जिस बयान ने मचाया था हंगामा, उसी केस में स्वतंत्र भारद्वाज को मिली नियमित जमानत
स्वतंत्र भारद्वाज को जंतर-मंतर विवाद से जुड़े SC/ST एक्ट मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने नियमित जमानत दे दी है।
Swatantra Bhardwaj Regular Bail
Swatantra Bhardwaj Regular Bail: जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर हुए कथित विवाद और एससी/एसटी एक्ट (SC/ST Act) के मामले में स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत (Patiala House Court) से नियमित जमानत (Regular Bail) मिल गई है। इससे पहले अदालत ने उन्हें तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत (Interim Bail) दी थी। अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद मंगलवार को मामले की सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने भारद्वाज को नियमित जमानत देने का फैसला किया।
यह मामला कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party-CJP) के जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन (Protest) के दौरान सामने आया था। शिकायत के मुताबिक, प्रदर्शन में शामिल दलित छात्रा निशू आजाद (Dalit Student Nishu Azad) के पिता और स्वतंत्र भारद्वाज के बीच वीडियो बनाए जाने को लेकर कहासुनी हुई थी। आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद हाथापाई (Assault) हुई और इसी दौरान भारद्वाज ने उनके सिर पर लोहे के भारी कड़े से हमला किया। पुलिस के मुताबिक, घटना 23 जून 2026 को हुई थी और शिकायत के आधार पर संसद मार्ग थाने (Sansad Marg Police Station) में मामला दर्ज किया गया था।
कैसे बढ़ा मामला
शुरुआत में भारद्वाज के खिलाफ मारपीट (Assault) और गलत तरीके से रोकने (Wrongful Restraint) से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। बाद में मामले में एससी/एसटी एक्ट (SC/ST Act) की धाराएं और आपराधिक धमकी (Criminal Intimidation) से जुड़ी धाराएं जोड़ी गईं। पुलिस ने यह भी कहा था कि घटना के बाद भारद्वाज और एक अन्य व्यक्ति को मौके से हिरासत (Detention) में लेकर पूछताछ की गई थी और कानूनी प्रक्रिया (Legal Procedure) के तहत नोटिस दिए गए थे।
यह मामले उस समय नया मोड़ लिया जब भारद्वाज के एक पॉडकास्ट (Podcast) का वीडियो सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल हुआ। इसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा कि उन्होंने निशू आजाद के पिता का “सिर फोड़ दिया” और दावा किया कि उन्हें इस मामले में जेल नहीं जाना पड़ा। उन्होंने चोट को गंभीर बताते हुए 60 टांके (60 Stitches) लगने और एंबुलेंस (Ambulance) से अस्पताल ले जाने की बात भी कही थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने बाद में इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि मेडिकल जांच (Medical Examination) में चोट साधारण प्रकृति की पाई गई थी और “खोपड़ी फटने” जैसी बात मेडिकल रिपोर्ट (Medical Report) से समर्थित नहीं है।
स्वतंत्र भारद्वाज के कौन-कौन से बयान विवादों में रहे?
पॉडकास्ट में भारद्वाज ने अपने कथित राजनीतिक संपर्कों (Political Connections) का भी जिक्र किया। उन्होंने दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा (Kapil Mishra) को अपना “बड़ा भाई” बताते हुए दावा किया कि उनके फोन के कारण उन्हें रिहाई मिली। इसके अलावा उन्होंने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान (Chirag Paswan) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) का भी नाम लेते हुए उनके साथ करीबी होने का दावा किया। इन दावों का कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया। बाद में चिराग पासवान ने भारद्वाज पर अपने नाम के कथित गलत इस्तेमाल (Misuse of Name) का आरोप लगाते हुए दिल्ली पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई और कहा कि उनका या उनकी पार्टी का भारद्वाज से कोई संबंध नहीं है।
विवादित पॉडकास्ट में भारद्वाज की मुस्लिम समुदाय (Muslim Community) को लेकर की गई टिप्पणियां भी सामने आई थीं। उनके सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो (Social Media Posts and Videos) में विपक्षी नेताओं (Opposition Leaders), आरक्षण (Reservation) और CJP से जुड़े प्रदर्शनकारियों (CJP Protesters) को लेकर भी आपत्तिजनक और उकसाने वाले बयान बताए गए। इन बयानों के सामने आने के बाद मामला सिर्फ जंतर-मंतर की कथित मारपीट तक सीमित नहीं रहा और सोशल मीडिया पर भी उनकी भूमिका को लेकर विवाद बढ़ गया।
बाद में क्या सफाई दी?
वायरल वीडियो के बाद भारद्वाज ने अपने बयान का दूसरा पक्ष रखते हुए कहा था कि जंतर-मंतर पर जो कुछ हुआ, वह हमला नहीं बल्कि आत्मरक्षा (Self-Defence) में की गई कार्रवाई थी। उनका दावा था कि उन्हें 10-15 लोगों ने घेर लिया था और अगर उन्होंने बचाव में कार्रवाई नहीं की होती तो उन्हें भीड़ मार सकती थी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास घटना का वीडियो सबूत (Video Evidence) है और घायल व्यक्ति को गंभीर चोट लगने की बात सही नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच दिल्ली पुलिस ने कहा था कि घायल संजय कुमार को आरएमएल अस्पताल (RML Hospital) में चिकित्सकीय जांच (Medical Examination) के लिए भेजा गया था और रिपोर्ट में चोट को साधारण बताया गया। पुलिस ने राजनीतिक प्रभाव या हस्तक्षेप (Political Influence or Intervention) के आरोपों को भी तथ्यात्मक रूप से गलत बताया था। अब पटियाला हाउस कोर्ट (Patiala House Court) से नियमित जमानत मिलने के बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया (Legal Proceedings) आगे जारी रहेगी।