Hapur News: 13 मौतों का आरोपी पटाखा माफिया वसीम फिर सक्रिय, धौलाना से जयपुर तक फैला नेटवर्क

Hapur News: 13 लोगों की मौत से जुड़े मामले में आरोपी बताए जा रहे पटाखा माफिया वसीम के फिर सक्रिय होने की चर्चा है। धौलाना से जयपुर तक फैले कथित नेटवर्क को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, जबकि अवैध पटाखा कारोबार और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर जांच की मांग तेज हो गई है।

By :  Avnish Pal
Update:2026-06-19 13:24 IST

Hapur News(Photo-Social Media)

Hapur News: उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले का नाम एक बार फिर देश के सबसे खतरनाक अवैध पटाखा और विस्फोटक नेटवर्क से जुड़कर चर्चा में है। धौलाना में वर्ष 2022 में हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में 13 लोगों की मौत के मामले में जेल जा चुका आरोपी मोहम्मद वसीम अब जयपुर में हुए दर्दनाक विस्फोट के बाद फिर जांच एजेंसियों के रडार पर है। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले चार वर्षों में तीन बड़े विस्फोट मामलों में एक ही नाम सामने आने से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।

जयपुर के खो-नागोरियान इलाके में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में आठ लोगों की मौत के बाद राजस्थान पुलिस, खुफिया एजेंसियां और उत्तर प्रदेश पुलिस वसीम के नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं। जांच में सामने आया है कि हापुड़ से जुड़े इस आरोपी का नाम पहले भी कई बड़े हादसों में सामने आ चुका है।

धौलाना ब्लास्ट: जहां 13 परिवारों में पसरा था मातम

वर्ष 2022 में हापुड़ के धौलाना क्षेत्र में संचालित एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। धमाका इतना शक्तिशाली था कि फैक्ट्री पूरी तरह ध्वस्त हो गई और 13 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।इस मामले में पुलिस जांच के दौरान मोहम्मद वसीम का नाम सामने आया और उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। लेकिन विस्फोटक अधिनियम में अपेक्षाकृत कमजोर दंडात्मक प्रावधानों और न्यायिक प्रक्रिया के चलते उसे करीब एक वर्ष बाद जमानत मिल गई।

जेल से निकला और फिर शुरू कर दिया मौत का कारोबार

जानकारी के अनुसार, जेल से बाहर आने के बाद वसीम ने अवैध विस्फोटक कारोबार से दूरी बनाने के बजाय फिर उसी नेटवर्क को सक्रिय करना शुरू कर दिया। जांच एजेंसियों का मानना है कि उसने अलग-अलग राज्यों में फैले संपर्कों के जरिए पटाखा निर्माण और विस्फोटक सामग्री के अवैध कारोबार को आगे बढ़ाया। धौलाना कांड के बाद अमरोहा जिले के अतरासी क्षेत्र में हुई पटाखा फैक्ट्री विस्फोट की घटना में भी उसका नाम सामने आया था। अब जयपुर हादसे में भी पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

जयपुर ब्लास्ट ने खोली नेटवर्क की नई परतें

जयपुर के खो-नागोरियान क्षेत्र में हाल ही में हुए भीषण विस्फोट में आठ लोगों की जान चली गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि फैक्ट्री अवैध रूप से संचालित की जा रही थी। मामले में कई संदिग्धों के नाम सामने आए हैं, जिनमें मोहम्मद वसीम भी शामिल बताया जा रहा है।लगातार तीसरी बड़ी घटना में उसका नाम आने के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर उसका नेटवर्क कितना बड़ा है और किन-किन राज्यों तक फैला हुआ है।

हापुड़ पुलिस और खुफिया एजेंसियां अलर्ट मोड पर

जयपुर हादसे के बाद हापुड़ पुलिस भी पूरी तरह सतर्क हो गई है। स्थानीय स्तर पर वसीम के पुराने संपर्कों, उसके संभावित ठिकानों और विस्फोटक सामग्री से जुड़े कारोबार की जानकारी जुटाई जा रही है।पुलिस सूत्रों का कहना है कि यदि ऐसे नेटवर्क को समय रहते ध्वस्त नहीं किया गया तो भविष्य में और भी बड़े हादसे हो सकते हैं। यही वजह है कि स्थानीय खुफिया इकाइयों को भी सक्रिय कर दिया गया है।

एक आरोपी, तीन बड़े विस्फोट और 21 मौतें

धौलाना में 13 मौतें, अमरोहा में विस्फोट का मामला और अब जयपुर में आठ लोगों की जान जाने के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इतने गंभीर मामलों में नाम आने के बावजूद अवैध विस्फोटक कारोबार पर पूरी तरह लगाम क्यों नहीं लग सकी?

विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध पटाखा उद्योग के पीछे करोड़ों रुपये का नेटवर्क काम करता है, जो कानून की खामियों और प्रशासनिक चूक का फायदा उठाकर बार-बार सक्रिय हो जाता है।

कानून की कमजोरी बनी बड़ी चुनौती

धौलाना विस्फोट मामले में पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता कमल सिंह का कहना है कि केवल कार्रवाई करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। विस्फोटक अधिनियम में कठोर प्रावधानों की जरूरत है ताकि ऐसे मामलों में आरोपियों को आसानी से राहत न मिल सके।उनका कहना है कि एक बार हुई लापरवाही की कीमत कई परिवार अपनी जान देकर चुका चुके हैं। जयपुर की घटना ने एक बार फिर उसी दर्दनाक सच्चाई को देश के सामने ला खड़ा किया है।

क्या बोले हापुड़ एसपी ?

एसपी कुंवर ज्ञानजय सिँह ने बताया कि पुलिस इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। जयपुर पुलिस के साथ लगातार संपर्क में हैं। यदि आरोपी जिले में पाया जाता है तो उसे नियमानुसार जयपुर पुलिस को सौंपा जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में वह जिले में किसी भी प्रकार का अवैध विस्फोटक कारोबार संचालित न कर सके।

बड़ा सवाल: कब टूटेगा मौत के कारोबार का नेटवर्क?

धौलाना से लेकर जयपुर तक हुए विस्फोटों ने यह साफ कर दिया है कि अवैध पटाखा फैक्ट्रियों का नेटवर्क केवल एक जिले या राज्य तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस पूरे सिंडिकेट को बेनकाब कर उसे जड़ से खत्म करने की है।

क्योंकि हर विस्फोट के बाद केवल इमारतें नहीं टूटतीं, बल्कि कई परिवार हमेशा के लिए बिखर जाते हैं।

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