वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की बढ़ती सक्रियता, भारत के लिए नई चुनौती
ईरान-अमेरिका वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका और वैश्विक समर्थन से भारत की चिंता बढ़ी, संतुलन बनाने के लिए भारत रक्षा और कूटनीति दोनों मोर्चों पर सक्रिय
Pakistan’s Rising Global Role Raises Strategic Concerns for India (Social Media).jpg
इजराइल, ट्रम्प और ईरान के युद्ध में जिस प्रकार ट्रम्प और ईरान ने पाकिस्तान को समझौता कराने हेतु मध्यस्थता करने की सहमति प्रदान की है, उससे स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनके फील्ड मार्शल असीम मुनीर की लोकप्रियता विश्व में उच्च स्थान पर पहुँच चुकी है। आज यदि हम निष्पक्ष रूप से देखे तो विश्व की तीन महाशक्ति - रूस, चीन और अमेरिका में से चीन और अमेरिका, पाकिस्तान के साथ पूर्ण रूप से गठबंधन बनाए हुए हैं तथा रूस भी चीन से निकटता के कारण पाकिस्तान के साथ मित्रवत व्यवहार कर रहा है। यद्यपि पाकिस्तान की मध्यस्थता से, समझौता वार्ता का सफल अथवा असफल होना एक पृथक विषय है, परन्तु समझौता वार्ता का भारत को छोड़कर पाकिस्तान में होना भारत के लिए चिंता का विषय हैं। पाकिस्तान को इस समझौते का मुखिया बनाने में ईरान, अमेरिका और चीन ने अपनी सहमति प्रदान की है। चीन इस शांतिवार्ता के दौरान लगातार संचार माध्यमों से सम्पर्क करते हुए, पाकिस्तान और ईरान को निर्देशित करता रहा। तात्पर्य यह है कि चीन प्रत्यक्ष रूप से वार्ता का प्रतिभागी न होकर अपत्यक्ष रूप से पूर्णतया अपनी भूमिका का निर्वाह कर रहा था।
7 मई 2025 के चार दिवसीय आपरेशन सिंदूर युद्ध में भी यह स्पष्ट हो गया था कि चीन ने पाकिस्तान को सेटेलाईट एवं विभिन्न शस्त्रों के द्वारा पूर्ण रूप से सहायता प्रदान की थी तथा ईरान को छोड़कर सम्पूर्ण अरब देश और अमेरिका भी पाकिस्तान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। तुर्की और अजरबैजान ने तो अपने शस्त्र भेजकर पहले ही दिन यह स्पष्ट कर दिया था कि वो पाकिस्तान के समर्थन में हैं। आज यदि हम सम्पूर्ण विश्व के देशों में पाकिस्तान के समर्थक देशों पर दृष्टिपात करें तो स्पष्ट होता है कि चीन, अमेरिका जैसी दो महाशक्तियों के साथ-साथ सम्पूर्ण अरब देश भी पाकिस्तान के पूर्ण समर्थन में दिखाई देते हैं।
हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी ने उपरोक्त स्थिति का गम्भीरता से आंकलन करने पश्चात, इसके समाधान हेतु फ्रांस से 114 राफेल खरीदने की पहल की, जिसके अन्तर्गत महत्वपूर्ण निर्णय यह लिया कि अधिकांश विमान, भारत में ही असेम्बल होगे। भारत के इस दृष्टिकोण से स्पष्ट होता है कि भारत, विश्व में एक संतुलन बनाए रखने हेतु तथा पाकिस्तान के आगामी खतरे से जागरूक होकर, स्वयं को सुदृण कर रहा है जिससे भविष्य में कभी चीन और पाकिस्तान का भारत से युद्ध हो तो, भारत उपरोक्त दोनों देशों को उन्हीं की भाषा में प्रत्युत्तर देने में समर्थ हो सके। इसी के साथ-साथ भारत का यह भी प्रयास है कि उसके रूस से संबंध पुनः सुदृण हो सकें क्योंकि रूस ने अपनी मित्रता को अनेकों बार कठिन समय में भी सिद्ध किया है। वास्तविकता यह है कि मीडिल ईस्ट युद्ध के दौरान अथवा उसके पश्चात भी रूस ही एक ऐसा समर्थ देश है जो भारत की तेल की मांग की पूर्ति कर सकता है।