US रडार को चकमा देकर निकलेगा भारतीय जहाज? 45 हजार टन LPG के साथ होर्मुज के 'चक्रव्यूह' में फंसा सुपरटैंकर
India LPG Tanker at Hormuz: क्या होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसा भारतीय सुपरटैंकर देश को राहत देगा या बढ़ाएगा संकट? US-ईरान तनाव के बीच LPG की किल्लत, गैस सिलेंडर महंगे और कच्चे तेल के दाम आसमान पर! जानिए इस पूरे ऊर्जा संकट का भारत पर क्या असर पड़ेगा।
India LPG Tanker at Hormuz: मिडल ईस्ट की धरती पर सुलग रही युद्ध की आग अब सीधे भारतीय रसोई तक पहुंच गई है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी ने देश में एलपीजी गैस की भारी किल्लत पैदा कर दी है। इस संकट का सबसे बड़ा असर आम आदमी की जेब पर पड़ा है। सरकार ने हाल ही में 5 किलो वाले छोटे गैस सिलेंडर की कीमत में 261 रुपये की भारी बढ़ोतरी कर दी है, जबकि कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 1,000 रुपये तक बढ़ा दिए गए हैं। महंगाई के इस झटके ने आम जनता को सन्न कर दिया है, और अब डर सता रहा है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी आम आदमी की पहुंच से बाहर हो सकती हैं।
45,000 टन गैस लेकर बढ़ रहा भारतीय सुपरटैंकर
महंगाई और किल्लत के इस अंधेरे के बीच एक उम्मीद की किरण दिखाई दी है। ब्लूमबर्ग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का एक विशालकाय सुपरटैंकर 'सर्व शक्ति' कम से कम 45,000 टन एलपीजी गैस लेकर होर्मुज को पार करने की कोशिश कर रहा है। शनिवार को मिली जानकारी के अनुसार, यह टैंकर लारक और केसम आइलैंड के पास देखा गया था। शिप ट्रैकिंग डेटा संकेत दे रहे हैं कि यह ओमान की खाड़ी के रास्ते भारत पहुंच सकता है। हालांकि, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि इस टैंकर ने खतरनाक होर्मुज मार्ग को सुरक्षित पार कर लिया है या नहीं। यदि यह सुपरटैंकर सफलतापूर्वक भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच जाता है, तो देश में गैस की मची हाहाकार से बड़ी राहत मिल सकती है।
होर्मुज में 'चक्रव्यूह': अमेरिकी नाकेबंदी और ईरान की सख्त चेतावनी
मिडल ईस्ट में 13 अप्रैल से जारी अमेरिकी नाकेबंदी ने समुद्री व्यापार की कमर तोड़ दी है। इस तनावपूर्ण स्थिति के कारण फारस की खाड़ी में भारत के कम से कम 14 जहाज फंसे हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले दिनों दो जहाजों ने होर्मुज से बाहर निकलने का प्रयास किया था, लेकिन ईरानी सेना की सख्त चेतावनी के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा। इस बीच फाइनेंशियल टाइम्स ने एक दिलचस्प जानकारी दी है कि ईरान से कनेक्शन रखने वाले करीब 34 टैंकर अमेरिकी नौसेना को चकमा देकर वैकल्पिक रास्तों से निकलने में कामयाब रहे हैं। भारत के लिए भी अब चुनौती यह है कि वह अपने फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित बाहर कैसे निकाले।
क्या है वह 'सीक्रेट' रास्ता? जिससे बचकर निकल सकते हैं जहाज
अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना किसी अन्य देश की समुद्री सीमा के भीतर किसी जहाज को नहीं रोक सकती। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई जहाज ईरान के तटीय क्षेत्र का सहारा लेकर चाबहार बंदरगाह तक पहुंच जाए और फिर वहां से दक्षिण की ओर मुड़कर अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा में दाखिल हो, तो वह अमेरिकी रडार से बच सकता है। इस रास्ते से होकर जहाज महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात या केरल के बंदरगाहों तक पहुंच सकते हैं। एक दूसरा रास्ता पाकिस्तान की समुद्री सीमा से होकर गुजरता है, लेकिन वहां सुरक्षा जोखिम और कूटनीतिक खतरे बहुत ज्यादा हैं, जिसके कारण भारतीय जहाज इस मार्ग से बच रहे हैं।
पेट्रोल-डीजल पर भी मंडराया खतरा
एलपीजी की बढ़ती कीमतों के बीच अब पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की आहट भी तेज हो गई है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इस सप्ताह 126 डॉलर प्रति बैरल के चार साल के उच्चतम स्तर को छू गई हैं। हालांकि कीमतों में मामूली गिरावट आई है, लेकिन अब भी कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। सरकारी सूत्रों ने शुक्रवार को साफ संकेत दिए हैं कि बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात और बढ़ते घाटे को देखते हुए निकट भविष्य में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता। अगर कच्चे तेल का यह उबाल जारी रहा, तो भारतीय उपभोक्ताओं को आने वाले हफ्तों में ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों के लिए तैयार रहना होगा।
भारत की रणनीति: ऊर्जा सुरक्षा पर टिकी दुनिया की नजर
वर्तमान में भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर दोतरफा दबाव झेल रहा है। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और युद्ध की स्थिति ने आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर दिया है, तो दूसरी तरफ घरेलू स्तर पर महंगाई को नियंत्रित करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। अब सारी उम्मीदें उन सुपरटैंकरों पर टिकी हैं जो खतरों के बीच समंदर का सीना चीरकर भारत की ओर बढ़ रहे हैं। यदि कूटनीतिक रास्तों से समुद्री मार्ग नहीं खुले, तो आने वाले दिन भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी की रसोई के लिए और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। दुनिया भर की नजरें अब होर्मुज जलडमरूमध्य पर जमी हैं, क्योंकि यहीं से तय होगा कि वैश्विक ऊर्जा संकट का ऊँट किस करवट बैठेगा।