Chitrakoot News:चित्रकूट में जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह संपन्न

Chitrakoot News: चित्रकूट स्थित जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 2417 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। समारोह में सुहास एलवाई और आयुक्त अजीत कुमार को डीलिट मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।

Update:2026-05-11 21:51 IST

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Chitrakoot News: जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय में सोमवार को दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें कुल 2417 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इसके अलावा 141 स्वर्ण पदक, छह कुलाधिपति पदक और 39 शोध उपाधियां छात्र-छात्राओं को प्रदान की गईं।पैरालंपिक खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रजत पदक प्राप्त करने वाले आईएएस अधिकारी एवं खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव सुहास एलवाई तथा चित्रकूटधाम मंडल के आयुक्त अजीत कुमार को दिव्यांगजन सशक्तिकरण, खेल एवं लोक प्रशासन में उत्कृष्ट योगदान के लिए डीलिट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।

इससे पहले दीक्षांत समारोह की शुरुआत शोभायात्रा के साथ हुई। इसके बाद पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप तथा विश्वविद्यालय के संस्थापक एवं आजीवन कुलाधिपति जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।कार्यक्रम में डिजिटल माध्यम से जुड़े केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वह भले ही समारोह में उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन मन से सभी उपाधिधारकों और विश्वविद्यालय परिवार को शुभकामनाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही विश्वविद्यालय पहुंचकर उसकी प्रगति में अपना योगदान देंगे। विश्वविद्यालय की स्थापना से ही उनकी इसमें विशेष रुचि और आस्था रही है तथा वह हर संभव सहायता देकर इसके विकास में सहभागी बनेंगे।

राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने कहा कि यह विश्वविद्यालय पूर्ण रूप से दिव्यांगजनों की उच्च शिक्षा के लिए समर्पित है। विश्वविद्यालय को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए हर प्रकार की सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में नए केंद्र स्थापित किए जाएंगे तथा बुनियादी सुविधाओं में सुधार किया जाएगा। जगद्गुरु के सपनों को साकार कर विश्वविद्यालय को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए नैक मूल्यांकन सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं हेतु सरकारी सहायता उपलब्ध कराने का भी भरोसा दिया।

जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि यह विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा का उत्कृष्ट स्वरूप है। उन्होंने दीक्षांत के अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रत्येक शिक्षार्थी को शिक्षा के वास्तविक अर्थ को समझकर उपकार के माध्यम से मानव कल्याण के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह स्वयं स्वर्ण पदक धारक रहे हैं और उनके द्वारा स्थापित यह विश्वविद्यालय निश्चित रूप से भारतीय शिक्षा, पुरुषार्थ और व्यक्तिगत विकास के लिए सात्विक वातावरण प्रदान करेगा।उन्होंने कहा कि शिक्षा ऐसी शक्ति है, जो “मातृ देवो भव, पितृ देवो भव और आचार्य देवो भव” के साथ “राष्ट्र देवो भव” के सूत्र को आत्मसात कर प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों के पालन के लिए प्रेरित करती है।

कुलपति प्रो. शिशिर कुमार पांडेय ने कहा कि यह विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है। राज्य सरकार से प्रतिष्ठापित होने के बाद समावेशी वातावरण में आयोजित यह दीक्षांत समारोह न केवल बुंदेलखंड, बल्कि पूरे देश के दिव्यांगजनों को आकर्षित कर रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि, नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत और संस्थान की प्रगति का विवरण प्रस्तुत किया।

इससे पहले कुलपति ने सभी अतिथियों का माल्यार्पण, पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया। मंचासीन अतिथियों ने विश्वविद्यालय की शोध पत्रिका ‘समानुभूति’ के नवीन अंक, कुलाधिपति स्वामी रामभद्राचार्य द्वारा रचित ‘श्रीरामचरितमानस’ के संपादकीय संस्करण तथा ‘संस्कृत वांग्मय में जगद्गुरु रामभद्राचार्य का योगदान’ सहित कई पुस्तकों का विमोचन भी किया।विश्वविद्यालय के कुलसचिव मधुरेंद्र पर्वत ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया।इस अवसर पर राज्यसभा सांसद सुमित्रा बाल्मीकि, आचार्य रामचंद्र दास, रमापति मिश्र, वित्त अधिकारी रमेश कुमार, संयोजक डॉ. महेंद्र उपाध्याय, डॉ. हरिकांत मिश्र, डॉ. सुशील त्रिपाठी, डॉ. निहार रंजन मिश्र, डॉ. गुलब्धर, डॉ. शशिकांत त्रिपाठी, डॉ. विनोद मिश्रा, डॉ. अमित अग्निहोत्री सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।


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