गंगा एक्सप्रेसवे उद्घाटन शिलापट विवाद, स्थानीय जनप्रतिनिधियों के नाम गायब, मंत्री ने दी प्रतिक्रिया
Hardoi News: गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन शिलापट से स्थानीय जनप्रतिनिधियों के नाम गायब होने पर विवाद खड़ा हो गया है। आबकारी राज्य मंत्री नितिन अग्रवाल ने इसे नियमों के तहत बताया, लेकिन मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।
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Hardoi News: गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन को लेकर जहां प्रदेश भर में उत्साह का माहौल है, वहीं जनपद में एक अलग तरह की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। स्थानीय स्तर पर लोग इस बात को लेकर हैरान हैं कि उद्घाटन के लिए लगाए गए शिलापट में जनपद के किसी भी मंत्री या क्षेत्रीय विधायक का नाम शामिल नहीं किया गया। इसे लेकर राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक में तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
इसी मुद्दे पर जब एक कार्यक्रम के दौरान आबकारी राज्य मंत्री नितिन अग्रवाल से सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे विवाद का विषय मानने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि शिलापट पर नाम शामिल करने की एक तय प्रक्रिया और नियम होते हैं, और उसी के अनुसार नामों का चयन किया जाता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इसमें किसी प्रकार की उपेक्षा या भेदभाव जैसी बात नहीं है।
घटनाक्रम ने जनपद में राजनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया
हालांकि, मंत्री के इस बयान के बाद भी स्थिति पूरी तरह शांत होती नहीं दिख रही है। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद मीडिया कर्मियों ने जब इस विषय पर और स्पष्ट जवाब जानने की कोशिश की, तो मंत्री ने सवालों से दूरी बनानी शुरू कर दी। वे बार-बार इस मुद्दे को तूल न देने की बात कहते नजर आए और अन्य सवालों की ओर बातचीत मोड़ने का प्रयास करते रहे।इस पूरे घटनाक्रम ने जनपद में राजनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया है। कुछ लोग इसे प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा मान रहे हैं, तो वहीं कई लोग इसे स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के रूप में देख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा। फिलहाल, यह मुद्दा जनपद में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।