Ayodhya News: दीक्षांत में राज्यपाल ने खोली हॉस्टलों की पोल, बोलीं-मुझे पता है किसान भवन की रसोई में बनता है नॉनवेज
Ayodhya News: आचार्य नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने छात्रावासों की रसोई, वाई-फाई और अन्य सुविधाओं पर सवाल उठाए। 24 मेधावियों को स्वर्ण पदक और 774 विद्यार्थियों को उपाधियां मिलीं।
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अयोध्या। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने एक बार फिर दीक्षांत समारोह को विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं की समीक्षा का मंच बना दिया। आचार्य नरेंद्रदेव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में सोमवार को उन्होंने पहले मेधावियों को सम्मानित किया, विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना की और फिर छात्रावासों की व्यवस्था पर सवालों की झड़ी लगा दी। उन्होंने कहा कि एक छात्रावास को छोड़कर बाकी छात्रावासों की रसोई बहुत गंदी है। किसान भवन की रसोई का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “वहां नॉनवेज बनता है, मुझे सब पता है। यह ठीक नहीं है।”
राज्यपाल की टिप्पणी इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि उन्होंने ये सवाल अपने औपचारिक भाषण के बीच नहीं उठाए। भाषण समाप्त करने के बाद भी वह मंच से नहीं हटीं। उन्होंने अपने पास रखा एक कागज निकाला और विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं के बारे में मिली जानकारियां एक-एक करके पढ़नी शुरू कर दीं। इसके बाद छात्रावासों की रसोई से लेकर वाई-फाई तक पर विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगा।
छात्रों से सीधे पूछा-हॉस्टल में वाई-फाई मिलता है? जवाब आया-नहीं
राज्यपाल ने समारोह में मौजूद विद्यार्थियों से सीधे पूछा कि क्या उनके छात्रावासों में वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध है। विद्यार्थियों की तरफ से जवाब आया—नहीं। इसके बाद राज्यपाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर देखते हुए सवाल किया कि जब वाई-फाई के लिए अनुदान आता है तो छात्रावासों में इसकी सुविधा क्यों नहीं दी गई?
उनका यह सवाल केवल इंटरनेट सुविधा तक सीमित नहीं था। उच्च शिक्षा में पढ़ाई, शोध, डिजिटल पुस्तकालय, ऑनलाइन जर्नल और शैक्षणिक सामग्री तक पहुंच के लिए इंटरनेट अब बुनियादी आवश्यकता बन चुका है। ऐसे में कृषि विश्वविद्यालय जैसे उच्च शिक्षण संस्थान के छात्रावासों में वाई-फाई उपलब्ध नहीं होना कुलाधिपति की नाराजगी का कारण बना।
‘एक हॉस्टल छोड़कर सभी की रसोई गंदी’
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के छात्रावासों की मेस व्यवस्था पर भी कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि एक छात्रावास को छोड़कर बाकी सभी छात्रावासों की रसोई की स्थिति बहुत खराब है और इसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है।किसान भवन की रसोई का अलग से उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें वहां नॉनवेज बनाए जाने की जानकारी है और इसे उन्होंने अनुचित बताया। राज्यपाल के इस बयान के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने अब छात्रावासों की रसोई, खाद्य सामग्री, स्वच्छता और मेस संचालन की व्यवस्था की समीक्षा का दबाव बढ़ना तय है।
सिर्फ नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय नहीं, लगातार हॉस्टलों की जांच करा रहीं राज्यपाल
यह पहला अवसर नहीं है जब राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किसी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्रावास और मेस की व्यवस्था पर सवाल उठाए हों। हाल के दीक्षांत समारोहों में उनकी कार्यशैली का एक स्पष्ट पैटर्न दिखाई दिया है। समारोह से पहले विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी जुटाई जाती है और फिर राज्यपाल सार्वजनिक मंच से मिली कमियों का उल्लेख करती हैं।
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में भी उन्होंने छात्रावासों की मेस और साफ-सफाई को लेकर नाराजगी जताई थी। वहां उन्होंने लड़कों के छात्रावास में नियमित मेस नहीं होने और बाहर से टिफिन आने की व्यवस्था पर सवाल उठाया था। उन्होंने आशंका जताई थी कि इस तरह की अनियंत्रित व्यवस्था छात्रावासों की सुरक्षा के लिए भी समस्या बन सकती है और विश्वविद्यालय प्रशासन को व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए थे।
