Hathras News: हाथरस में बच्चों को कागज-कलम से जोड़ने की पहल, लिखने को किया प्रेरित
Hathras News: डीएम अतुल वत्स और एसपी चिरंजीव नाथ सिन्हा ने बच्चों को नियमित लेखन के लिए प्रेरित किया, स्क्रीन टाइम कम कर रचनात्मकता बढ़ाने पर दिया जोर।
हाथरस में बच्चों को कागज-कलम से जोड़ने की पहल, लिखने को किया प्रेरित (Photo- Newstrack)
Hathras News: हाथरस में बच्चों को मोबाइल और डिजिटल माध्यमों से कुछ समय दूर रखकर कागज और कलम से जोड़ने की पहल की जा रही है। शुक्रवार को जिलाधिकारी हाथरस अतुल वत्स और पुलिस अधीक्षक हाथरस चिरंजीव नाथ सिन्हा की पहल ‘पंख स्नेल लेटर राइटिंग’ के तहत थाना कोतवाली हाथरस सदर क्षेत्र स्थित केंद्रीय विद्यालय हाथरस में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को नियमित रूप से पत्र और रचनात्मक लेखन के लिए प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक हाथरस चिरंजीव नाथ सिन्हा मौजूद रहे। उन्होंने बच्चों से संवाद किया और उन्हें कागज और कलम के जरिए अपने विचारों, भावनाओं, सपनों और कल्पनाओं को व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान बच्चों को बताया गया कि नियमित लेखन उनकी सोच और रचनात्मकता को बेहतर बनाने के साथ अपनी बात प्रभावी तरीके से रखने में भी मदद करता है।
बच्चों के विचारों और कल्पनाओं को ‘पंख’ देने की पहल
‘पंख स्नेल लेटर राइटिंग’ पहल का उद्देश्य बढ़ते स्क्रीन टाइम के बीच बच्चों को कुछ समय मोबाइल और डिजिटल माध्यमों से दूर करना है। इसके साथ ही बच्चों को कागज और कलम से जोड़कर उनकी लेखन क्षमता और रचनात्मक सोच विकसित करने तथा उन्हें अपने मन की बात स्वतंत्र रूप से रखने के लिए सकारात्मक मंच उपलब्ध कराना है।
जिलाधिकारी अतुल वत्स और पुलिस अधीक्षक चिरंजीव नाथ सिन्हा ने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि कागज पर लिखे शब्द केवल शब्द नहीं होते हैं, बल्कि उनमें बच्चों के विचार, भावनाएं, सपने और भविष्य की कल्पनाएं भी होती हैं। नियमित लेखन से सोचने, समझने और कल्पना करने की क्षमता विकसित होती है। इससे बच्चे अपनी बात को प्रभावी ढंग से रखने का तरीका भी सीखते हैं।
इन विषयों पर पत्र लेखन के लिए किया प्रेरित
जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने बच्चों को ‘पंख’ पहल के तहत अलग-अलग विषयों पर पत्र लेखन और रचनात्मक लेख लिखने के लिए प्रेरित किया। इनमें आधुनिक युग में बच्चों के लिए मूलभूत जीवन मूल्यों की वापसी, दादा-दादी और नाना-नानी से बच्चों के जुड़ाव को मजबूत करना तथा भारतीय होने पर गर्व और बच्चों में राष्ट्रीय गौरव की भावना जैसे विषय शामिल रहे।
इसके अलावा कागज और पेन के जरिए रचनात्मकता की ओर बढ़ने और बच्चों में लेखन की आदत विकसित करने, समय का सदुपयोग करने और बच्चों को समय प्रबंधन सिखाने की जरूरत पर भी लेखन के लिए प्रेरित किया गया। बच्चों को यह समझने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया कि उन्हें माता-पिता से केवल भौतिक सुविधाएं ही नहीं, बल्कि उनका समय भी चाहिए।
‘मेरे सपने, मेरा भविष्य’ विषय के जरिए बच्चों को अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के अवसरों के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया गया। राष्ट्र निर्माण में बच्चों की भूमिका और जिम्मेदारी, छोटी बचत से बड़े भविष्य की तैयारी और बच्चों में बचत की आदत विकसित करने जैसे विषय भी इसमें शामिल रहे।
शिक्षा केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि जीवन निर्माण के लिए है, इस विचार को भी बच्चों तक पहुंचाया गया। वहीं ‘स्क्रीन टाइम से स्मार्ट टाइम’ के माध्यम से बच्चों के लिए संतुलित डिजिटल जीवन की जरूरत बताई गई। खेल, किताबें और प्रकृति को बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए जरूरी बताया गया। इसके साथ ही बच्चों में अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने, उनके मानसिक विकास के लिए सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण तैयार करने तथा नीति निर्माण तक बच्चों की आवाज और निर्णयों में उनके विचारों के महत्व जैसे विषयों पर भी पत्र लेखन के लिए प्रेरित किया गया।
रोज कुछ समय कागज और कलम के लिए निकालने की अपील
इस पहल के माध्यम से बच्चों को अपने अनुभव, विचार और सपनों को पत्रों के जरिए व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि उनकी रचनात्मकता को नई दिशा मिल सके और उनके विचारों को ‘पंख’ मिल सकें। जिलाधिकारी अतुल वत्स और पुलिस अधीक्षक चिरंजीव नाथ सिन्हा ने बच्चों से कहा कि वे प्रतिदिन कुछ समय कागज और कलम के लिए निर्धारित करें।
उन्होंने बच्चों को अपने मन की बात, दिनभर के अनुभव, कोई नया विचार, पढ़ी गई किताब से मिली सीख या भविष्य के सपनों को लिखने की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया। अधिकारियों ने बच्चों को नियमित लेखन के महत्व को समझाते हुए इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने की बात कही।
बच्चों में दिखा लेखन को लेकर उत्साह
कार्यक्रम के दौरान बच्चों में पत्र लेखन और रचनात्मक अभिव्यक्ति को लेकर उत्साह देखने को मिला। बच्चों ने अलग-अलग विषयों पर अपने विचार साझा किए और नियमित रूप से लिखने का संकल्प लिया। ‘पंख स्नेल लेटर राइटिंग’ पहल के जरिए बच्चों को कागज और कलम से जोड़ने के साथ उनके विचारों, अनुभवों और सपनों को अभिव्यक्ति देने का प्रयास किया जा रहा है।