भारत की नई हाइपरसोनिक शक्ति, दुश्मन होंगे खाक, DRDO जल्द करेगा मिसाइल परीक्षण!
DRDO Hypersonic Missile Program: डीआरडीओ (DRDO) प्रमुख समीर वी कामत ने भारत के गुप्त हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रमों का खुलासा किया है। जानें कैसे हाइपरसोनिक ग्लाइड और क्रूज मिसाइलें दुश्मन के रडार को चकमा देकर पलक झपकते ही हमला करेंगी और अग्नि-6 मिसाइल पर क्या है ताजा अपडेट।।
DRDO Hypersonic Missile Program: भारत के रक्षा क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया, खासकर हमारे पड़ोसी देशों के सैन्य मुख्यालयों में हलचल मचा दी है। डीआरडीओ (DRDO) के चेयरमैन समीर वी कामत ने हाल ही में एक ऐसा एलान किया है, जो भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगा जिनके पास सबसे घातक और आधुनिक हथियार हैं। भारत अब केवल रक्षा नहीं कर रहा, बल्कि अपनी आक्रमण शक्ति को उस स्तर पर ले जा रहा है जहाँ से दुश्मन का बचना नामुमकिन होगा। दिल्ली में आयोजित एएनआई (ANI) नेशनल सिक्योरिटी समिट के दौरान कामत ने भारत के दो सबसे गोपनीय और शक्तिशाली कार्यक्रमों का खुलासा किया है। यह खबर हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा करने वाली है क्योंकि भारत अब 'हाइपरसोनिक' युग में कदम रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।
हाइपरसोनिक मिसाइलों का कालचक्र
डीआरडीओ प्रमुख ने साफ कर दिया है कि भारत एक नहीं बल्कि दो अलग-अलग तरह की हाइपरसोनिक मिसाइल प्रणालियों पर दिन-रात काम कर रहा है। इनमें से पहली है 'हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल' और दूसरी है 'हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल'। इन दोनों हथियारों की खासियत यह है कि इनकी रफ्तार इतनी तेज होती है कि दुनिया का कोई भी रडार या डिफेंस सिस्टम इन्हें पकड़ने में नाकाम साबित होगा। कामत ने बताया कि विकास के मामले में 'हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल' फिलहाल सबसे आगे चल रही है। सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि इस घातक ग्लाइड मिसाइल का परीक्षण बहुत जल्द शुरू किया जा सकता है। डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने इस पर इतनी तेजी से काम किया है कि यह क्रूज मिसाइल की तुलना में बहुत ही उन्नत चरण में पहुंच चुकी है।
कैसे काम करेंगे ये घातक हथियार
आम लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि इन दोनों मिसाइलों में आखिर अंतर क्या है? समीर वी कामत ने इसे बहुत ही सरल भाषा में समझाया है। उनके अनुसार, हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल एक 'स्क्रैमजेट इंजन' से लैस होती है, जो इसे पूरी उड़ान के दौरान निरंतर ऊर्जा और रफ्तार प्रदान करती रहती है। वहीं, अगर हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल की बात करें, तो इसे शुरू में एक शक्तिशाली बूस्टर के जरिए अंतरिक्ष की ओर धकेला जाता है। एक बार जरूरी ऊंचाई और रफ्तार हासिल करने के बाद, यह बिना किसी बाहरी ऊर्जा के हवा में ग्लाइड करती हुई अपने लक्ष्य पर काल बनकर टूटती है। इन मिसाइलों की गति आवाज की रफ्तार से कम से कम पांच गुना ज्यादा होती है, जो किसी भी दुश्मन के लिए सबसे बुरा सपना साबित हो सकती है।
सरकार की हरी झंडी और डीआरडीओ की तैयारी
हाइपरसोनिक मिसाइलों के अलावा, डीआरडीओ ने 'अग्नि-6' को लेकर भी अपनी मंशा साफ कर दी है। अग्नि-6 भारत की अब तक की सबसे उन्नत अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल होने वाली है, जिसकी मारक क्षमता और मारक दूरी मौजूदा अग्नि सीरीज की सभी मिसाइलों से कहीं ज्यादा होगी। कामत ने भरोसे के साथ कहा है कि डीआरडीओ अग्नि-6 के विकास के लिए पूरी तरह तैयार है और बस केंद्र सरकार की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। जैसे ही सरकार की तरफ से हरी झंडी मिलेगी, इस महाविनाशक मिसाइल पर काम शुरू कर दिया जाएगा। भारत लंबे समय से अपने रक्षा तंत्र को आत्मनिर्भर बनाने में जुटा है और इन नई उपलब्धियों के साथ भारत ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।