'500 पन्नों के आदेश को बिना पढ़े 4 घंटे में...', शराब घोटाले मामले में HC पहुंचे केजरीवाल-सिसोदिया, CBI पर लगाया गंभीर आरोप

Delhi Excise Policy Case: अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने दिल्ली हाईकोर्ट में CBI की याचिका खारिज करने की मांग की। उनका आरोप है कि याचिका जल्दबाजी में और बिना ठोस आधार के दायर की गई।

Update:2026-08-13 15:04 IST

Arvind Kejriwal

Delhi Excise Policy Case: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने आबकारी नीति मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। दोनों नेताओं ने हाईकोर्ट में आवेदन दाखिल कर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की उस याचिका को खारिज करने की मांग की है, जिसमें ट्रायल कोर्ट के उन्हें मामले से डिस्चार्ज करने के फैसले को चुनौती दी गई है।

केजरीवाल और सिसोदिया का कहना है कि CBI ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ जिस तरह से याचिका दाखिल की है, उसमें गंभीर कानूनी कमियां हैं। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि CBI ने 500 पन्नों के आदेश को बिना पढ़े ही उन्हें बरी किए जाने को महज 4 घंटे में ही चुनौती दे दी.

ट्रायल कोर्ट ने 23 आरोपियों को किया था डिस्चार्ज

दरअसल, दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी 2026 को आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत कुल 23 आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया था।

कुल मिलाकर, कोर्ट ने उस स्तर पर आरोपियों के खिलाफ केस चलाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना था। इसके बाद CBI ने इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। CBI की इसी चुनौती के खिलाफ अब केजरीवाल और सिसोदिया ने शुरुआती आपत्तियां उठाई हैं।

'फैसले के कुछ घंटे बाद ही दाखिल कर दी याचिका'

केजरीवाल और सिसोदिया की ओर से दाखिल आवेदनों में कहा गया है कि ट्रायल कोर्ट के फैसले के महज करीब चार घंटे के अंदर CBI ने अपनी रिवीजन याचिका दाखिल कर दी।

उनका आरोप है कि इतनी जल्दबाजी में दाखिल की गई याचिका गंभीरता से तैयार नहीं की गई और इसमें ट्रायल कोर्ट के फैसले में मौजूद किसी खास कानूनी गलती या कमी को स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया है।

मनीष सिसोदिया की ओर से दाखिल आवेदन में कहा गया है कि CBI ने यह स्पष्ट नहीं किया कि प्रत्येक आरोपी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट के किस निष्कर्ष में गलती हुई है।

सिसोदिया ने क्या कहा?

सिसोदिया की दलील है कि CBI की याचिका बहुत सामान्य तरीके से दाखिल की गई है। इसमें यह नहीं बताया गया कि किस आरोपी के मामले में कौन-सा सबूत नजरअंदाज किया गया या ट्रायल कोर्ट ने किस आधार पर गलत फैसला लिया।

उनकी ओर से यह भी कहा गया कि CBI ने अपनी रिवीजन याचिका के साथ ऐसा कोई नया सबूत या दस्तावेज पेश नहीं किया, जिससे यह साबित हो सके कि ट्रायल कोर्ट का फैसला गलत या मनमाना था।

18 अगस्त को हो सकती है सुनवाई

केजरीवाल और सिसोदिया की ओर से दाखिल आवेदन पर दिल्ली हाईकोर्ट में 18 अगस्त को सुनवाई होने की संभावना है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनोज जैन के सामने हो सकती है।

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