'राहुल गांधी जी, हाथ जोड़कर विनती है, हमारे घर मत आइए', पंजाब में मारे गए झोटा के पिता की अपील, नेहरू-इंदिरा का भी जिक्र
झोटा के पिता ने साफ कहा कि उन्हें राहुल गांधी या पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के परिवार के किसी भी सदस्य से मुलाकात नहीं करनी है।
Punjab: पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के पिता ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से एक खास अपील की है। उन्होंने राहुल गांधी से कहा है कि वे उनके परिवार से मिलने न आएं। झोटा के पिता ने साफ कहा कि उन्हें राहुल गांधी या पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के परिवार के किसी भी सदस्य से मुलाकात नहीं करनी है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि उनकी राहुल गांधी से कोई निजी दुश्मनी नहीं है।
एक बयान में झोटा के पिता ने कहा, ''राहुल गांधी जी, आप नेहरू-गांधी परिवार और इंदिरा गांधी के परिवार से आते हैं। हमारे मन में जो भी नाराजगी या मतभेद हैं, उसके लिए हमें माफ कर दीजिए, लेकिन हाथ जोड़कर गुजारिश है कि आप यहां मत आइए।'' उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बार-बार उनके यहां आते हैं, लेकिन अब वे उनसे या उनके परिवार के किसी सदस्य से मिलना नहीं चाहते।
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद पंजाब में मचा था बवाल
झोटा के पिता का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उनके बेटे परविंदर सिंह की हत्या को लेकर पंजाब में काफी नाराजगी है। 42 साल के परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर 2026 को मानसा जिले के एक व्यस्त बाजार में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद राज्य के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए थे। परिवार ने भी न्याय की मांग को लेकर कई दिनों तक धरना दिया था।
कौन थे परविंदर सिंह झोटा?
परविंदर सिंह को लोग झोटा के नाम से जानते थे। वे पहले राज्य स्तर के बॉक्सर और एथलीट रह चुके थे। उनके नाम के साथ 'झोटा' जुड़ने की वजह इसका मतलब सांड होना बताया जाता है।
युवावस्था में वे खुद भी नशे की लत से जूझ चुके थे। वे चिट्टा यानी ओपिओइड जैसे नशीले पदार्थों के आदी हो गए थे। साल 2015 में एक दोस्त की ओवरडोज से मौत देखने के बाद उन्होंने नशा छोड़ने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने नशे के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया।
झोटा ने 'नशा रोको, रोजगार दो' नाम से मुहिम चलाई थी। इस अभियान के तहत वे अपने समर्थकों और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर नशे के खिलाफ आवाज उठाते थे। उनके साथ कई नागरिक समूह भी जुड़े थे, जिन्हें 'नशा रोको कमेटियां' कहा जाता था। ये कमेटियां उन मेडिकल स्टोर और लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करती थीं, जिन पर प्रतिबंधित या नशीली दवाएं बेचने का शक था।
मेडिकल स्टोर संचालक से विवाद के दौरान चली थी गोली
13 अक्टूबर को झोटा मानसा के एक मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार से बात करने पहुंचे थे। आरोप था कि मेडिकल स्टोर से एक बुजुर्ग व्यक्ति को नशीले और लत लगाने वाले पदार्थ बेचे जा रहे थे। इसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस हुई। झोटा इस पूरी घटना को फेसबुक पर लाइव भी कर रहे थे।
इसी दौरान उन पर गोली चला दी गई और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने अश्वनी कुमार को इस मामले का मुख्य आरोपी बताया। उसे राजस्थान के सालासर से पंजाब और राजस्थान पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार किया गया था।
परिवार के विरोध के बाद CBI को सौंपी गई जांच
झोटा की हत्या के बाद पंजाब में बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए। परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कई दिनों तक धरना दिया। इस मामले को लेकर राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी सवाल उठाए और जांच दूसरी एजेंसी से कराने की मांग की।
परिवार और राजनीतिक नेताओं की मांग के बाद परविंदर सिंह झोटा की हत्या की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI को सौंप दी गई। अब इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है।