इस देश में है मच्छर पैदा करने की फैक्ट्री - जानिए ब्राजील कैसे बना रहा है अच्छे मच्छर

Wolbito do Brasil:ब्राजील ने एक अनोखी पहल शुरू की है - हर हफ्ते करोड़ों मच्छर पैदा किए जा रहे हैं। सुनने में अजीब लगे, लेकिन इसका उद्देश्य बेहद महत्वपूर्ण है।

Update:2025-10-14 17:13 IST

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Wolbachia-infected mosquitoes:दुनिया में अक्सर ऐसी घटनाएँ होती हैं जो सुनने में अजीब और चौंकाने वाली लगती हैं। हाल ही में ब्राजील से एक खबर ने सभी को हैरान कर दिया है। दरअसल, ब्राजील ने एक अनोखी पहल शुरू की है, जिसके तहत हर हफ्ते लगभग 10 करोड़ मच्छर पैदा किए जा रहे हैं। यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन इसके पीछे वैज्ञानिक और पर्यावरणीय कारण हैं। आइए जानते हैं कि ब्राजील ऐसा क्यों कर रहा है और इसके पीछे की वैज्ञानिक सोच क्या है।

डेंगू, चिकनगुनिया और जीका से जंग

ब्राजील में डेंगू, चिकनगुनिया और जीका जैसी मच्छर जनित बीमारियों ने पिछले कुछ वर्षों में गंभीर रूप ले लिया है। इस समस्या से निपटने के लिए ब्राजील ने वोल्बाचिया बैक्टीरिया से संक्रमित मच्छरों की फैक्ट्री जैसी नई और अनूठी रणनीति अपनाई है। WHO के अनुसार 30 अप्रैल 2024 तक ब्राजील में 62,96,795 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए थे 6,297 लोगों की मौत हुई थी ।

ब्राजील की वैज्ञानिक सोच

ब्राजील ने मच्छरों से होने वाली बीमारियों जैसे डेंगू, जिका और चिकनगुनिया से लड़ने के लिए एक नई वैज्ञानिक योजना अपनाई है। इसके तहत ब्राजील के कुरितिबा शहर में दुनिया की सबसे बड़ी मच्छर बायो फैक्ट्री बनाई गई है, जो हर हफ्ते लगभग 10 करोड़ मच्छरों के अंडे पैदा करती है। ये मच्छर वोल्बाचिया नामक प्राकृतिक बैक्टीरिया से संक्रमित होते हैं, जिससे वे खतरनाक वायरस नहीं फैला पाते। इस योजना के जरिए ब्राजील लगभग 1.4 करोड़ लोगों को इन गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखने की उम्मीद कर रहा है।

मच्छरों की फैक्ट्री क्यों बनाई गई?

ब्राजील में डेंगू जैसी बीमारियों से हर साल हजारों लोग मर जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार ब्राजील में साल 2024 में ही डेंगू से 6,297 लोगों की मौत हुई, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। डेंगू को 'ब्रेक-बोन फीवर' भी कहा जाता है क्योंकि यह शरीर में बहुत तेज दर्द पैदा करता है, जैसे हड्डियां टूट रही हों। यह बीमारी एडिस एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलती है, जो गर्म और नम मौसम में तेजी से बढ़ते हैं। पारंपरिक तरीके जैसे कीटनाशक और पानी साफ करना अब इन मच्छरों को रोकने में कम असरदार साबित हुए हैं। इसलिए ब्राजील ने एक नया वैज्ञानिक तरीका अपनाया और वोल्बाचिया बैक्टीरिया से संक्रमित मच्छरों की फैक्ट्री बनाई, ताकि लोग इन बीमारियों से सुरक्षित रह सकें।

वोल्बाचिया बैक्टीरिया कैसे काम करता है?

वोल्बाचिया एक प्राकृतिक बैक्टीरिया है जो कई कीड़ों में पाया जाता है, लेकिन एडिस एजिप्टी मच्छरों में यह आम तौर पर नहीं होता। जब इसे मच्छरों में डाला जाता है तो यह मच्छरों के शरीर में डेंगू, जिका और चिकनगुनिया जैसे वायरस फैलने से रोक देता है। इसका मतलब है कि ऐसे मच्छर जब किसी इंसान को काटते हैं, तो वे बीमारी नहीं फैला पाते। यह तरीका पूरी तरह से सुरक्षित माना जाता है क्योंकि वोल्बाचिया इंसानों, जानवरों या अन्य जीवों के लिए हानिकारक नहीं है। इसलिए इसे एक जैविक और लंबे समय तक काम करने वाला समाधान माना जा रहा है।

फैक्ट्री कैसे काम करती है?


