Fighters Of India: महान क्रांतिकारी रास बिहारी बोस की जयंती विशेष: आजाद हिंद आंदोलन के प्रेरणास्रोत

Fighters Of India: महान क्रांतिकारी रास बिहारी बोस की जयंती पर विशेष लेख। उन्होंने गदर आंदोलन और आजाद हिंद फौज के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जीवन देशभक्ति और संघर्ष की प्रेरणा देता है।

Update:2026-05-25 16:04 IST

Fighters Of India: महान क्रांतिकारी, शिक्षाविद और स्वतंत्रता संग्राम के प्रेरक व्यक्तित्व रास बिहारी बोस का जन्म 25 मई 1886 को पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले के सुबालदह गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम विनोद बिहारी बोस था। बचपन में ही माता का निधन हो जाने के कारण उनका पालन-पोषण उनकी मामी ने किया। बचपन से ही उनमें देशभक्ति की भावना गहराई से विकसित हो चुकी थी और वे भारत की स्वतंत्रता का स्वप्न देखते थे।

प्रारंभिक शिक्षा और प्रेरणा

रास बिहारी बोस की प्रारंभिक शिक्षा चंदननगर में हुई और उन्होंने वहीं के डुप्लेक्स कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की। छात्र जीवन में ही वे क्रांतिकारी विचारों से प्रभावित हो गए थे। उनके शिक्षक चारुचंद्र से उन्हें देशभक्ति और स्वतंत्रता की प्रेरणा मिली, जिसने उनके जीवन की दिशा तय कर दी।

क्रांतिकारी जीवन की शुरुआत

शिक्षा पूरी करने के बाद वे देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान में हेड क्लर्क के रूप में कार्य करने लगे। यहीं से उनका संपर्क क्रांतिकारी अमरेंद्र चटर्जी से हुआ और वे “युगांतर” संगठन से जुड़ गए। इसके बाद उनका संपर्क जतिन मुखर्जी सहित कई प्रमुख क्रांतिकारियों से हुआ, जिससे उनके क्रांतिकारी जीवन को नई दिशा मिली।

1912 का दिल्ली षड्यंत्र

23 दिसंबर 1912 को दिल्ली में वायसराय लॉर्ड हार्डिंग की शोभायात्रा पर बम फेंकने की योजना में उनकी भूमिका रही। हालांकि वायसराय गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ, लेकिन इस घटना ने ब्रिटिश शासन को हिला दिया। इसके बाद वे पुलिस से बचते हुए लगातार भूमिगत गतिविधियों में सक्रिय रहे।

गदर योजना और सशस्त्र क्रांति

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान रास बिहारी बोस ने गदर आंदोलन और सशस्त्र क्रांति की योजना बनाई। उनका उद्देश्य था कि युद्ध के समय भारतीय सेना में विद्रोह कराकर ब्रिटिश शासन को कमजोर किया जाए। वाराणसी, लाहौर और अन्य स्थानों से उन्होंने गुप्त रूप से क्रांतिकारी गतिविधियों का संचालन किया।

जापान में प्रवास और आजाद हिंद की नींव

1915 में वे ब्रिटिश पुलिस से बचकर जापान चले गए। वहां उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन दिलाने का प्रयास किया। उन्होंने पत्रकारिता, लेखन और शिक्षा के क्षेत्र में कार्य किया और “न्यू एशिया” नामक समाचार पत्र भी शुरू किया। जापान में रहते हुए उन्होंने भारतीय क्रांतिकारियों को संगठित किया और आजाद हिंद आंदोलन की नींव मजबूत की। बाद में उन्होंने सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व को समर्थन देते हुए आजाद हिंद फौज की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सम्मान और अंतिम समय

रास बिहारी बोस ने जापान की नागरिकता भी प्राप्त की और वहीं रहकर भारत की स्वतंत्रता के लिए कार्य करते रहे। उन्हें जापान सरकार द्वारा “ऑर्डर ऑफ द राइजिंग सन” से सम्मानित किया गया। 21 जनवरी 1945 को वे इस संसार से विदा हो गए, लेकिन भारत की स्वतंत्रता के लिए उनका योगदान अमर बना रहा।

निष्कर्ष

रास बिहारी बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन महान नायकों में से एक हैं, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उनका जीवन आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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