KGMU में इतिहास: पद्मश्री प्रो. सोनिया नित्यानंद को दूसरी बार मिली कुलपति की कमान
KGMU News: केजीएमयू में प्रो. सोनिया नित्यानंद को लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए कुलपति नियुक्त किया गया। NAAC A++, रोबोटिक सर्जरी, ट्रांसप्लांट और ट्रॉमा सेंटर के साथ नई पारी में कई चुनौतियां भी होंगी।
KGMU Lucknow
KGMU News: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के इतिहास में पहली बार किसी कुलपति को लगातार दूसरा कार्यकाल मिला है। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने पद्मश्री प्रो. सोनिया नित्यानंद को अगले तीन वर्षों के लिए फिर कुलपति नियुक्त किया है। अगस्त 2023 से शुरू हुई उनकी पहली पारी में विश्वविद्यालय ने NAAC की A++ मान्यता, रोबोटिक सर्जरी के विस्तार, ट्रांसप्लांट सेवाओं में तेजी और नए ट्रॉमा सेंटर जैसी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को आगे बढ़ाया। दूसरी पारी में उनके सामने चिकित्सा शिक्षा और शोध को नई ऊंचाई देने के साथ ही मरीजों का भारी दबाव, डॉक्टरों और कर्मचारियों की कमी, जांच की लंबी प्रतीक्षा, अग्नि सुरक्षा और डिजिटल व्यवस्था जैसी बड़ी चुनौतियां भी हैं। KGMU की आधिकारिक वेबसाइट संस्थान को NAAC A++ मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय के रूप में दर्ज करती है।
1905 में स्थापित इस संस्थान ने मेडिकल कॉलेज से विश्वविद्यालय तक की लंबी यात्रा तय की है। उपलब्ध संस्थागत इतिहास के अनुसार यहां अलग-अलग समय में प्रिंसिपल और कुलपति संस्थान का नेतृत्व करते रहे, लेकिन किसी मौजूदा कुलपति को लगातार दूसरा पूर्ण कार्यकाल दिए जाने का यह पहला अवसर बताया जा रहा है। इस लिहाज से प्रो. सोनिया की पुनर्नियुक्ति केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि KGMU की प्रशासनिक परंपरा में भी महत्वपूर्ण बदलाव है।
पहली पारी में NAAC A++, अब गुणवत्ता को जमीन पर उतारने की चुनौती
प्रो. सोनिया नित्यानंद के पहले कार्यकाल की सबसे प्रमुख उपलब्धियों में KGMU को NAAC A++ मान्यता मिलना शामिल है। किसी चिकित्सा विश्वविद्यालय के लिए यह केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं होती, बल्कि शिक्षण, शोध, अस्पताल सेवाओं, प्रशासन और बुनियादी ढांचे के कई मानकों का मूल्यांकन इसमें शामिल रहता है।
हालांकि राष्ट्रीय रैंकिंग के मामले में एक तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है। KGMU को NIRF 2025 की मेडिकल श्रेणी में देश में आठवां स्थान मिला था, इसलिए इसे देश के शीर्ष पांच चिकित्सा संस्थानों में शामिल बताना सही नहीं होगा। फिर भी किसी बड़े राज्य चिकित्सा विश्वविद्यालय के लिए शीर्ष दस में बने रहना महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
दूसरी पारी में अब चुनौती यह होगी कि रैंकिंग और मान्यता का प्रभाव मरीजों और छात्रों को मिलने वाली वास्तविक सेवाओं में भी उतनी ही स्पष्टता से दिखाई दे।
रोबोटिक सर्जरी को मिली रफ्तार
प्रो. सोनिया के पहले कार्यकाल की सबसे चर्चित उपलब्धियों में KGMU में रोबोटिक सर्जरी का विस्तार रहा। संस्थान ने दो रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम स्थापित किए और विभिन्न विभागों के डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण दिया। शुरुआत में सामान्य सर्जरी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, स्त्री एवं प्रसूति रोग, कैंसर सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी और बाल सर्जरी जैसी सेवाओं में रोबोटिक तकनीक का उपयोग बढ़ाया गया।
CSR सहयोग से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए रोबोटिक सर्जरी को रियायती या निशुल्क करने की पहल भी की गई। संस्थान को इसी उद्देश्य से अतिरिक्त CSR सहयोग भी मिला है। रोबोटिक तकनीक का उपयोग हड्डी रोग तक भी पहुंचा। KGMU में रोबोट-सहायित हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी के मामले भी सामने आए और विश्वविद्यालय प्रशासन ने भविष्य में कम चीरे वाली, अधिक सटीक सर्जरी के विस्तार को प्राथमिकता बताया।