ब्राजील की यह फैक्ट्री 'वोल्बिटो दो ब्राजील' के नाम से जानी जाती है। यहां मच्छरों के अंडों को खास वातावरण में पाला जाता है। मादा मच्छरों को ज्यादा अंडे देने के लिए घोड़ों का खून भी पिलाया जाता है। जब मच्छर पूरी तरह से विकसित हो जाते हैं, तो उन्हें विशेष वाहनों से डेंगू ज्यादा होने वाले इलाकों में छोड़ा जाता है। ये 'अच्छे मच्छर' जंगली मच्छरों के साथ मिलकर प्रजनन करते हैं और वोल्बाचिया बैक्टीरिया को पूरी मच्छर आबादी में फैलाते हैं। इससे बीमारी फैलाने वाले मच्छरों की संख्या धीरे-धीरे कम हो जाती है। कोलंबिया, इंडोनेशिया और ब्राजील के कुछ अन्य शहरों में इस तकनीक को आजमाया गया है जहां डेंगू के मामलों में 69% तक की कमी देखी गई।

वोल्बाचिया बैक्टीरिया का महत्व

वोल्बाचिया एक प्राकृतिक बैक्टीरिया है जो तितलियों, मधुमक्खियों और भृंग जैसे कई कीड़ों में पाया जाता है। जब इसे मच्छरों में डाला जाता है तो यह डेंगू, जिका और चिकनगुनिया जैसे वायरस के फैलने को रोकता है। खासकर एडिस एजिप्टी मच्छरों में वोल्बाचिया वायरस की वृद्धि और प्रसार को रोकता है, जिससे ये मच्छर इंसानों को बीमार नहीं कर पाते। यह बैक्टीरिया मानव या अन्य जानवरों के लिए हानिकारक नहीं है इसलिए इसे पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित और भरोसेमंद तरीका माना जाता है।

परियोजना का समर्थन और लक्ष्य

यह परियोजना ब्राजील सरकार, विश्व मच्छर कार्यक्रम (World Mosquito Program), ऑस्वाल्डो क्रूज़ फाउंडेशन (Fiocruz) और पाराना आणविक जीवविज्ञान संस्थान (IBMP) के संयुक्त प्रयास से चल रही है। इसका मुख्य लक्ष्य हर 6 महीने में 70 लाख लोगों को मच्छर जनित बीमारियों से सुरक्षित रखना है और भविष्य में इसे बढ़ाकर 14 करोड़ लोगों तक सुरक्षा पहुँचाने की योजना है। इन सभी संस्थानों का काम फैक्ट्री के संचालन और कार्यक्रम के क्षेत्र विस्तार में मिलकर काम करना है।

भविष्य की योजना

ब्राजील के स्वास्थ्य मंत्रालय के सहयोग से चल रहे इस मच्छर कार्यक्रम में ऑस्वाल्डो क्रूज़ फाउंडेशन और पाराना के आणविक जीवविज्ञान संस्थान भी शामिल हैं। इस संयुक्त प्रयास का उद्देश्य है कि आने वाले वर्षों में देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसी फैक्ट्रियां बनाई जाएं। यह नया तरीका न सिर्फ ब्राजील के लिए बल्कि उन उष्णकटिबंधीय देशों के लिए भी उम्मीद की किरण है, जहां मच्छर जनित बीमारियां बड़ी समस्या हैं। ब्राजील का यह कदम दिखाता है कि प्रकृति के खिलाफ लड़ने की बजाय, उसके साथ मिलकर काम करने से भी बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों का हल निकाला जा सकता है।

क्या यह मॉडल अन्य देशों के लिए उपयुक्त है?

डेंगू, चिकनगुनिया और जीका जैसी बीमारियाँ भारत, थाईलैंड, फिलीपींस, इंडोनेशिया और कई अन्य देशों में बड़ी स्वास्थ्य चुनौती हैं। इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया में वोल्बाचिया से संक्रमित मच्छरों के प्रयोग से डेंगू के मामलों में 77% से 90% तक कमी देखी गई है। पारंपरिक उपायों की सीमित सफलता को देखते हुए यह तरीका अन्य देशों के लिए भी नया और प्रभावी उदाहरण बन सकता है। भारत में भी स्वास्थ्य विशेषज्ञ वोल्बाचिया तकनीक को संभावित समाधान मान रहे हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर इसे अभी लागू नहीं किया गया है।

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