लखनऊ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भी छात्रावासों की स्थिति उनकी समीक्षा के केंद्र में रही थी। उन्होंने वाई-फाई, शुद्ध पेयजल, कमरों के रखरखाव और मेस में इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री को लेकर सवाल उठाए थे। दूध और पनीर जैसे उत्पाद विश्वसनीय कंपनियों से खरीदने की जरूरत बताने के साथ परिसर के कुछ हिस्सों में साफ-सफाई की स्थिति पर भी नाराजगी जाहिर की थी।
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) में राज्यपाल की जांच और अधिक सख्त दिखाई दी थी। वहां छात्रावास की मेस में एक्सपायर्ड मसाला मिलने और भोजन की गुणवत्ता को लेकर उन्होंने सवाल उठाए थे। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को मेस व्यवस्था की निगरानी मजबूत करनी पड़ी और विशेष व्यवस्था बनाई गई।
इसी तरह महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में भी छात्रावासों की मेस बंद होने, विद्यार्थियों के भोजन, वाई-फाई और साफ-सफाई जैसी समस्याओं पर राज्यपाल ने नाराजगी जताई थी। उन्होंने विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों की डिग्रियां डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया है।
इस तरह आचार्य नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय में की गई टिप्पणी को अलग घटना के बजाय राज्यपाल द्वारा प्रदेश के विश्वविद्यालयों में छात्र सुविधाओं की लगातार की जा रही समीक्षा की अगली कड़ी माना जा सकता है।
24 मेधावियों को स्वर्ण पदक, 774 विद्यार्थियों को उपाधियां
कमियों पर नाराजगी के बीच राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की प्रशंसा भी की। समारोह में विभिन्न विषयों में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले 24 मेधावियों को कुलाधिपति, कुलपति तथा अन्य विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। कुल 774 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं।
राज्यपाल ने डिजिलॉकर के माध्यम से उपाधियों को अपलोड किया और उम्मीद जताई कि विद्यार्थी डिजिटल माध्यम से अपनी डिग्री प्राप्त करने की व्यवस्था का पूरा लाभ उठाएंगे। समारोह में प्रगतिशील किसानों और उत्कृष्ट शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया। पशुपालन से संबंधित एक एप भी लॉन्च किया गया।
स्वर्ण पदकों में बेटियां आगे, कृषि की पढ़ाई में संख्या कम
समारोह में राज्यपाल ने छात्राओं के प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए एक विरोधाभास की तरफ भी ध्यान खींचा। 24 स्वर्ण पदकों में से 13 बेटियों ने हासिल किए, यानी पदक जीतने के मामले में छात्राएं छात्रों से आगे रहीं। लेकिन कृषि शिक्षा में छात्राओं की कुल भागीदारी को लेकर तस्वीर उतनी उत्साहजनक नहीं दिखाई दी। 774 उपाधियों में केवल 190 छात्राओं को मिलीं। यानी कुल उपाधि पाने वालों में छात्राओं की हिस्सेदारी लगभग एक-चौथाई रही। राज्यपाल ने इस अंतर पर चिंता जताई। उनका संकेत था कि जब छात्राएं अकादमिक प्रदर्शन में आगे निकल सकती हैं तो कृषि शिक्षा में उनकी भागीदारी भी बढ़नी चाहिए।
कमियां गिनाईं तो अच्छाइयों की भी तारीफ
राज्यपाल ने केवल आलोचना नहीं की। विश्वविद्यालय में खेलकूद की व्यवस्था, परिसर की साफ-सफाई और हरित वातावरण की उन्होंने प्रशंसा भी की। उन्होंने कहा कि दूसरे कृषि विश्वविद्यालयों को भी यहां की अच्छी व्यवस्थाओं से सीखना चाहिए।
इससे उनका संदेश साफ दिखाई दिया कि विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन केवल डिग्री, पदक और शैक्षणिक उपलब्धियों के आधार पर नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों को हॉस्टल में कैसा भोजन मिल रहा है, रसोई कितनी साफ है, इंटरनेट उपलब्ध है या नहीं, पेयजल और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति कैसी है—ये भी उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के महत्वपूर्ण पैमाने हैं।
दीक्षांत अब विश्वविद्यालय प्रशासन की भी ‘परीक्षा’
प्रदेश में हाल के दीक्षांत समारोहों को देखें तो राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की मौजूदगी विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए केवल औपचारिक आयोजन नहीं रह गई है। वह छात्रावास, मेस, स्वच्छता, पेयजल, इंटरनेट, डिजिटल डिग्री और विद्यार्थियों की रोजमर्रा की सुविधाओं तक की जानकारी लेकर पहुंच रही हैं। गोरखपुर विश्वविद्यालय से लखनऊ विश्वविद्यालय, KGMU और काशी विद्यापीठ के बाद अब आचार्य नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय में भी लगभग वही तस्वीर सामने आई है। फर्क इतना है कि इस बार उन्होंने मंच से साफ कहा—“मुझे सब पता है।”
यह एक वाक्य विश्वविद्यालयों के लिए बड़ा संदेश भी है। दीक्षांत समारोह में चमकता मंच, पदक और डिग्रियां अपनी जगह हैं, लेकिन कुलाधिपति की नजर अब उस छात्रावास की रसोई तक भी पहुंच रही है, जहां विद्यार्थी रोज खाना खाते हैं।