दूसरे कार्यकाल में प्रो. सोनिया ने भी संकेत दिया है कि आधुनिक इलाज को तकनीक से जोड़ना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में रहेगा। रोबोटिक सर्जरी के साथ प्रशिक्षण, लागत कम करना और गरीब मरीजों तक इसकी पहुंच बढ़ाना इस दिशा में अगली बड़ी परीक्षा होगी।
लिवर, किडनी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट पर भी फोकस
पहले कार्यकाल में ट्रांसप्लांट सेवाओं के विस्तार पर भी जोर रहा। KGMU पहले से बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी जटिल सेवाओं से जुड़ा रहा है, जबकि किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट कार्यक्रमों को संस्थागत स्तर पर और मजबूत करने की दिशा में काम बढ़ा।
प्रो. सोनिया की अपनी पेशेवर पहचान भी हेमेटोलॉजी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट से गहराई से जुड़ी है। उन्होंने SGPGI में क्लिनिकल हेमेटोलॉजी की सेवाओं को विकसित करने में भूमिका निभाई और 1990 के दशक में बोन मैरो ट्रांसप्लांट कार्यक्रम से जुड़ीं। उनकी दूसरी पारी में कैंसर, रक्त रोग और ट्रांसप्लांट चिकित्सा को शोध तथा उन्नत चिकित्सा सेवा से और करीब जोड़ने पर नजर रहेगी।
500 बेड का नया ट्रॉमा सेंटर सबसे बड़ी परियोजनाओं में
KGMU पर पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश के अलावा पड़ोसी राज्यों तक से गंभीर मरीजों का भारी दबाव रहता है। मौजूदा ट्रॉमा सेंटर की क्षमता लंबे समय से कम पड़ती रही है। इसी कारण 500 अतिरिक्त बेड वाले नए ट्रॉमा सेंटर की परियोजना आगे बढ़ाई गई। जुलाई 2025 में राज्य सरकार ने KGMU से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाओं के साथ इस विस्तार को भी गति दी थी। KGMU का मौजूदा ट्रॉमा सेंटर उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण लेवल-1 ट्रॉमा सुविधाओं में है। अब दूसरी पारी में सबसे बड़ी प्रशासनिक चुनौतियों में से एक यह होगी कि नया ट्रॉमा-2 समय पर तैयार हो, आवश्यक डॉक्टर और नर्स मिलें और वह केवल भवन बनकर न रह जाए बल्कि पूरी क्षमता से संचालित हो।
रोज हजारों मरीज, बेड और डॉक्टर दोनों कम
KGMU का सबसे कठिन प्रश्न उसकी लोकप्रियता ही है। यहां प्रतिदिन हजारों मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। गंभीर बीमारियों, सुपरस्पेशियलिटी और रेफरल मामलों का दबाव लगातार बढ़ता है। अस्पताल की कुल बेड क्षमता के मुकाबले मरीजों की संख्या इतनी अधिक है कि ओपीडी, भर्ती, जांच और ऑपरेशन सभी सेवाओं पर दबाव बना रहता है।
इसी से जुड़ी दूसरी चुनौती मानव संसाधन की है। संस्थान में चिकित्सकों, नर्सिंग कर्मियों और तकनीकी कर्मचारियों के कई पद खाली बताए जाते हैं। यदि आने वाले वर्षों में ट्रॉमा, कार्डियोलॉजी, रोबोटिक सर्जरी और ट्रांसप्लांट सेवाओं का और विस्तार होता है तो डॉक्टर और प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ की जरूरत भी बढ़ेगी।हाल ही में KGMU ने कार्डियोलॉजी सेवाओं में भी 56 अतिरिक्त बेड जोड़े हैं, जो मरीजों की बढ़ती मांग का संकेत है।
CT-MRI की लंबी प्रतीक्षा खत्म करना होगा
बड़ी संख्या में मरीजों की वजह से CT स्कैन, MRI और अल्ट्रासाउंड जैसी जांचों के लिए प्रतीक्षा भी बड़ी समस्या है। कई मरीज इलाज से अधिक समय जांच की तारीख मिलने में गुजार देते हैं। संस्थान अपनी मशीनों और डायग्नोस्टिक क्षमता को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।दूसरी पारी में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या KGMU जांच सेवाओं में ऐसी क्षमता विकसित कर पाता है जिससे गंभीर मरीजों को समय पर रिपोर्ट मिले और उन्हें बाहर महंगी जांच कराने पर मजबूर न होना पड़े।
दवा खरीद और वितरण में पारदर्शिता की परीक्षा
विश्वविद्यालय में दवाओं की खरीद और मरीजों तक उनके वितरण की व्यवस्था भी लगातार निगरानी मांगती है। कुछ विभागों में दवा वितरण से जुड़ी कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद जांच कराई गई थी।अब प्रशासन के सामने चुनौती होगी कि दवा खरीद, स्टॉक और वितरण को डिजिटल ट्रैकिंग से इस तरह जोड़ा जाए कि मरीज को निर्धारित दवा उपलब्ध हो और किसी स्तर पर अनधिकृत वितरण या खरीद की गुंजाइश न रहे।
