बदले की आग में जल रही मान सरकार? पार्टी छोड़ते ही कैसे 'अपराधी' हो गए हरभजन और संदीप पाठक? पंजाब की सियासत में 'खेला' शुरू!

आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए राज्यसभा सांसदों के खिलाफ हो रही कार्रवाई को लेकर पंजाब की राजनीति तेज हो गई है। पंजाब बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने संदीप पाठक सहित अन्य सांसदों पर की जा रही कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक हफ्ते के भीतर ऐसा क्या बदल गया कि ये सभी सांसद अचानक अपराधी नजर आने लगे।

By :  Shivam
Update:2026-05-02 17:46 IST

आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए राज्यसभा सांसदों के खिलाफ हो रही कार्रवाई को लेकर पंजाब की राजनीति गरमा गई है। विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं कि क्या पार्टी बदलने की सजा इन नेताओं को सरकारी एजेंसियों के जरिए दी जा रही है। भगवंत मान सरकार की कार्रवाई पर लगातार निशाना साधा जा रहा है।

दरअसल, हाल ही में AAP छोड़कर बीजेपी में गए 7 राज्यसभा सांसदों में से 6 पंजाब से हैं। इन नेताओं के खिलाफ पिछले कुछ दिनों में अलग-अलग विभागों द्वारा कार्रवाई की गई है। पूर्व क्रिकेटर और सांसद हरभजन सिंह, राघव चड्ढा और अशोक मित्तल समेत कई नेताओं की सुरक्षा वापस ले ली गई है। वहीं संदीप पाठक के खिलाफ भ्रष्टाचार और शोषण के आरोपों में गैर-जमानती धाराओं के तहत दो एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आई है।

हालांकि, अब तक इन एफआईआर की कॉपी सार्वजनिक नहीं हुई है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि किन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उधर, AAP कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़ने वाले सांसदों राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता और विक्रमजीत साहनी—के घरों के बाहर प्रदर्शन किया और उन्हें ‘गद्दार’ कहा। कुछ जगहों पर उनके घरों के बाहर यह शब्द लिखे जाने की भी खबर है।

इसी बीच, पंजाब सरकार ने पार्टी छोड़ने वाले कुछ सांसदों के व्यावसायिक ठिकानों पर भी कार्रवाई की। ट्राइडेंट ग्रुप के प्रमुख और सांसद राजिंदर गुप्ता की बरनाला स्थित फैक्ट्री तथा लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से जुड़े अशोक मित्तल के ठिकानों पर पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने छापेमारी की। इस कार्रवाई के खिलाफ राजिंदर गुप्ता ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया, जहां अदालत ने फिलहाल इस कार्रवाई पर सोमवार तक रोक लगा दी है।

बीजेपी में शामिल हुए सांसद विक्रमजीत साहनी ने भी सवाल उठाए कि क्या पार्टी बदलते ही ये सभी नेता अचानक ‘डिफॉल्टर’ हो गए। उन्होंने कहा कि एक ही दिन में उनकी फैक्ट्रियों से प्रदूषण फैलने के आरोप कैसे लग गए। वहीं हरभजन सिंह ने अपनी सुरक्षा वापस लेने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

हालांकि, पंजाब सरकार के मंत्री और प्रवक्ता इन कार्रवाइयों को लेकर सीधे तौर पर कुछ कहने से बच रहे हैं। जेल मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से परहेज किया।

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने इस पूरे मामले में बीजेपी और AAP दोनों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों से पहले केंद्रीय एजेंसियों और राज्य की एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। उनका कहना है कि अगर नेताओं ने कोई गलती की थी, तो कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई।

वहीं पंजाब बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने इसे बदले की कार्रवाई करार दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान, अरविंद केजरीवाल के निर्देशों पर काम कर रहे हैं और यह सब पार्टी छोड़ने वालों को सबक सिखाने के लिए किया जा रहा है, ताकि अन्य नेताओं में डर पैदा हो सके।

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