लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे धंसने का मामला पहुंचा कोर्ट, इलाहाबाद HC सरकार और NHAI से मांगा जवाब
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता और सड़क धंसने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने यूपी सरकार, NHAI और MoRTH से जवाब मांगा है।
Lucknow Kanpur Expressway: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण की गुणवत्ता और सड़क के बार-बार धंसने के मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है. मामले के लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार, NHAI और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) से जवाब मांगा है। एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली कंपनी PNC इंफ्राटेक को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है।
यह मामला एडवोकेट मोतीलाल यादव की ओर से दाखिल जनहित याचिका (PIL) के जरिए कोर्ट पहुंचा है। याचिका में एक्सप्रेसवे की खराब स्थिति, सड़क धंसने और यहां लिए जा रहे टोल को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों से मांगा जवाब
याचिका पर सुनवाई जस्टिस राजन राय और जस्टिस मंजीश शुक्ला की डबल बेंच ने की। कोर्ट ने मामले से जुड़े सभी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिका में एक्सप्रेसवे की स्थिति को लेकर जो भी सवाल उठाए गए हैं, उन सभी पर संबंधित अधिकारियों को अपना जवाब देना होगा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जवाब दाखिल करते समय याचिका में उठाए गए हर एंगल पर जानकारी दी जाए।
सड़क धंसने के बाद उठे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल
याचिका में एक्सप्रेसवे के निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। दरअसल, एक्सप्रेसवे का उद्घाटन होने के कुछ ही समय बाद बारिश के दौरान सड़क के एक हिस्से के धंसने की खबर सामने आई थी।
इसके बाद संबंधित एजेंसियों ने सड़क की मरम्मत कराई थी। लेकिन इस घटना ने एक्सप्रेसवे के निर्माण में इस्तेमाल हुई सामग्री और काम की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े कर दिए।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि एक्सप्रेसवे की खराब स्थिति केवल एक सामान्य तकनीकी समस्या नहीं है, बल्कि इसके निर्माण की गुणवत्ता और प्रक्रिया की जांच की जरूरत है।
टोल को लेकर भी याचिका में सवाल
PIL में सिर्फ सड़क की हालत का मुद्दा नहीं उठाया गया है, बल्कि एक्सप्रेसवे पर वसूले जा रहे टोल को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
याचिका के मुताबिक, यहां करीब 4.37 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से टोल वसूला जा रहा है। याचिकाकर्ता ने टोल की दर और सड़क की मौजूदा स्थिति के बीच भी सवाल उठाए हैं।
13 जुलाई को हुआ था उद्घाटन
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को किया गया था। उद्घाटन कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद थे।
इस एक्सप्रेसवे से लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा को तेज और आसान बनाने की उम्मीद जताई गई थी। लेकिन उद्घाटन के कुछ समय बाद ही सड़क धंसने की घटना सामने आने से इसकी गुणवत्ता को लेकर विवाद शुरू हो गया।
निर्माण कंपनी भी मामले में पक्षकार
जनहित याचिका में एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली कंपनी PNC इंफ्राटेक को भी पक्षकार बनाया गया है। याचिका में निर्माण की गुणवत्ता और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग उठाई गई है।