Hapur News: नवजात की मौत पर बवाल, देवनंदिनी अस्पताल में परिजनों का हंगामा, लापरवाही का आरोप

Hapur News: हापुड़ के देवनंदिनी अस्पताल में नवजात की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं।

By :  Avnish Pal
Update:2026-06-02 15:36 IST

Hapur News(Photo-Social Media)

Hapur News: उत्तर प्रदेश के हापुड़ जनपद के शहर के गढ़ रोड स्थित देवनंदिनी अस्पताल में मंगलवार को एक नवजात शिशु की मौत के बाद जमकर हंगामा हो गया। नवजात के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों पर गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। सूचना पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में घंटों तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा।

प्रसव पीड़ा के बाद अस्पताल में कराया था भर्ती

जानकारी के अनुसार, गढ़ रोड स्थित गिरधारी नगर निवासी ऋषभ अग्रवाल अपनी पत्नी अपूर्वी अग्रवाल (24) को प्रसव पीड़ा होने पर रविवार को देवनंदिनी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों के मुताबिक अस्पताल में भर्ती करने के बाद चिकित्सकों ने पहले सामान्य प्रसव कराने का प्रयास किया, लेकिन बाद में महिला की स्थिति को देखते हुए सिजेरियन ऑपरेशन की सलाह दी गई। परिजनों की सहमति मिलने के बाद सोमवार को ऑपरेशन किया गया, जिसमें अपूर्वी ने एक पुत्र को जन्म दिया। परिवार में बच्चे के जन्म की खुशी का माहौल था, लेकिन कुछ ही घंटों बाद यह खुशी मातम में बदल गई।

जन्म के बाद बिगड़ने लगी नवजात की तबीयत

परिजनों का आरोप है कि जन्म के कुछ समय बाद ही नवजात की हालत अचानक बिगड़ने लगी। बच्चे को सांस लेने में परेशानी होने लगी, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने उसे विशेष निगरानी में रखा और मशीनों की सहायता से उपचार शुरू किया। परिवार का कहना है कि जब बच्चे की हालत लगातार गंभीर बनी रही तो उन्होंने उसे किसी बड़े और बेहतर सुविधा वाले अस्पताल में रेफर करने की मांग की थी। आरोप है कि अस्पताल के चिकित्सकों ने बच्चे को रेफर करने के बजाय अपने स्तर पर ही इलाज जारी रखा और परिजनों को भरोसा दिलाते रहे कि स्थिति नियंत्रण में है।

रात 3:30 बजे आया अस्पताल का फोन

मृतक नवजात के पिता ऋषभ अग्रवाल ने बताया कि मंगलवार तड़के करीब 3:30 बजे अस्पताल से फोन आया। अस्पताल की ओर से बताया गया कि बच्चे की हालत बेहद गंभीर है और उसे बचाने के लिए एक विशेष इंजेक्शन की आवश्यकता है, जिसकी कीमत लगभग 30 हजार रुपये है। साथ ही बच्चे को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखने की भी जानकारी दी गई।

फोन मिलने के बाद परिवार के लोग आनन-फानन में अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचते ही उन्हें ऐसी खबर मिली जिसने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया।

अस्पताल पहुंचते ही मिली मौत की सूचना

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने पर उन्हें बताया गया कि नवजात की मौत हो चुकी है। यह सुनते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। बच्चे की मां अपूर्वी की हालत भी अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया।परिवार के लोगों का कहना है कि यदि समय रहते बच्चे को किसी बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया जाता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही बरतने और समय पर सही निर्णय न लेने का आरोप लगाया।

अस्पताल परिसर में जमकर हुआ हंगामा

नवजात की मौत से आक्रोशित परिजनों और रिश्तेदारों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चिकित्सकों की भूमिका की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाने का प्रयास किया। काफी देर तक चली बातचीत के बाद स्थिति को शांत कराया गया। इस दौरान अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई।

पुलिस ने शुरू की जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों और अस्पताल पक्ष की बातों को ध्यान में रखते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को बताया निराधार

वहीं, अस्पताल प्रबंधन ने चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। अस्पताल की ओर से कहा गया कि नवजात की स्थिति जन्म के बाद से ही गंभीर थी और उसे बचाने के लिए डॉक्टरों की टीम ने हर संभव प्रयास किया। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि इलाज के दौरान सभी आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का पालन किया गया।

सवालों के घेरे में निजी अस्पतालों की व्यवस्था

इस घटना के बाद एक बार फिर निजी अस्पतालों में नवजात और गंभीर मरीजों के उपचार को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। परिजनों का आरोप है कि गंभीर स्थिति होने के बावजूद समय रहते रेफर नहीं किया गया, जबकि अस्पताल प्रबंधन अपनी ओर से इलाज में कोई कमी न होने की बात कह रहा है। अब पुलिस जांच और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नवजात की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या था।फिलहाल नवजात की मौत से परिवार गहरे सदमे में है और परिजन दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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