी रात को स्ट्रॉन्ग रूम की दहलीज पर खड़ी मुख्यमंत्री और उनके सामने डटे विपक्षी एजेंटों की ये तस्वीरें बंगाल के चुनावी इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गई हैं। अब सारी निगाहें 4 मई की मतगणना पर टिकी हैं, जहां दूध का दूध और पानी का पानी होगा।