Lucknow News: गोमतीनगर एक्सटेंशन सेक्टर-7 की सड़कें बनीं गड्ढों का जाल, 50 हजार की आबादी परेशान, नगर निगम और बिल्डर की लड़ाई में पिस रहे लोग
Lucknow News: राजधानी लखनऊ के शहीद पथ स्थित पुलिस मुख्यालय से ओरेंज कैसल और ओमेक्स जाने वाली सड़कों पर चलना मुश्किल हो चुका है। यहां कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। यहां बिल्डर और नगर निगम के बीच विवाद में 50 हजार की आबादी पिस रही है।
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Lucknow News: राजधानी लखनऊ का पॉश इलाका माने जाने वाला गोमतीनगर एक्सटेंशन इन दिनों बदहाल सड़कों की वजह से लोगों की नाराजगी और परेशानी का केंद्र बन गया है। सेक्टर-7 की सड़कें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि यहां रहने वाले लोगों का रोजाना सफर जान जोखिम में डालकर तय हो रहा है। पुलिस मुख्यालय के ठीक पीछे बसे हाईराइज अपार्टमेंट्स और बड़ी हाउसिंग सोसायटियों के लोग पिछले डेढ़ साल से गड्ढों और टूटी सड़कों के बीच जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं।
हालात ऐसे हैं कि नगर निगम और बिल्डर के बीच जिम्मेदारी तय करने की लड़ाई में करीब 50 हजार की आबादी पिस रही है। लोगों का कहना है कि इलाके की सड़कें अब सिर्फ खराब नहीं रहीं, बल्कि बड़ा सुरक्षा खतरा बन चुकी हैं। मानसून सिर पर है और लोगों को डर है कि बारिश शुरू होते ही ये गड्ढे पानी से भर जाएंगे, जिसके बाद हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।
रोज गुजरते हैं हजारों लोग
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, पुलिस मुख्यालय से आउटर रिंग रोड की तरफ जाने वाला रास्ता और सेंटर पॉइंट से मिश्री मलाई होते हुए आर-1 तक का पूरा स्ट्रेच पूरी तरह जर्जर हो चुका है। सड़क जगह-जगह से उखड़ी हुई है, बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं और कई हिस्सों में सड़क की ऊपरी परत पूरी तरह टूट चुकी है।
यह रास्ता इलाके की कई बड़ी सोसायटियों को जोड़ता है और दिनभर यहां भारी आवाजाही रहती है। सेक्टर-7 स्थित ओरंजे कैसल, रिशिता मैनहट्टन, वॉटर फ्रंट, ओरो, एमार गोमती ग्रीन्स और ओमेक्स रेजीडेंसी आर-1 व आर-2 समेत कई हाईराइज सोसायटियों में रहने वाले हजारों लोग इसी सड़क से रोज गुजरते हैं।
लोगों का कहना है कि सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि वाहन धीरे-धीरे निकालने पड़ते हैं। बाइक सवार अक्सर फिसल जाते हैं, जबकि कार और ऑटो चालकों को भी रोज नुकसान झेलना पड़ रहा है। सड़क पर जगह-जगह टूटे हिस्सों और गहरे गड्ढों की वजह से लगातार जाम की स्थिति बनी रहती है और हादसों का खतरा भी बढ़ गया है।
पानी भरते ही और ही खतरनाक होंगे गड्ढे
वहीं इलाके के लोगों का कहना है कि सड़क की हालत बारिश के बाद और ज्यादा खराब हो जाती है। जैसे ही पानी भरता है, गड्ढे दिखाई देना बंद हो जाते हैं और वाहन चालक सीधे उनमें फंस जाते हैं। इससे न सिर्फ ट्रैफिक बाधित होता है, बल्कि लोगों की जान पर भी खतरा बना रहता है।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि बारिश के दिनों में सड़क पर जलभराव की समस्या इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि दोपहिया वाहन चालक अक्सर फिसल जाते हैं। पैदल चलने वालों और स्कूली बच्चों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
लोगों का कहना है कि अगर मानसून से पहले सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो हालात और भयावह हो जाएंगे। आपातकालीन सेवाओं पर भी इसका असर पड़ रहा है। एंबुलेंस और इमरजेंसी वाहनों को भी इस सड़क से निकलने में परेशानी होती है।
नगर निगम और बिल्डर के बीच फंसा पूरा इलाका
