Chandauli News: यूपी से बिहार भेजी जा रही तेंदू पत्ती,वन विभाग की लापरवाही से सरकार को लाखों का चूना
चंदौली के नौगढ़ क्षेत्र से तेंदू पत्ती की अवैध तस्करी बिहार भेजी जा रही है। वन विभाग और वन निगम की लापरवाही से सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, जबकि वैध ठेकेदारों में भारी नाराजगी है।
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Chandauli News: उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में इन दिनों तेंदू पत्ते की तस्करी का एक बड़ा मामला सामने आया है। नौगढ़ तहसील क्षेत्र में वर्तमान में तेंदू पत्ती का तुड़ान (कटाई) जोर-शोर से चल रहा है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि यूपी के जंगलों से कीमती तेंदू पत्ती अवैध रूप से पड़ोसी राज्य बिहार भेजी जा रही है। स्थानीय स्तर पर वन विभाग और वन निगम की घोर लापरवाही के कारण रोजाना लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है, जिससे वैध ठेकेदारों में भारी आक्रोश है।
बॉर्डर के गाँवों से हो रही है खुली तस्करी
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नौगढ़ तहसील का इलाका बिहार राज्य की सीमा से सटा हुआ है। बार्डर पर स्थित गहिला शाहपुर, जमसोत और पथरौर जैसे गाँवों से हर दिन भारी मात्रा में तेंदू पत्ते की तस्करी बिहार के लिए की जा रही है। आरोप है कि इस पूरी अवैध गतिविधि पर अंकुश लगाने में वन विभाग और वन निगम पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहे हैं। उनकी इस निष्क्रियता से तस्करों के हौसले बुलंद हैं।
पैसे का लालच देकर वन कर्मियों को हटाने का आरोप
नाम न छापने की शर्त पर कुछ लोगों ने इस बड़े खेल का खुलासा किया है। बताया जा रहा है कि बिहार के रसूखदार ठेकेदार उत्तर प्रदेश के कुछ वन कर्मियों को पैसे का मोटा लालच देते हैं। सांठगांठ के तहत वन कर्मियों को उस समय मौके से हटा दिया जाता है जब यूपी से पत्ती की खेप बिहार पार कराई जा रही होती है। तस्करों का यह नेटवर्क इतना मजबूत है कि बार्डर पर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त नजर आती है।
वैध ठेकेदारों की शिकायत पर भी कोई सुनवाई नहीं
स्थानीय वैध ठेकेदारों ने बताया कि उन्होंने इस अवैध तस्करी के खिलाफ कई बार वन विभाग के उच्च अधिकारियों से शिकायत की है। इसके बावजूद, बार्डर पर कोई भी वन कर्मी मुस्तैद दिखाई नहीं देता। ठेकेदारों का कहना है कि प्रशासन की तरफ से उन्हें कोई मदद नहीं मिल रही है। अगर इस खुली तस्करी पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो वैध ठेकेदारों के डूबने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश वन निगम को भी लाखों रुपए के राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।