Chandauli News: चंदौली: DDU स्टेशन पर RPF ने 3 बाल मजदूरों को बचाया, एक गिरफ्तार

Chandauli News: गया-चेन्नई एक्सप्रेस से ले जाए जा रहे बच्चों को बचाकर मानव तस्करी आरोपी को RPF ने पकड़ा

Update:2025-09-28 18:23 IST

चंदौली: DDU स्टेशन पर RPF ने 3 बाल मजदूरों को बचाया, एक गिरफ्तार (Photo- Newstrack)

Chandauli News: पंडित दीन दयाल उपाध्याय स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल की मुस्तैदी से एक बड़ा मानव तस्करी और बाल श्रम का मामला सामने आया है। आरपीएफ ने 'बचपन बचाओ आंदोलन' और 'चाइल्ड हेल्प डेस्क' के साथ मिलकर चलाए गए एक विशेष अभियान के दौरान, गया-चेन्नई एक्सप्रेस से तीन नाबालिग बच्चों को बचाया है। ये बच्चे बिहार से चेन्नई के एक होटल में काम कराने के लिए ले जाए जा रहे थे। इस मामले में बच्चों को ले जा रहे विरहिन मांझी नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जिस पर बाल मजदूरी कराने का आरोप है। यह कार्रवाई बाल अधिकार के संरक्षण और मानव तस्करी रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

ऐसे चला रेस्क्यू ऑपरेशन

यह ऑपरेशन आरपीएफ डीडीयू पोस्ट के प्रभारी निरीक्षक प्रदीप कुमार रावत के नेतृत्व में, बचपन बचाओ आंदोलन की सहायक परियोजना अधिकारी श्रीमती चंदा गुप्ता और चाइल्ड हेल्प डेस्क की टीम के सहयोग से चलाया गया।

28 सितंबर 2025 को, टीम ने प्लेटफॉर्म संख्या 4 पर आई गाड़ी संख्या 12389 गया-चेन्नई एक्सप्रेस की गहन जांच की। ट्रेन के पीछे के जनरल कोच में, टीम को तीन नाबालिग बच्चे डरे और सहमे हुए मिले। उनके साथ एक संदिग्ध व्यक्ति भी मौजूद था। बच्चों की दयनीय स्थिति और व्यक्ति के संदिग्ध व्यवहार को देखते हुए, टीम ने तुरंत सभी बच्चों और उस व्यक्ति को ट्रेन से नीचे उतारा और आगे की पूछताछ के लिए डीडीयू पोस्ट ले आई।

खुलासा: होटल में 12 घंटे की मजदूरी

आरपीएफ पोस्ट पर जब तीनों बच्चों और संदिग्ध व्यक्ति से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। बच्चों को ले जा रहे व्यक्ति की पहचान विरहिन मांझी (30 वर्ष), पुत्र सुखराम मांझी, निवासी डोभी, गया, बिहार के रूप में हुई।

पूछताछ में पता चला कि विरहिन मांझी तीनों नाबालिगों— अनोज कुमार (14 वर्ष), धर्मेंद्र कुमार (16 वर्ष) और राजकुमार (17 वर्ष)— को गया से चेन्नई ले जा रहा था। इन बच्चों को चेन्नई के एक होटल में बर्तन धोने के लिए ले जाया जा रहा था।

बच्चों ने बताया कि उन्हें इस काम के लिए प्रति माह 14 हजार रुपये दिए जाने का वादा किया गया था। सबसे गंभीर बात यह थी कि उन्हें प्रति दिन 12 घंटे काम करना पड़ता। आरोपी विरहिन मांझी ने ही बच्चों के लिए ट्रेन का किराया और खाने-पीने का खर्च वहन किया था। यह साफ तौर पर बाल श्रम और बच्चों की तस्करी का मामला था।

आगे की कानूनी कार्रवाई

मामला बाल मजदूरी और मानव तस्करी का पाए जाने के बाद, आरपीएफ ने तुरंत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। बच्चों को सुपुर्दगी: बचाए गए तीनों नाबालिग बच्चों को सुरक्षित रूप से चाइल्ड हेल्प डेस्क को सौंप दिया गया है, जो उनके पुनर्वास और परिवार से मिलाने की दिशा में काम करेगा। बच्चों के परिजनों से भी संपर्क साधा गया है।

तस्कर पर कार्रवाई: बच्चों को बाल मजदूरी के लिए ले जा रहे आरोपी विरहिन मांझी को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की विधिक कार्रवाई के लिए कोतवाली मुगलसराय को सौंप दिया गया है। कोतवाली मुगलसराय अब उस पर मानव तस्करी और बाल श्रम से संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा चलाएगी।

इस सफल ऑपरेशन में आरपीएफ के उप निरीक्षक अश्वनी कुमार, आरक्षी दीपक सिंह, संतोष त्रिपाठी, अशोक यादव, बबलू कुमार, सीआईबी के प्रधान आरक्षी विनोद यादव, बचपन बचाओ आंदोलन से चंदा गुप्ता और चाइल्ड हेल्प डेस्क से सुजीत कुमार की टीम शामिल थी।

Tags:    

Similar News