वहीं स्थानीय लोगों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि, सड़क मरम्मत को लेकर नगर निगम और बिल्डर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। लोगों के मुताबिक, जब भी सड़क मरम्मत की मांग उठाई जाती है तो नगर निगम यह कहकर पीछे हट जाता है कि सड़क का निर्माण निजी डेवलपर ने कराया था और उसकी जिम्मेदारी उसी की है।
वहीं दूसरी तरफ लोगों का दावा है कि वे नियमित रूप से हाउस टैक्स जमा कर रहे हैं और अगर सड़क और इलाके की जिम्मेदारी बिल्डर की है तो नगर निगम हाउस टैक्स किस बात का वसूल रहा है।
लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि अगर बिल्डर अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहा, तो उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुलिस मुख्यालय के आसपास की दूसरी सड़कें चमक रही हैं, लेकिन इस इलाके को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। लोगों ने इसे भेदभाव बताते हुए नाराजगी जाहिर की है।
डेढ़ साल से शिकायतें, नहीं हुआ स्थायी समाधान
वहीं इलाके के लोगों का यह भी कहना है कि वे पिछले डेढ़ साल से लगातार शिकायत कर रहे हैं। एलडीए, नगर निगम और स्थानीय अधिकारियों से कई बार गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।
लोगों के मुताबिक, कई बार सड़क पर थोड़ी बहुत पैचवर्क मरम्मत कर दी जाती है, लेकिन कुछ ही दिनों बाद सड़क फिर उखड़ जाती है। स्थायी रिपेयरिंग का कोई काम नहीं हुआ है।
लोगों का कहना है कि यह सिर्फ सड़क की समस्या नहीं रह गई, बल्कि अब यह सीधे लोगों की सुरक्षा से जुड़ा मामला बन चुका है। रोजाना हजारों लोग इसी रास्ते से ऑफिस, स्कूल और दूसरे कामों के लिए गुजरते हैं, लेकिन किसी भी विभाग की तरफ से गंभीरता नहीं दिखाई जा रही।
मंत्री एके शर्मा से लगाई मदद की गुहार
वहीं इस गंभीर समस्या से परेशान होकर अब लोगों ने आंदोलन का रास्ता पकड़ना शुरू कर दिया है। हाईराइज सोसायटियों में रहने वाले निवासियों ने सड़क मरम्मत को लेकर ऑनलाइन और ऑफलाइन हस्ताक्षर अभियान शुरू कर दिया है।
लोगों का कहना है कि अब वे नगर विकास मंत्री एके शर्मा को ज्ञापन देकर मदद की गुहार लगाएंगे। निवासियों का कहना है कि अधिकारियों से शिकायत करते-करते वे थक चुके हैं, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। स्थानीय लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर मानसून से पहले सड़क मरम्मत का काम शुरू नहीं हुआ तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
नगर निगम ने मांगी रिपोर्ट
वहीं इस बाबत पत्रकारों से बातचीत में नगर निगम जोन-4 के एक्सईएन अतुल मिश्रा ने कहा है कि, पूरा इलाका अभी नगर निगम को हैंडओवर हुआ है। सड़क मरम्मत को लेकर क्या विवाद है, इस संबंध में संबंधित जेई से रिपोर्ट मांगी गई है।
हालांकि इलाके के लोग इस जवाब से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि जिम्मेदारी तय करने और फाइलों में रिपोर्ट मंगाने से सड़कें ठीक नहीं होंगी। लोगों के मुताबिक, जब तक जमीनी स्तर पर मरम्मत का काम शुरू नहीं होगा, तब तक हजारों लोगों की परेशानी खत्म नहीं होने वाली।
पॉश इलाके की चमक के पीछे बदहाली की तस्वीर
गौरतलब हो कि, गोमतीनगर एक्सटेंशन को राजधानी के सबसे तेजी से विकसित होने वाले इलाकों में गिना जाता है। यहां करोड़ों रुपये के फ्लैट, हाईराइज टावर्स और आधुनिक सुविधाओं वाली सोसायटियां मौजूद हैं। लेकिन उन्हीं चमचमाती इमारतों के बीच सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं।
इलाके के लोगों का कहना है कि विकास के दावे सिर्फ इमारतों तक सीमित रह गए हैं, जबकि बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह बदहाल हैं। लोगों का कहना है कि अगर राजधानी के पॉश इलाके का यह हाल है, तो बाकी इलाकों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।