‘48 घंटों में माफी मांगों वरना…’, विवादित पोस्ट को लेकर घिरे अमित मालवीय! कांग्रेस ने भेजा नोटिस
National Anthem Controversy: राष्ट्रगान विवाद को लेकर संदीप दीक्षित ने बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय को लीगल नोटिस भेजा है। 48 घंटे में पोस्ट हटाकर माफी मांगने की मांग की गई है।
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National Anthem Controversy: कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित (Sandeep Dikshit) की तरफ से बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय (Amit Malviya) को कानूनी नोटिस भेजा गया है। यह नोटिस 15 अगस्त को वकील अंबुज दीक्षित और अमरीश रंजन पांडे ने भेजा। मामला 13 अगस्त को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुए रचनात्मक कांग्रेस के राष्ट्रीय सम्मेलन (Rachnatmak Congress National Conference) के दौरान राष्ट्रगान को लेकर हुई तकनीकी गड़बड़ी से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला?
नोटिस के मुताबिक, कार्यक्रम में राष्ट्रगान सामान्य तरीके से बजाया गया था। मंच पर मौजूद संदीप दीक्षित, राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और अन्य लोग यह मानकर आगे बढ़ गए कि राष्ट्रगान समाप्त हो चुका है। इसके बाद वे कार्यक्रम में मौजूद लोगों से मिलने-जुलने लगे।
इसी दौरान ऑडियो सिस्टम में गड़बड़ी की वजह से राष्ट्रगान गलती से दोबारा बजने लगा। नोटिस में कहा गया है कि ऑडियो ऑपरेटर ने इस गड़बड़ी को तुरंत ठीक किया और दोबारा बज रहे राष्ट्रगान को रोक दिया।
नोटिस में वीडियो की टाइमलाइन भी दी गई
कानूनी नोटिस में घटना से जुड़े वीडियो की पूरी टाइमलाइन भी बताई गई है। इसके मुताबिक, वीडियो में 59:55 मिनट पर संदीप दीक्षित लोगों से नारेबाजी नहीं करने की अपील करते हुए दिखाई देते हैं। इसके बाद 1:00:01 मिनट पर राष्ट्रगान शुरू होता है।
नोटिस के अनुसार, राष्ट्रगान 1:01:01 मिनट पर समाप्त हो जाता है। इसके ठीक एक सेकंड बाद यानी 1:01:02 मिनट पर ऑडियो सिस्टम की तकनीकी गड़बड़ी के कारण राष्ट्रगान दोबारा बजने लगता है। ऑपरेटर इसे तुरंत रोक देता है और 1:01:08 मिनट पर राष्ट्रगान की आवाज पूरी तरह बंद हो जाती है।
बीजेपी के पोस्ट पर जताई आपत्ति
नोटिस में कहा गया है कि इस पूरी घटना को बीजेपी के आधिकारिक एक्स हैंडल (X Handle) @BJP4India की तरफ से गलत तरीके से पेश किया गया। कांग्रेस नेता की तरफ से भेजे गए नोटिस में बीजेपी पर आरोप लगाया गया है कि तकनीकी गड़बड़ी को जानबूझकर राष्ट्रगान के अपमान के तौर पर पेश किया गया।
नोटिस के मुताबिक, बीजेपी के पोस्ट में कहा गया था कि राहुल गांधी ने फिर राष्ट्रगान का अपमान किया है और यह उनका देश विरोधी रवैया दिखाता है। कांग्रेस पक्ष का कहना है कि कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगान का अपमान करने की कोई जानबूझकर कोशिश नहीं हुई थी। जो कुछ हुआ, वह ऑडियो सिस्टम की एक साधारण तकनीकी चूक थी।
कांग्रेस ने आरोपों को बताया गलत और भ्रामक
संदीप दीक्षित की तरफ से भेजे गए कानूनी नोटिस में कहा गया है कि तकनीकी गड़बड़ी को जानबूझकर किए गए कृत्य के रूप में पेश करना पूरी तरह गलत और भ्रामक है। नोटिस में बीजेपी की ओर से किए गए दावे पर आपत्ति जताते हुए कहा गया है कि घटना की वास्तविक वीडियो टाइमलाइन से पूरी स्थिति स्पष्ट होती है।
कांग्रेस पक्ष का कहना है कि संदीप दीक्षित, राहुल गांधी और मंच पर मौजूद अन्य लोग राष्ट्रगान के सामान्य रूप से समाप्त होने के बाद ही लोगों से मिलने-जुलने के लिए आगे बढ़े थे। दोबारा राष्ट्रगान बजना ऑडियो सिस्टम की गड़बड़ी की वजह से हुआ और ऑपरेटर ने इसे तुरंत बंद कर दिया।
बीजेपी से पोस्ट हटाने और माफी की मांग
कानूनी नोटिस में बीजेपी से विवादित पोस्ट को तुरंत हटाने की मांग की गई है। इसके साथ ही मांग की गई है कि बीजेपी अपने उसी एक्स हैंडल से बिना शर्त माफी और स्पष्टीकरण जारी करे।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि भविष्य में इस तरह के आरोप दोबारा नहीं लगाए जाएं। यानी कांग्रेस नेता की तरफ से बीजेपी से न सिर्फ मौजूदा पोस्ट हटाने की मांग की गई है, बल्कि भविष्य में भी इस तरह के आरोपों से बचने को कहा गया है।
सभी रिकॉर्ड और दस्तावेज सुरक्षित रखने को कहा
नोटिस में घटना से जुड़े सभी दस्तावेज, वीडियो और रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने के लिए भी कहा गया है। इसका उद्देश्य आगे किसी कानूनी कार्रवाई की स्थिति में घटना से संबंधित रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना है।
48 घंटे का दिया गया समय
संदीप दीक्षित की तरफ से भेजे गए कानूनी नोटिस में जवाब देने के लिए 48 घंटे का समय दिया गया है। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि अगर निर्धारित समय के भीतर विवादित पोस्ट हटाने, बिना शर्त माफी और स्पष्टीकरण जारी करने की मांग पूरी नहीं की गई, तो मानहानि का मुकदमा (Defamation Case) दायर किया जा सकता है।
इस तरह 13 अगस्त को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में राष्ट्रगान को लेकर हुई तकनीकी गड़बड़ी अब कानूनी विवाद में बदल गई है। कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित की तरफ से अमित मालवीय को भेजे गए नोटिस में पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन का हवाला देते हुए बीजेपी के आरोपों को गलत और भ्रामक बताया गया है और 48 घंटे के भीतर कार्रवाई की मांग की गई है।