न कोई मैसेज, न OTP और न ही कोई साइन... पंजाब नेशनल बैंक के कस्टमर्स को कैसे लगा ₹35 करोड़ का चूना?

ग्रेटर नोएडा में PNB की ऐच्छर शाखा से जुड़े खातों से करीब 35 करोड़ रुपये गायब होने का आरोप लगा है।

Update:2026-10-29 14:58 IST

PNB Bank Scam: जरा सोचिए, आप सालों तक मेहनत करके एक-एक रुपया जोड़ते हैं। कभी बच्चों की पढ़ाई के लिए, कभी बुढ़ापे के सहारे के लिए, तो कभी जिंदगी की मुश्किल घड़ी में काम आने के लिए अपनी कमाई बैंक में जमा करते हैं। आपको भरोसा होता है कि पैसा सुरक्षित है। लेकिन एक दिन आप बैंक का खाता खोलते हैं और देखते हैं कि आपकी जिंदगी भर की कमाई ही गायब है! न कोई मैसेज आया, न कोई फोन और न ही आपने किसी को पैसे निकालने की इजाजत दी। आखिर रकम गई तो गई कहां?

ग्रेटर नोएडा में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की ऐच्छर शाखा से जुड़ा मामला कुछ ऐसा ही है। यहां कई खाताधारकों ने आरोप लगाया है कि उनके बचत खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट से करीब 35 करोड़ रुपये गायब हो गए। किसी के खाते में लाखों रुपये कम हो गए, तो किसी के लिए करोड़ों रुपये का हिसाब ही पहेली बन गया। मामला सामने आने के बाद बैंक में हड़कंप मच गया। कई कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया, जिनमें शाखा प्रबंधक भी शामिल हैं। पुलिस ने भी केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। लेकिन इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है—अगर ग्राहकों ने पैसे ट्रांसफर ही नहीं किए, तो फिर उनकी रकम गई कहां?

39 लाख रुपये थे जमा, लेकिन खाते में कुछ नहीं दिखा!

इस कथित गड़बड़ी की कहानी हनीफ खान के खाते से भी जुड़ी है। हनीफ के मुताबिक, उनके बचत खाते में करीब 39 लाख रुपये जमा थे। यह रकम उनके लिए कितनी अहम रही होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। लेकिन जब उन्होंने अपना खाता देखा, तो उनके मुताबिक उसमें पैसे दिखाई ही नहीं दे रहे थे।

हनीफ का दावा है कि उन्होंने न तो रकम ट्रांसफर करने की अनुमति दी और न ही किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। उनका कहना है कि बैंक की तरफ से उन्हें कोई मैसेज भी नहीं मिला। अब उनके मन में सवाल है कि जब उन्होंने कोई लेनदेन किया ही नहीं, तो खाते से पैसे कैसे गायब हो गए?

यह सिर्फ एक ग्राहक की शिकायत नहीं है। इसी तरह की शिकायतें दूसरे खाताधारकों ने भी की हैं। हर किसी की कहानी अलग है, लेकिन सवाल एक ही—क्या हुआ था बैंक के भीतर?

किसान के खाते में 88 लाख से सीधे 1 लाख रुपये!

अब कहानी का दूसरा हिस्सा सुनिए। विजेंद्र सिंह एक किसान हैं। उनके मुताबिक, उनके खाते में करीब 87 से 88 लाख रुपये जमा थे। यह रकम उन्हें जमीन के अधिग्रहण के बदले मुआवजे के रूप में मिली थी। यानी जमीन चली गई, तो उसके बदले मिले पैसे को उन्होंने भविष्य के सहारे के तौर पर संभालकर रखा।

लेकिन विजेंद्र सिंह का दावा है कि जब उन्होंने खाते का बैलेंस देखा, तो उसमें सिर्फ 1 लाख रुपये बचे थे। सवाल यह है कि आखिर बाकी रकम कहां गई? क्या कोई लेनदेन हुआ? अगर हुआ, तो किसने किया? और अगर खाताधारक की अनुमति नहीं थी, तो फिर यह सब कैसे संभव हुआ?

