Satyapal Malik Controversy: 'पुलवामा' से लेकर 'भ्रष्टाचार' तक... सत्यपाल मलिक के वो 4 बड़े खुलासे, जिसने हिला दी थी देश की सियासत

Satyapal Malik Controversy: देश की राजनीति में अपनी बेबाकी और बड़े-बड़े खुलासे से भूचाल लाने वाले पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन हो गया है। 78 वर्ष की आयु में उन्होंने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में अंतिम सांस ली।

Update:2025-08-05 14:34 IST

Satyapal Malik Controversy: देश की राजनीति में अपनी बेबाकी और बड़े-बड़े खुलासे से भूचाल लाने वाले पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन हो गया है। 78 वर्ष की आयु में उन्होंने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में अंतिम सांस ली। एक समय भाजपा के कद्दावर नेता और कई राज्यों के राज्यपाल रहे मलिक अपने कार्यकाल के बाद अपनी ही पार्टी और केंद्र सरकार के सबसे मुखर आलोचक बन गए थे। उनके निधन से देश में शोक की लहर है लेकिन उनकी कही बातें और उनसे जुड़े विवाद आज भी भारतीय राजनीति के इतिहास में दर्ज हैं। सत्यपाल मलिक मई 2025 से डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती थे और लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। उन्हें गंभीर मूत्र मार्ग संक्रमण और किडनी फेल्यर की जटिलताओं के कारण आईसीयू में रखा गया था। आज दोपहर में अस्पताल ने उनके निधन की पुष्टि की। उनका निधन ऐसे समय हुआ है जब ठीक एक दिन पहले ही झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का भी दिल्ली में निधन हुआ था जिससे देश की राजनीति में शोक की एक और लहर दौड़ गई है।

पुलवामा हमला: 'मैं चुप रहने को मजबूर हुआ'

सत्यपाल मलिक के जीवन का सबसे बड़ा और सबसे सनसनीखेज खुलासा 2019 के पुलवामा आतंकी हमले से जुड़ा था। यह आरोप इतना गंभीर था कि इसने न सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा बल्कि केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खड़े कर दिए थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में दावा किया था कि हमले से पहले सीआरपीएफ ने अपने जवानों को जम्मू से श्रीनगर ले जाने के लिए विमानों की मांग की थी लेकिन गृह मंत्रालय ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया था।

उनका सीधा कहना था कि अगर यह अनुरोध मान लिया जाता तो शायद यह हमला होता ही नहीं। इसके अलावा उन्होंने खुफिया तंत्र की भी गंभीर विफलता की बात कही थी। उन्होंने बताया था कि जिस गाड़ी में विस्फोटक था वह कई दिनों से जम्मू-कश्मीर में घूम रही थी लेकिन उसे कोई भी डिटेक्ट नहीं कर पाया। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि मलिक ने दावा किया था कि इस हमले के बाद जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को इन खामियों के बारे में बताया तो दोनों ने उन्हें 'चुप रहने' के लिए कहा। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें तब महसूस हुआ कि सरकार का इरादा इस घटना का राजनीतिक फायदा उठाना था और इसका दोष पाकिस्तान पर मढ़कर आने वाले चुनावों में लाभ लेना था।

भ्रष्टाचार के आरोप: '300 करोड़ की रिश्वत का ऑफर'

पुलवामा हमले के अलावा सत्यपाल मलिक अपने भ्रष्टाचार विरोधी रुख के लिए भी जाने जाते थे। राज्यपाल रहते हुए उन्होंने खुद पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी अपनी बात रखी और बड़े-बड़े खुलासे किए। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर यह कहा था कि जब वह जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे तब उन्हें दो फाइलों को मंजूरी देने के लिए 300 करोड़ रुपये की रिश्वत का ऑफर दिया गया था। ये फाइलें एक सरकारी कर्मचारी बीमा योजना और दूसरी किरू हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट से जुड़ी थीं। उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने इस ऑफर को ठुकरा दिया था। मलिक के इस खुलासे के बाद इस मामले में सीबीआई जांच शुरू हुई और 2025 में किरू हाइड्रोपावर मामले में उनके और अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की गई। इस पर मलिक ने सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार उन लोगों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें निशाना बना रही है जिन पर उन्होंने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था।

बीजेपी के सबसे बड़े आलोचक

इसके अलावा उन्होंने गोवा में भी बीजेपी की सरकार पर कोविड-19 महामारी के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे और दावा किया था कि इसी वजह से उन्हें मेघालय ट्रांसफर कर दिया गया था। मोदी सरकार और BJP के सबसे बड़े आलोचक राज्यपाल का कार्यकाल पूरा होने के बाद सत्यपाल मलिक पूरी तरह से मोदी सरकार और बीजेपी के आलोचक बन गए थे। उन्होंने खुलकर सरकार की नीतियों की आलोचना की। वह किसानों के आंदोलन के सबसे बड़े समर्थकों में से थे। उन्होंने कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों के विरोध का खुलकर समर्थन किया और सरकार को चेतावनी दी कि सिखों और जाट समुदाय के धैर्य की परीक्षा न ली जाए। उन्होंने यहां तक कहा था कि किसानों के गुस्से के कारण उनके गृह राज्य उत्तर प्रदेश में बीजेपी के नेता गांवों में नहीं घुस पा रहे थे।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी कई बार तीखे हमले किए थे। उन्होंने एक बार कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी कश्मीर के बारे में 'कम जानकारी' रखते हैं और 'भ्रष्टाचार के बहुत ज्यादा खिलाफ नहीं' हैं। यह उनकी बेबाकी ही थी कि वह राज्यपाल रहते हुए भी बिहार गोवा और मेघालय की सरकारों की आलोचना करते थे जो या तो बीजेपी द्वारा शासित थीं या उसके गठबंधन में थीं।

बेबाक बयानों के लिए मशहूर

सत्यपाल मलिक अपने बेबाक और कभी-कभी विवादास्पद बयानों के लिए भी जाने जाते थे। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहते हुए उन्होंने एक बार कश्मीरी उग्रवादियों से कहा था कि वे सुरक्षाकर्मियों को मारने के बजाय 'भ्रष्टाचारियों को मारें'। इस बयान पर जब हंगामा हुआ तो उन्होंने माफी मांग ली लेकिन यह भी कहा कि यह उनके दिल की बात थी। एक बार तो उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि राज्यपाल का काम 'शराब पीना और गोल्फ खेलना' होता है जो कश्मीर के राज्यपाल के लिए भी सच था। इन तमाम विवादों और बयानों ने सत्यपाल मलिक के राजनीतिक जीवन के अंतिम हिस्से को परिभाषित किया। उन्होंने एक पार्टी के वफादार से एक ऐसे निर्भीक असंतुष्ट के रूप में खुद को स्थापित किया जो सत्ता में बैठे लोगों और संस्थानों को चुनौती देने से कभी नहीं घबराए। उनका निधन एक ऐसे युग का अंत है जिसमें एक नेता ने पद और प्रतिष्ठा को दरकिनार कर अपनी अंतरात्मा की आवाज को सबसे ऊपर रखा।

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