Auraiya News: अखिल राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने टीईटी से शिक्षकों के हितों की रक्षा की उठाई मांग
Auraiya News: औरैया में अखिल राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने टीईटी लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के हितों की रक्षा की मांग उठाई। संगठन ने सरकार से शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, अधिकारों के संरक्षण और लंबित समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।
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Auraiya News: औरैया में अखिल राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर वर्ष 2010 से पूर्व तथा उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के हितों की रक्षा की मांग की है। संगठन ने कहा कि इन शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय लागू नियमों, योग्यता मानकों और चयन प्रक्रिया के अनुरूप हुई थीं, इसलिए बाद में लागू किए गए मानकों को पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू करना न्यायसंगत नहीं है।
ज्ञापन में 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा जारी शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) संबंधी अधिसूचना का उल्लेख किया गया है। साथ ही शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम की धारा 23(2) में 9 अगस्त 2017 को किए गए संशोधन तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1 सितंबर 2025 और पुनर्विचार याचिका में 29 मई 2026 को दिए गए निर्णयों के बाद उत्पन्न परिस्थितियों पर भी चिंता व्यक्त की गई है।
महासंघ का कहना है कि देश के विभिन्न राज्यों में वर्ष 2010 से पूर्व तथा उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षक पूरी तरह वैध प्रक्रिया के तहत चयनित हुए थे। इन शिक्षकों ने वर्षों तक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में उनके रोजगार, सेवा सुरक्षा और भविष्य को लेकर किसी भी प्रकार की अनिश्चितता उचित नहीं मानी जा सकती।
संगठन ने चेतावनी देते हुए कहा कि बाद में लागू किए गए पात्रता मानदंडों को पूर्व प्रभाव से लागू करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। यदि ऐसा किया जाता है तो लाखों शिक्षकों और उनके परिवारों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे न केवल शिक्षकों का मनोबल प्रभावित होगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता पर भी असर पड़ने की आशंका है।
महासंघ ने केंद्र सरकार से मांग की है कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व तथा उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए। इसके अलावा उनकी सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य वैधानिक अधिकारों का पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। संगठन ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर शिक्षकों में व्याप्त असमंजस और असुरक्षा की स्थिति समाप्त करने की भी अपील की है। ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।