Gorakhpur News: योगी सरकार की ‘मातृ सेवा’ पहल ने बचाई 77 गंभीर मरीजों की जान, गोरखपुर मॉडल बना मिसाल

Gorakhpur News: योगी सरकार का गोरखपुर ‘मातृ सेवा’ मॉडल हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं के लिए जीवनरक्षक साबित हो रहा है। दो महीने में 77 अतिगंभीर मामलों में जान बचाई गई।

Update:2026-08-06 18:18 IST

Gorakhpur News (Image Credit-Social Media)

लखनऊ, 6 अगस्त। उत्तर प्रदेश में मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गोरखपुर में ट्रायल के तौर पर शुरू किया गया ‘मातृ सेवा’ पायलट प्रोजेक्ट अब पूरे प्रदेश के लिए एक मॉडल बनकर उभर रहा है। इस पहल का उद्देश्य हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की समय रहते पहचान कर उन्हें तत्काल उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर करना और विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखरेख में इलाज सुनिश्चित करना है। अभियान के तहत बीते दो महीनों में गोरखपुर में 15 अतिगंभीर पोस्टपार्टम हैमरेज (प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव) के मामलों में महिलाओं की जान बचाई गई है। इसके अलावा 43 अतिगंभीर एनीमिया और 19 एक्लम्पसिया के मामलों में भी प्रभावी उपचार से मरीजों को बचाया गया है।

विभिन्न अस्पतालों के चिकित्सकों को जोड़ा गया व्हाट्सऐप ग्रुप

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवल के अनुसार, उत्तर प्रदेश टेक्निकल सपोर्ट यूनिट (UPTSU) और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयास से शुरू की गई इस पहल के तहत हाईरिस्क गर्भावस्था के मामलों के बेहतर प्रबंधन के लिए एक समन्वित व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया गया है।

इस ग्रुप में एम्स गोरखपुर, बीआरडी मेडिकल कॉलेज, जिला महिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC), मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और विभिन्न अस्पतालों के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षकों को जोड़ा गया है। इसके साथ ही आशा कार्यकर्ता, एएनएम, नर्स, एंबुलेंस कोऑर्डिनेटर और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) भी ग्रुप का हिस्सा हैं।

जैसे ही कोई आशा कार्यकर्ता या परिजन गर्भवती महिला को अस्पताल लेकर पहुंचते हैं, स्वास्थ्य विभाग की टीम हाईरिस्क केस की पहचान करती है। मरीज की स्थिति के अनुसार उसे तत्काल उच्च चिकित्सा संस्थान रेफर किया जाता है। प्रसव के दौरान जोखिम बढ़ने पर संबंधित डॉक्टर तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों और रेफरल टीम को सूचना देते हैं।

मरीज की गंभीरता, उपचार की स्थिति और रेफर किए जाने से संबंधित जानकारी व्हाट्सऐप ग्रुप पर साझा की जाती है। साथ ही फोन के जरिए भी संबंधित टीम को अलर्ट किया जाता है। इसके बाद एंबुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित कर मरीज को बिना देरी उच्च चिकित्सा संस्थान पहुंचाया जाता है।

अलर्ट मोड में टीम, दो महीने में 363 हाईरिस्क गर्भवतियों का इलाज

गोरखपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने बताया कि जिले में पहली बार हाईरिस्क गर्भावस्था के मामलों में तत्काल प्रतिक्रिया और रेफरल पर आधारित इस तरह की व्यवस्था शुरू की गई है। 21 मई से शुरू हुए इस अभियान के तहत दो महीनों में 363 हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं का इलाज किया गया।

इनमें 55 मामले पोस्टपार्टम हैमरेज के थे। इनमें से 15 मामले अतिगंभीर स्थिति वाले थे। टीम के अलर्ट मोड में रहने और समय पर रेफरल व उपचार मिलने के कारण इन महिलाओं की जान बचाई जा सकी।

पोस्टपार्टम हैमरेज मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। इसके अलावा अभियान के तहत 43 अतिगंभीर एनीमिया और 19 एक्लम्पसिया के मामलों में भी मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया गया।

डॉ. राजेश झा ने बताया कि अब आसपास के जिलों से आने वाले हाईरिस्क मरीजों को भी गोरखपुर में भर्ती कर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। अभियान की दो महीने की ट्रायल रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जाएगी। यदि इस मॉडल को प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जाता है, तो यह मातृ मृत्यु दर को कम करने में प्रभावी साबित हो सकता है।

देवरिया की रिंकी देवी का केस बना मिसाल

हाईरिस्क प्रेगनेंसी मैनेजमेंट सिस्टम के त्वरित रिस्पांस से किस तरह किसी महिला की जान बचाई जा सकती है, इसका उदाहरण देवरिया की 34 वर्षीय रिंकी देवी का मामला है।

महर्षि देवरहा बाबा स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, देवरिया की ऑन-ड्यूटी चिकित्सा अधिकारी डॉ. नूपुर श्रीवास्तव के अनुसार, रिंकी देवी ने सोमवार को पथरदेवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बच्चे को जन्म दिया था। प्रसव के बाद उनकी हालत गंभीर हो गई और अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। उन्हें रात करीब 11:05 बजे देवरिया मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। अस्पताल पहुंचने के समय वह हेमोरेजिक शॉक की स्थिति में थीं और उनके जरूरी शारीरिक संकेत तेजी से बिगड़ रहे थे।

प्रारंभिक उपचार के बाद रात करीब पौने एक बजे देवरिया की टीम ने गोरखपुर रेफरल ट्रैकिंग टीम को मरीज की गंभीर स्थिति की जानकारी दी और उसे बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर करने की सूचना दी। गोरखपुर टीम ने तत्काल बीआरडी मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी टीम से संपर्क कर मरीज के पहुंचने से पहले ही आवश्यक तैयारी सुनिश्चित की।

रात करीब 2 बजे मरीज को शॉक की स्थिति में बीआरडी मेडिकल कॉलेज लाया गया। इमरजेंसी ऑब्सटेट्रिक टीम ने तत्काल एडवांस्ड रिससिटेशन शुरू किया और एक यूनिट रक्त चढ़ाया। विभिन्न टीमों के बीच बेहतर समन्वय, त्वरित रेफरल और समय पर उपचार के कारण मरीज की हालत में तेजी से सुधार हुआ। अब रिंकी देवी खतरे से बाहर हैं।

प्रदेश में मातृ मृत्यु दर कम करने की दिशा में अहम पहल

गोरखपुर का ‘मातृ सेवा’ मॉडल यह दिखाता है कि हाईरिस्क गर्भावस्था के मामलों में समय पर पहचान, तत्काल रेफरल, एंबुलेंस की उपलब्धता और उच्च संस्थान में त्वरित उपचार मातृ मृत्यु को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद अब इसकी रिपोर्ट के आधार पर इसे प्रदेश के अन्य जिलों में लागू करने पर विचार किया जा सकता है।

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