55000 मौतें! भारत में बिछ जाएंगी लाशें, तड़पा देगा सुपर एल नीनो, समंदर के ताप से मचेगा हाहाकार

क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के हीट मॉर्टेलिटी ट्रैकर के मुताबिक, सुपर अल नीनो के संभावित असर से अक्टूबर से मार्च के बीच भारत में गर्मी से जुड़ी करीब 55,000 मौतें हो सकती हैं।

Update:2026-10-29 14:31 IST

Super El Nino Alert: दुनिया के मौसम में बड़ा बदलाव लाने वाला अल नीनो इस बार बेहद ताकतवर रूप लेता दिखाई दे रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, प्रशांत महासागर के पानी का तापमान असामान्य रूप से बढ़ने से दुनिया के कई हिस्सों में भीषण गर्मी, सूखा, बाढ़ और तूफान जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

इस बीच क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के एक हीट मॉर्टेलिटी ट्रैकर ने अगले छह महीनों में दुनिया भर में गर्मी से जुड़ी तीन लाख 73 हजार से ज्यादा अतिरिक्त मौतों का अनुमान जताया है। इस अनुमान में भारत को सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में रखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर से मार्च के बीच भारत में गर्मी से जुड़ी करीब 55,000 मौतें हो सकती हैं।

भारत में 55,000 मौतों का अनुमान, मार्च में ज्यादा खतरा

क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के हीट मॉर्टेलिटी ट्रैकर के मुताबिक, आने वाले छह महीनों में गर्मी से जुड़ी अतिरिक्त मौतों का सबसे ज्यादा खतरा ग्लोबल साउथ यानी एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई देशों में रहने वाले लोगों पर हो सकता है। इस अनुमान में भारत के लिए अक्टूबर से मार्च के बीच करीब 55,000 गर्मी-संबंधी मौतों की आशंका जताई गई है। ट्रैकर के मुताबिक, भारत में इनमें से ज्यादातर मौतें मार्च महीने में हो सकती हैं।

मुंबई में बढ़ सकती है वायु प्रदूषण की परेशानी

अल नीनो का असर केवल गर्मी तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। मौसम की परिस्थितियों में बदलाव से कुछ शहरों में वायु प्रदूषण की समस्या भी बढ़ सकती है।

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, मौसम विशेषज्ञ डॉ. गुफरान बेग ने मुंबई में अल नीनो के कारण प्रदूषण बढ़ने की आशंका जताई है। डॉ. बेग SAFAR के संस्थापक-परियोजना निदेशक और IISc के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज (NIAS) में चेयर प्रोफेसर हैं।

उन्होंने बताया कि मुंबई में बड़े पैमाने पर चलने वाली हवाओं की गति धीमी पड़ सकती है। तेज हवाएं आमतौर पर प्रदूषित हवा को फैलाने में मदद करती हैं। अगर हवा की गति कम होती है, तो शहर में प्रदूषकों के जमा होने की स्थिति बन सकती है।

क्या है सुपर अल नीनो, जिससे बढ़ सकती है गर्मी?

अल नीनो प्रशांत महासागर की एक प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है। इसमें भूमध्य रेखा के आसपास प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इसका असर समुद्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दुनिया के कई क्षेत्रों में हवाओं, बारिश और तापमान के पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है।

इस बार अल नीनो की ताकत को लेकर खास चिंता जताई जा रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सितंबर में मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से 3.08 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया गया। यह आंकड़ा अब तक दर्ज किए गए अल नीनो के सबसे ऊंचे स्तरों में शामिल बताया गया है। इसी वजह से कुछ विशेषज्ञ इसे ‘सुपर अल नीनो’ कह रहे हैं।

नाइजीरिया और इंडोनेशिया में भी गंभीर खतरे का अनुमान

ट्रैकर के अनुसार, भारत के अलावा दूसरे देशों में भी गर्मी से जुड़ी मौतों का आंकड़ा काफी ज्यादा हो सकता है। नाइजीरिया में करीब 56 हजार अतिरिक्त मौतों का अनुमान जताया गया है, जो भारत के अनुमान के लगभग बराबर है।

दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में भी गर्मी का असर गंभीर रहने की आशंका है। इंडोनेशिया में करीब 29 हजार और ब्राजील में लगभग 19 हजार अतिरिक्त गर्मी-संबंधी मौतों का अनुमान लगाया गया है।

क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के सह-संस्थापक माइकल ग्रीनस्टोन के मुताबिक, गर्मी के खतरों का पहले से अनुमान लगाने से उन इलाकों की पहचान की जा सकती है, जहां लोगों को सबसे ज्यादा जोखिम है। इससे प्रशासन और नीति बनाने वाले अधिकारियों को समय रहते बचाव के कदम उठाने का मौका मिल सकता है।

विश्व मौसम संगठन ने भी दी चेतावनी

विश्व मौसम संगठन (WMO) ने भी इस साल के अल नीनो को लेकर चिंता जताई है। संगठन के मुताबिक, इसका असर दिसंबर के आसपास अपने चरम पर पहुंच सकता है और इसके प्रभाव 2027 की शुरुआत तक बने रह सकते हैं।

WMO ने चेतावनी दी है कि अल नीनो के कारण दुनिया के बड़े हिस्से में सामान्य से ज्यादा तापमान दर्ज किया जा सकता है। इसके साथ ही बारिश के पैटर्न में बदलाव से अलग-अलग क्षेत्रों में सूखे और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

अल नीनो की यह प्रक्रिया आम तौर पर हर दो से सात साल में सामने आती है और करीब नौ से 12 महीने तक रह सकती है। इसके विपरीत ला नीना की स्थिति में प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से ठंडा हो जाता है। इन दोनों के बीच सामान्य जलवायु परिस्थितियां भी बनी रह सकती हैं।

गर्मी से होने वाली मौतों का अनुमान क्यों है अहम?

भीषण गर्मी का असर खास तौर पर बुजुर्गों, छोटे बच्चों, पहले से बीमार लोगों और खुले में काम करने वालों पर पड़ सकता है। लंबे समय तक तेज गर्मी में रहने से शरीर में पानी की कमी, हीट स्ट्रोक और दूसरी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। भारत में गर्मी से होने वाले संभावित नुकसान का आकलन इसलिए भी अहम है, क्योंकि यहां बड़ी आबादी खुले में काम करती है और कई इलाकों में गर्मियों के दौरान तापमान काफी बढ़ जाता है।

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