फायर सेफ्टी अब नजरअंदाज नहीं की जा सकती
बड़े अस्पतालों के लिए अग्नि सुरक्षा अत्यंत संवेदनशील विषय है। KGMU के कई भवन पुराने हैं और समय के साथ उनमें चिकित्सा उपकरण, ऑक्सीजन लाइन, बिजली की वायरिंग और मरीजों का भार बढ़ता गया है।ऐसे में सभी इमारतों की फायर NOC, अलार्म, हाइड्रेंट, आपात निकास, पुरानी वायरिंग और नियमित मॉक ड्रिल सुनिश्चित करना दूसरी पारी की अहम प्रशासनिक जिम्मेदारी होगी। अस्पताल की आग सामान्य इमारत की आग से कहीं ज्यादा घातक हो सकती है, क्योंकि ICU, ऑपरेशन थिएटर और वेंटिलेटर पर मौजूद मरीज स्वयं बाहर नहीं निकल सकते।
डिजिटल KGMU की राह भी आसान नहीं
KGMU को पूरी तरह डिजिटल अस्पताल और विश्वविद्यालय बनाने की कोशिश चल रही है, लेकिन नए सॉफ्टवेयर और ऑनलाइन व्यवस्था को लेकर तकनीकी परेशानियां भी सामने आई हैं। मरीज पंजीकरण, जांच, रिपोर्ट, दवा, भर्ती और भुगतान को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना किसी बड़े अस्पताल में आसान नहीं होता।दूसरे कार्यकाल में प्रो. सोनिया के लिए बड़ा लक्ष्य यह होगा कि डिजिटल प्रणाली डॉक्टर या मरीज के लिए अतिरिक्त परेशानी बनने के बजाय इलाज की गति बढ़ाए।
शोध को मरीज के बिस्तर तक पहुंचाने पर जोर
प्रो. सोनिया नित्यानंद का कहना है कि दूसरी पारी में चिकित्सा शोध को केवल शोधपत्र तक सीमित रखने के बजाय मरीजों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना प्राथमिकता होगी। इसका अर्थ है कि कैंसर, रक्त रोग, संक्रमण, ट्रांसप्लांट, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और अन्य गंभीर बीमारियों पर होने वाला शोध सीधे उपचार पद्धति में दिखाई दे।देश के बड़े मेडिकल संस्थानों की वैश्विक पहचान केवल अस्पताल में मरीजों की संख्या से नहीं बल्कि इस बात से भी तय होती है कि वहां से कितनी नई चिकित्सा तकनीक, दवा, उपचार प्रोटोकॉल और वैज्ञानिक शोध निकलते हैं। KGMU के लिए यह अगली छलांग का क्षेत्र हो सकता है।
KGMU की ही छात्रा रहीं, यहीं से MBBS और MD
प्रो. सोनिया नित्यानंद का KGMU से संबंध केवल कुलपति के रूप में नहीं है। उन्होंने यहीं से 1986 में MBBS और 1989 में MD (मेडिसिन) की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने हेमेटोलॉजी, इम्यूनोलॉजी और चिकित्सा शोध के क्षेत्र में लंबी यात्रा तय की।
वर्ष 2025 में भारत सरकार ने चिकित्सा क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। KGMU की वर्तमान आधिकारिक सामग्री भी उनके नाम के साथ Padma Shri Awardee 2025 दर्ज करती है। उनके परिवार के लिए भी पद्म सम्मान विशेष संयोग है, क्योंकि उनके पिता को भी पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है।
दूसरी पारी में उपलब्धियों से ज्यादा अपेक्षाएं
पहली पारी में किसी कुलपति के सामने विश्वविद्यालय की दिशा तय करने की चुनौती होती है। दूसरी पारी में चुनौती अधिक कठिन होती है, क्योंकि तब तुलना अपने ही पिछले कार्यकाल से होती है।प्रो. सोनिया नित्यानंद को अब NAAC A++, रोबोटिक सर्जरी और नई परियोजनाओं की शुरुआत से आगे बढ़कर यह दिखाना होगा कि इन उपलब्धियों का वास्तविक लाभ मरीजों और विद्यार्थियों तक कितनी तेजी से पहुंचता है।
रोबोटिक सर्जरी केवल मशीन खरीदने तक सीमित न रहे, ट्रॉमा-2 केवल नया भवन न बने, ट्रांसप्लांट सेवाएं लगातार चलें, डॉक्टरों की कमी दूर हो, जांच की प्रतीक्षा घटे, दवा व्यवस्था पारदर्शी बने, पुराने भवन सुरक्षित हों और डिजिटल प्रणाली मरीज के लिए सरल हो—यही दूसरी पारी की असली कसौटी होगी।
KGMU के 121 वर्षों के इतिहास में लगातार दूसरी बार कुलपति की जिम्मेदारी मिलना निश्चित रूप से प्रो. सोनिया नित्यानंद के लिए बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसी के साथ उनसे अपेक्षाएं भी दोगुनी हो गई हैं। पहले कार्यकाल ने उपलब्धियों का आधार बनाया; अब दूसरा कार्यकाल तय करेगा कि KGMU उस आधार पर राष्ट्रीय स्तर का और मजबूत चिकित्सा, शोध और मरीज सेवा मॉडल बन पाता है या नहीं।