EV Car Sales India May 2026: EV खरीदने वालों की लगी कतार! मई 2026 में बिक्री ने बनाया नया बेंचमार्क

EV Car Sales India May 2026: पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार के बीच भारत में EV बिक्री ने मई 2026 में नया रिकॉर्ड बनाया है

Update:2026-06-02 13:26 IST

EV Car Sales India May 2026

EV Car Sales India May 2026: दशकों से डीजल-पैट्रोल पर निर्भर रही ऑटो इंडस्ट्री एक बड़े बदलाव की ओर तेजी से आगे बढ़ रही है। इस बदलाव का मुख्य केंद्र बने इलेक्ट्रिक वाहन अब ग्राहकों को रिझाने में कामयाब होने लगे हैं। यही वजह है कि भारत में बिक्री के मामले में इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार अब पहले से कहीं ज्यादा तेज हो गई है। पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों, चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार और सरकार के प्रोत्साहन का असर अब साफ तौर पर बाजार में दिखाई देने लगा है। मई 2026 में देश में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री ने नया रिकॉर्ड बनाया है। खास बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल के महीनों में लोगों से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की अपील की थी, जिसके बाद ईवी को लेकर जागरूकता और रुचि दोनों बढ़ी हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक मई में बिकने वाली हर 100 कारों में करीब 7 कारें इलेक्ट्रिक थीं। जिसे भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

मई में टूटा इलेक्ट्रिक कार बिक्री का रिकॉर्ड

तेजी पकड़ती डीजल पेट्रोल और सीएनजी की कीमतों को देखकर ग्राहकों को अब इलेक्ट्रिक वाहन कहीं अधिक मुफीद लगने लगे हैं। ऑटो सेक्टर से जुड़े आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में देशभर में कुल 3,17,354 यात्री वाहन बिके। इनमें 21,953 इलेक्ट्रिक कारें शामिल रहीं। यानी कुल कार बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 6.9 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो लगभग 7 प्रतिशत के बराबर है।

यह आंकड़ा पिछले एक साल के दौरान दर्ज की गई सबसे ऊंची हिस्सेदारी मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक अस्थायी उछाल नहीं बल्कि भारतीय बाजार में तेजी से बदलती उपभोक्ता पसंद का संकेत है।

साल की शुरुआत से लगातार बढ़ रही हिस्सेदारी

अगर 2026 की शुरुआत से तुलना करें तो तस्वीर और भी दिलचस्प नजर आती है। जनवरी में कुल कार बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी 4.1 प्रतिशत थी, जबकि फरवरी में यह 4.2 प्रतिशत रही। सिर्फ तीन महीने के भीतर यह बढ़कर 6.9 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर लोगों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। पहले जहां ग्राहक बैटरी, चार्जिंग और रेंज को लेकर संकोच करते थे, वहीं अब ये चिंताएं धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं।

सुविधाओं के आकर्षण से एक साल में आया बड़ा बदलाव

मई 2025 में कुल कार बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 4.7 प्रतिशत थी। वहीं मई 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 6.9 प्रतिशत हो गया। यानी एक साल के भीतर ईवी मार्केट शेयर में लगभग 47 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

ऑटो उद्योग के जानकार मानते हैं कि यह बदलाव केवल पर्यावरणीय जागरूकता की वजह से नहीं आया है। बढ़ती ईंधन लागत, कम परिचालन खर्च और नई तकनीक से लैस आधुनिक इलेक्ट्रिक कारों ने भी ग्राहकों को आकर्षित किया है।

पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम बन रहे बड़ी वजह

पिछले कुछ वर्षों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। कई शहरों में पेट्रोल की कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर के आसपास या उससे ऊपर बनी हुई हैं।

ऐसे में वाहन मालिकों के लिए रोजमर्रा का खर्च बढ़ गया है। दूसरी तरफ इलेक्ट्रिक वाहन चलाने की लागत पारंपरिक ईंधन वाहनों की तुलना में काफी कम पड़ती है। यही वजह है कि अब बड़ी संख्या में लोग अपनी अगली कार के रूप में ईवी पर विचार कर रहे हैं।

चार्जिंग स्टेशन बढ़ने से बढ़ा भरोसा

बैटरी की बढ़ती गुणवत्ता और चार्जिंग स्टेशनों की बढ़ती संख्या इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में तेजी लाने के पीछे बड़ी वजह रही है। कुछ साल पहले तक इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों की सबसे बड़ी चिंता चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर होती थी। लेकिन अब देशभर में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

राष्ट्रीय राजमार्गों, मेट्रो शहरों, मॉल, ऑफिस कॉम्प्लेक्स और आवासीय परियोजनाओं में चार्जिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे लंबी दूरी की यात्रा और रोजमर्रा के उपयोग दोनों के लिए ईवी ज्यादा सुविधाजनक बनते जा रहे हैं।

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स ने भी दिखाई दमदार रफ्तार

ईवी क्रांति सिर्फ कारों तक सीमित नहीं है। दो-पहिया वाहन बाजार में भी इलेक्ट्रिक मॉडल तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

मई 2026 में देशभर में 16 लाख से अधिक टू-व्हीलर्स की बिक्री हुई। इनमें करीब 1.44 लाख इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक शामिल रहे। इस तरह इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट की हिस्सेदारी 8.9 प्रतिशत तक पहुंच गई।

जनवरी 2026 में यह हिस्सा 6.7 प्रतिशत था। यानी सिर्फ कुछ महीनों में ही इलेक्ट्रिक दो-पहिया वाहनों की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली है।

सरकारी नीतियां और नई तकनीक दे रही रफ्तार

केंद्र और राज्य सरकारें लंबे समय से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने पर जोर दे रही हैं। विभिन्न राज्यों में रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। इसके अलावा वाहन निर्माता कंपनियां भी बेहतर बैटरी तकनीक, लंबी ड्राइविंग रेंज और तेज चार्जिंग विकल्पों वाले नए मॉडल बाजार में उतार रही हैं। इसी का परिणाम है कि इलेक्ट्रिक वाहन अब केवल भविष्य की तकनीक नहीं बल्कि आम ग्राहकों की पसंद बनते जा रहे हैं।

क्या आने वाले महीनों में और बढ़ेगी EV की हिस्सेदारी?

ऑटो उद्योग के जानकारों का मानना है कि यदि चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार इसी गति से जारी रहा और ईंधन की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले महीनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी और बढ़ सकती है। मई 2026 के आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि भारत का ऑटोमोबाइल बाजार धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों को पूरी तरह से अपनाने की ओर बढ़ रहा है।

ज्योत्सना सिंह

02.06.2026

शब्द 926

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