इन सवालों के जवाब अभी सामने नहीं आए हैं। पुलिस जांच कर रही है, लेकिन खाताधारकों के लिए हर गुजरता दिन चिंता बढ़ाने वाला है। जिस रकम को उन्होंने सुरक्षित भविष्य की गारंटी समझा था, उसी के गायब होने का दावा अब उन्हें परेशान कर रहा है।

चाय-समोसे बेचने वाली महिला के खाते से 1.18 करोड़ गायब होने का दावा

इस पूरे मामले में संतोष नाम की 60 वर्षीय महिला की कहानी भी बेहद अहम है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बिरोंडा गांव में चाय और समोसे बेचकर गुजारा करने वाली संतोष के खाते में जेवर एयरपोर्ट परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन के बदले 1.29 करोड़ रुपये का मुआवजा आया था।

यह रकम उनके लिए सिर्फ बैंक बैलेंस नहीं थी। जमीन के बदले मिले इस पैसे से उनका भविष्य जुड़ा था। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, परिवार को जब खाते की स्थिति का पता चला, तो करीब 1.18 करोड़ रुपये गायब होने की बात सामने आई।

बताया गया कि संतोष के बेटे को इस गड़बड़ी का पता तब चला, जब वह पैसे निकालने के लिए बैंक पहुंचा। सोचिए, परिवार पैसे निकालने की उम्मीद लेकर बैंक पहुंचा हो और वहां पता चले कि खाते में बड़ी रकम मौजूद ही नहीं है! उस समय परिवार पर क्या बीती होगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।

रिपोर्ट के मुताबिक, संतोष और उनकी बहन बाद में बैंक के बाहर बैठ गईं। उनके लिए यह सिर्फ पैसों का मामला नहीं था, बल्कि उस भरोसे का भी सवाल था, जिसके साथ उन्होंने अपनी रकम बैंक में रखी थी।

न कोई मैसेज, न कोई अलर्ट... फिर खाते से पैसे कैसे निकले?

इस कथित बैंक गड़बड़ी में एक बात बार-बार सामने आ रही है। कई ग्राहकों का कहना है कि उन्हें खाते से रकम कम होने की कोई सूचना नहीं मिली। न मैसेज आया और न ही उन्हें समय रहते किसी तरह का अलर्ट मिला। कुछ लोगों को तब पता चला, जब उन्होंने खुद बैंक जाकर खाते की जानकारी ली या पैसे निकालने की कोशिश की।

जाकिर नाम के एक अन्य खाताधारक ने आरोप लगाया कि उनके खाते से 9.5 लाख रुपये गायब हो गए। उनका कहना है कि उन्हें लेनदेन से जुड़ा कोई SMS नहीं मिला और बैंक पहुंचने के बाद ही उन्हें कथित गड़बड़ी का पता चला।

अब सवाल उठता है कि अगर खातों से लेनदेन हुए, तो उनकी प्रक्रिया क्या थी? क्या किसी ने ग्राहकों की जानकारी के बिना पैसे ट्रांसफर किए? क्या बचत खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़ी प्रक्रियाओं में कोई गड़बड़ी हुई? या इसके पीछे कोई दूसरी वजह है?

फिलहाल इन सवालों का जवाब मिलना बाकी है। जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा। लेकिन ग्राहकों की शिकायतों ने बैंकिंग व्यवस्था में सुरक्षा और निगरानी को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

शाखा प्रबंधक समेत कई कर्मचारी निलंबित, पुलिस खंगाल रही पूरा मामला

शिकायतों के सामने आने के बाद PNB प्रबंधन ने कई कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। इनमें शाखा प्रबंधक भी शामिल हैं। वहीं, ग्रेटर नोएडा के बीटा-2 पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है और पुलिस जांच में जुटी है।

बैंक प्रबंधन ने खाताधारकों की शिकायतों का समाधान करने का भरोसा दिया है। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं हुआ है कि कथित तौर पर गायब हुई रकम का पूरा मामला क्या है, लेनदेन कैसे हुए और इसमें किसकी भूमिका थी।

इस कहानी का सबसे बड़ा रहस्य अभी भी अनसुलझा है। एक तरफ ऐसे ग्राहक हैं, जो अपनी जमा पूंजी का हिसाब मांग रहे हैं। दूसरी तरफ जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि आखिर खातों में क्या हुआ था।

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