SC Yes Bank Case: Yes Bank AT-1 बॉन्ड मामले में SC का बड़ा एक्शन! वित्त मंत्रालय से मांगे कैबिनेट के गुप्त रिकॉर्ड
SC Yes Bank Case: बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने वित्त मंत्रालय से कैबिनेट बैठक से जुड़े रिकॉर्ड, कार्यवाही और कोरम का पूरा विवरण पेश करने का आदेश जारी दिया।
SC Yes Bank Case
SC Yes Bank Case: Yes Bank के लगभग 8,415 करोड़ रुपये के एडिशनल टियर-1 (AT-1) बॉन्ड को बट्टे खाते में डालने के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय पर सख्त नाराजगी जताई है। आज 20 मई यानी बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने वित्त मंत्रालय से कैबिनेट बैठक से जुड़े रिकॉर्ड, कार्यवाही और कोरम का पूरा विवरण पेश करने का आदेश जारी दिया।
जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वे दोपहर 3 बजे तक उस कैबिनेट बैठक के दस्तावेज पेश करें, जिसके आधार पर साल 2023 में Yes Bank के AT-1 बॉन्ड को राइट-ऑफ करने का निर्णय लिया गया था।
SC मांगी पूरी कैबिनेट प्रक्रिया की जानकारी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह पूरी तरह से साफ कर दिया कि वह यह जानना चाहता है कि आखिर किस प्रक्रिया के अंतर्गत इतना बड़ा वित्तीय फैसला लिया गया। अदालत ने केंद्र सरकार से कैबिनेट बैठक के नियम, उसमें मौजूद सदस्यों के नाम, कोरम की स्थिति और बैठक में विस्तार से हुई चर्चा का पूरा रिकॉर्ड पेश करने को कहा है।
कोर्ट ने वित्त मंत्रालय से यह भी पूछा कि क्या बॉन्ड राइट-ऑफ का निर्णय सभी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए लिया गया था या नहीं। इस दौरान अदालत ने वित्त मंत्रालय के रवैये पर नाराजगी भी जाहिर की।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, मार्च 2020 में Yes Bank वित्तीय संकट से गुजर रहा था। उस वक्त RBI Bank ने बैंक के पुनर्गठन की योजना लागू की थी। इसी प्रक्रिया के अंतर्गत बैंक के लगभग 8,415 करोड़ रुपये के AT-1 बॉन्ड को पूरी तरह से राइट-ऑफ कर दिया गया था।
AT-1 बॉन्ड एक खास तरह के बॉन्ड होते हैं, जिन्हें बैंक अपनी पूंजी मजबूत करने के लिए जारी करते हैं। संकट की स्थिति में इन्हें नुकसान सहने वाले निवेश के तौर पर माना जाता है। हालांकि, यस बैंक मामले में हजारों निवेशकों ने दावा किया था कि बिना पर्याप्त जानकारी और पारदर्शिता के उनके निवेश को खत्म कर दिया गया।
बॉन्डधारकों ने HC में दी थी चुनौती
यस बैंक के AT-1 बॉन्ड में कई संस्थागत निवेशकों, म्यूचुअल फंड कंपनियों और खुदरा निवेशकों ने निवेश किया था। इनमें Nippon India Mutual Fund जैसे बड़े निवेशक भी शामिल थे।
बॉन्डधारकों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में इस निर्णय को चुनौती दी थी। जनवरी साल 2023 में हाई कोर्ट ने निवेशकों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए RBI और यस बैंक द्वारा बॉन्ड राइट-ऑफ के फैसले को रद्द कर दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि निवेशकों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
SC में पहुंचा मामला
हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ यस बैंक, RBI और वित्त मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। अब सर्वोच्च न्यायालय इस पूरे मामले की सुनवाई कर रहा है और सरकार से फैसले की प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज मांगकर मामले को गंभीरता से देख रहा है।
बता दे, इस मामले पर पूरे देश के बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला भविष्य में AT-1 बॉन्ड और बैंकिंग सेक्टर के निवेश नियमों पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।