"जीभ काट दूंगा, किताब जला दो!" शिवसेना विधायक की 'गुंडागर्दी' का ऑडियो वायरल, महाराष्ट्र की राजनीति में मचा हड़कंप

शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ का एक प्रकाशक को धमकी देने वाला ऑडियो वायरल हुआ है। 'शिवाजी कोण होता' किताब को लेकर हुए इस विवाद में गायकवाड़ ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, जिस पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

By :  Shivam
Update:2026-04-23 17:06 IST

महाराष्ट्र में एक विधायक से जुड़ा एक ऑडियो क्लिप तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह एक पुस्तक के प्रकाशक को कथित तौर पर गाली देते हुए और धमकी देते हुए सुनाई देते हैं। यह मामला शिवसेना के विधायक संजय गायकवाड़ से जुड़ा है, जिन्होंने ‘शिवाजी कोन होता’ नामक किताब के प्रकाशक प्रशांत अंबी को फोन किया था।

गायकवाड़ का आरोप है कि इस पुस्तक में छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान किया गया है और उनके इतिहास को गलत तरीके से पेश किया गया है। यह किताब उनकी पत्नी को मंगलवार को मिली थी। पुस्तक पढ़ने के बाद गायकवाड़ ने नाराजगी जताई और प्रकाशक को कॉल किया, जिसकी बातचीत का ऑडियो अब वायरल हो चुका है।

वायरल ऑडियो में गायकवाड़ कथित रूप से कहते सुनाई देते हैं कि प्रकाशक की “जुबान खींच लेनी चाहिए” और ऐसी किताबों को नष्ट कर देना चाहिए। साथ ही, उन्होंने प्रकाशक को लेकर अपमानजनक भाषा का भी इस्तेमाल किया।

ऑडियो सामने आने के बाद गायकवाड़ ने स्वीकार किया कि आवाज उनकी ही है, लेकिन उनका कहना है कि कुछ शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।

इस पूरे विवाद पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के प्रवक्ता हर्षवर्धन सपकाल ने इसे “खुली गुंडागर्दी” करार देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने गायकवाड़ पर पहले भी विवादित व्यवहार के आरोप लगाए, जिनमें MLA हॉस्टल की कैंटीन में एक कर्मचारी को थप्पड़ मारने और पुलिसकर्मियों से निजी काम करवाने जैसे मामले शामिल हैं।

सपकाल ने यह भी कहा कि जो व्यक्ति खुद को शिवाजी महाराज का अनुयायी बताता है, उसकी भाषा किसी जनप्रतिनिधि के अनुरूप नहीं है।

‘शिवाजी कोन होता’ (अर्थात ‘शिवाजी कौन था’) एक संक्षिप्त जीवनी है, जिसे वामपंथी नेता गोविंद पानसरे ने लिखा था। यह पुस्तक पहली बार 1988 में प्रकाशित हुई थी और ‘लोकवाङ्मय गृह’ द्वारा प्रकाशित की गई थी। यह किताब कई बार पुनर्मुद्रित हो चुकी है। गोविंद पानसरे की 2015 में हत्या कर दी गई थी, जिसमें कथित तौर पर दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं का नाम सामने आया था।

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