आस्था वही, तरीका नया.. कैलास मानसरोवर में अब डुबकी नहीं, बाल्टी से स्नान कर रहे श्रद्धालु
Kailash Mansarovar Yatra 2026: अब झील में डुबकी नहीं! जानें क्यों बाल्टी से स्नान कर रहे हैं श्रद्धालु
Kailash Mansarovar Yatra 2026
Kailash Mansarovar Yatra 2026: अपार श्रद्धा और उत्साल से आरम्भ हुई कैलास मानसरोवर यात्रा से लौट रहे श्रद्धालु इस बार एक अलग अनुभव साझा कर रहे हैं। जहां वर्षों से श्रद्धालु मानसरोवर झील में पवित्र डुबकी लगाकर स्नान करते थे, वहीं अब उन्हें झील में उतरने की अनुमति नहीं है। चीन ने पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर झील में स्नान पर रोक लगा रखी है। ऐसे में श्रद्धालु झील से एक-एक बाल्टी पानी निकालकर किनारे से कुछ दूरी पर स्नान कर रहे हैं। आस्था पहले जैसी ही है, लेकिन पूजा और स्नान की परंपरा का तरीका बदल गया है।
मानसरोवर में डुबकी नहीं, अब बाल्टी से स्नान कर रहे श्रद्धालु
30 जून से शुरू हुई इस वर्ष की कैलास मानसरोवर यात्रा के दो दल अब तक अपनी यात्रा पूरी कर चुके हैं। लौटे यात्रियों ने बताया कि मानसरोवर झील में किसी भी श्रद्धालु को उतरने या डुबकी लगाने की अनुमति नहीं दी गई। सभी यात्रियों को झील से एक-एक बाल्टी पानी निकालकर कुछ मीटर दूर स्नान करना पड़ा।
श्रद्धालुओं का कहना है कि नियम बदलने के बावजूद उनकी आस्था में कोई कमी नहीं आई। उनके लिए मानसरोवर का जल आज भी उतना ही पवित्र है, जितना पहले था। फर्क सिर्फ इतना है कि अब स्नान का तरीका बदल गया है।
चीन ने झील में स्नान पर क्यों लगाई रोक?
मानसरोवर झील तिब्बत में समुद्र तल से लगभग 4,590 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह दुनिया की सबसे पवित्र झीलों में गिनी जाती है। हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन धर्म के अनुयायियों के लिए इसका विशेष धार्मिक महत्व है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा इलाका अत्यंत संवेदनशील पारिस्थितिकी क्षेत्र (इको-सेंसिटिव जोन) में आता है। बड़ी संख्या में लोगों के झील में उतरकर स्नान करने से पानी की शुद्धता और स्थानीय पर्यावरण पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से चीन ने वर्ष 2018 से मानसरोवर झील में सीधे स्नान और डुबकी लगाने पर रोक लागू कर दी थी। इसके बाद से यात्रियों को झील के पानी का उपयोग किनारे पर ही करने की अनुमति दी जाती है।
विदेश मंत्रालय ने यात्रियों के लिए जारी की खास गाइडलाइन
कैलास मानसरोवर यात्रा शुरू होने से पहले विदेश मंत्रालय ने यात्रियों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की थी। इसके अनुसार प्रत्येक यात्री अधिकतम 20 किलोग्राम व्यक्तिगत सामान ले जा सकता है। इसके अलावा प्रत्येक बैच के लिए 5 किलोग्राम अतिरिक्त सामूहिक सामान ले जाने की अनुमति दी गई है। जिसका उपयोग चीन की ओर भोजन और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाने के लिए किया जाता है। यदि कोई यात्री निर्धारित सीमा से अधिक सामान लेकर जाता है तो उसे अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है। यात्रियों को ऊंचाई वाले क्षेत्र में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए जरूरी दवाएं, गर्म कपड़े और मेडिकल किट साथ रखने की भी सलाह दी गई है।
यात्रा मार्ग पर भूस्खलन से बढ़ी मुश्किलें
इधर उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग पर भीषण भूस्खलन की घटना भी सामने आई। धारचूला-तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग पर तवाघाट के पास पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा अचानक सड़क पर आ गिरा। सौभाग्य से उस समय वहां से कोई वाहन या यात्री नहीं गुजर रहा था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। भूस्खलन के कारण सड़क पूरी तरह बंद हो गई और उच्च हिमालय की तीनों घाटियों का संपर्क कुछ समय के लिए कट गया। प्रशासन और सड़क निर्माण एजेंसियों ने तुरंत राहत कार्य शुरू कर मलबा हटाने का अभियान चलाया। तिनतोला क्षेत्र में भी भूस्खलन की सूचना मिली।
इस बार बर्फ से ढका दिखा कैलास पर्वत, श्रद्धालु हुए भावुक
इस वर्ष यात्रा से लौटे श्रद्धालुओं ने एक और सुखद बदलाव देखा। पिछले साल जुलाई में कैलास पर्वत का दक्षिणी हिस्सा काफी हद तक बर्फ से खाली दिखाई दिया था। लेकिन इस बार पूरा पर्वत चमकती सफेद बर्फ की चादर से ढका नजर आया।
यात्रियों ने इसे अद्भुत और आध्यात्मिक अनुभव बताया। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई जैसे अपेक्षाकृत गर्म महीने में कैलास पर्वत पर पर्याप्त बर्फ का बने रहना उच्च हिमालयी पर्यावरण के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। हालिया हिमपात से ग्लेशियरों को भी मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।
यात्रा के दौरान सर्विस स्टाफ की मौत
यात्रा के दूसरे दल के साथ गए 37 वर्षीय सर्विस स्टाफ जीवन राम की चीन के अधीन क्षेत्र में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। वह उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के जैंती गांव के रहने वाले थे और संविदा पर कुक के रूप में तैनात थे। उन्हें यात्रा के दौरान जल और भोजन संबंधी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी दी गई थी।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई है। प्रशासन शव को भारत लाने की प्रक्रिया पूरी कर रहा है।
क्यों खास है कैलास मानसरोवर यात्रा?
कैलास पर्वत को भगवान शिव का निवास माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मानसरोवर झील में स्नान और कैलास पर्वत की परिक्रमा करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और आध्यात्मिक शांति मिलती है।
करीब 4,500 मीटर से अधिक ऊंचाई पर होने के कारण यह यात्रा शारीरिक रूप से बेहद कठिन मानी जाती है। कम ऑक्सीजन, बदलता मौसम और कठिन पहाड़ी रास्ते यात्रियों की परीक्षा लेते हैं। इसी वजह से यात्रा से पहले स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य किया जाता है और सीमित संख्या में ही श्रद्धालुओं को अनुमति दी जाती है।