Kukrail Night Safari: सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी, लखनऊ को मिलेगी नई पहचान
Kukrail Night Safari Lucknow: कुकरैल नाइट सफारी को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी, लखनऊ बनेगा भारत का पहला नाइट सफारी हब
Kukrail Night Safari Lucknow Approved 2026
Kukrail Night Safari Lucknow: अगर आप नाइट सफारी के शौकीन हैं तो अब आपको इसके लिए सिंगापुर, थाईलैंड, चीन और इंडोनेशिया जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसी के साथ अगर आप लखनऊ में रहते हैं तो आपके लिए एक बड़ी ही खुशखबरी सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लंबे समय से चर्चा में रही कुकरैल नाइट सफारी परियोजना को आखिरकार सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की अंतिम कानूनी बाधा भी दूर हो गई है। करीब 1510 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह नाइट सफारी देश की पहली और दुनिया की पांचवीं नाइट सफारी होगी। हालांकि, कोर्ट ने इसे केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) की सिफारिशों और सख्त पर्यावरणीय शर्तों के साथ मंजूरी दी है। अब उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में निर्माण कार्य शुरू होगा और करीब दो वर्षों में यह परियोजना आकार ले लेगी।
सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद खुला निर्माण का रास्ता
कुकरैल क्षेत्र आरक्षित वन होने के कारण यहां किसी भी बड़े निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति जरूरी थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले वर्ष कोर्ट में अंतरिम आवेदन दाखिल कर परियोजना के लिए अनुमति मांगी थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) से कराने के निर्देश दिए।
CEC ने विस्तृत अध्ययन के बाद परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी, लेकिन कई अहम शर्तें भी जोड़ीं। अब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हीं शर्तों को लागू करने के निर्देश देते हुए परियोजना को हरी झंडी दे दी है।
देश की पहली और दुनिया की पांचवीं नाइट सफारी बनेगी
भारत में अब तक किसी भी राज्य में नाइट सफारी नहीं है। लखनऊ की यह परियोजना पूरी होने के बाद देश की पहली नाइट सफारी बन जाएगी। दुनिया में फिलहाल सिंगापुर, थाईलैंड, चीन और इंडोनेशिया में ऐसी नाइट सफारी संचालित हो रही हैं। नाइट सफारी की खासियत यह होती है कि यहां रात में सक्रिय रहने वाले वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक व्यवहार के करीब से देखने का अवसर मिलता है। इसके लिए सामान्य चिड़ियाघरों की तुलना में विशेष प्रकाश व्यवस्था और शांत वातावरण तैयार किया जाता है, ताकि जानवरों को किसी तरह की परेशानी न हो।
क्या है कुकरैल नाइट सफारी परियोजना?
यह परियोजना करीब 900 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी। कुल लागत 1510 करोड़ रुपये तय की गई है। निर्माण कार्य दो चरणों में पूरा होगा। पहले चरण में लगभग 631 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
परियोजना का उद्देश्य केवल पर्यटन बढ़ाना नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा और इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा देना है। सरकार का मानना है कि इसके बनने से लखनऊ अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान हासिल करेगा।
CEC की शर्तों के साथ ही होगा पूरा निर्माण
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि परियोजना केवल CEC की सिफारिशों के अनुसार ही विकसित होगी। इसके तहत कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
सबसे बड़ा फैसला यह है कि प्रस्तावित एडवेंचर जोन नहीं बनाया जाएगा, ताकि वन क्षेत्र पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। पहले प्रस्तावित चार लेन सड़क की जगह अब केवल दो लेन सड़क बनेगी। इसके अलावा नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान (लखनऊ चिड़ियाघर) को कुकरैल स्थानांतरित करने की योजना भी पूरी तरह समाप्त कर दी गई है।
पर्यावरण संरक्षण रहेगा सबसे बड़ी प्राथमिकता
इस परियोजना में पर्यावरण सुरक्षा को सबसे अधिक महत्व दिया गया है। इसके लिए एक विशेष निगरानी समिति बनाई जाएगी, जो हर महीने निरीक्षण करेगी और प्रत्येक तीन महीने में राज्य सरकार, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) तथा CEC को रिपोर्ट सौंपेगी।
निर्माण के दौरान कम से कम पेड़ों की कटाई होगी और उसके बदले बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा। प्राकृतिक नालों, जलधाराओं और आर्द्रभूमि से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। साथ ही पूरी नाइट सफारी में लो-इंटेंसिटी और एनिमल-फ्रेंडली लाइटिंग का उपयोग होगा। तेज रोशनी, अत्यधिक शोर और अनियंत्रित वाहनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक रहेगी। पर्यटकों के प्रवेश का समय भी सीमित रखा जाएगा ताकि वन्यजीवों की दिनचर्या प्रभावित न हो।
पर्यटकों के लिए क्या होंगी खास सुविधाएं?
कुकरैल नाइट सफारी को आधुनिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां करीब 5.5 किलोमीटर लंबा ट्रामवे बनाया जाएगा। जिससे पर्यटक सुरक्षित तरीके से जंगल का भ्रमण कर सकेंगे। इसके अलावा 1.92 किलोमीटर लंबा वॉकिंग पाथवे भी विकसित किया जाएगा।
परिसर में कैफेटेरिया, 7डी थिएटर, ऑडिटोरियम, पार्किंग, विजिटर सेंटर और अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। परियोजना में सौर ऊर्जा का उपयोग भी किया जाएगा। जिससे इसे पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सके।
कौन-कौन से वन्यजीव होंगे मुख्य आकर्षण?
नाइट सफारी में कई दुर्लभ और आकर्षक वन्यजीवों को रखा जाएगा। इनमें एशियाटिक लायन, बंगाल टाइगर, तेंदुआ, हायना, घड़ियाल और उड़न गिलहरी प्रमुख आकर्षण होंगे।
इनके लिए प्राकृतिक आवास जैसी परिस्थितियां तैयार की जाएंगी। जिससे पर्यटक वन्यजीवों के व्यवहार को अधिक स्वाभाविक रूप में देख सकें।
परियोजना की मंजूरी तक का सफर
कुकरैल नाइट सफारी का प्रस्ताव कई वर्षों से चर्चा में था। अगस्त 2022 में उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने इसे सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इसके बाद फरवरी 2025 में व्यय वित्त समिति ने 1510 करोड़ रुपये की परियोजना को वित्तीय स्वीकृति दी। इस दौरान केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) सहित अन्य आवश्यक संस्थाओं से भी मंजूरी मिल चुकी थी। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में चल रहे मामले में भी सरकार के पक्ष में फैसला आया। अब सुप्रीम कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद निर्माण शुरू होने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
लखनऊ और उत्तर प्रदेश को क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि कुकरैल नाइट सफारी बनने के बाद लखनऊ केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शहर ही नहीं, बल्कि वन्यजीव पर्यटन का भी बड़ा केंद्र बन जाएगा। इससे घरेलू और विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना है। होटल, परिवहन, स्थानीय कारोबार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। देश की पहली नाइट सफारी के रूप में कुकरैल न केवल लखनऊ की नई पहचान बनने जा रहा है बल्कि भारत में इको-टूरिज्म और वन्यजीव संरक्षण का भी एक नया मॉडल पेश करेगा।